Saturday, October 29, 2011

Om Varmaकी ओर से श्रीलाल शुक्ल को दो पंक्तियाँ .....अदभुत.........है ओम भाई..........

" जब तक लंगड़ को नक़ल , मिले नहीं तत्काल |
तब तक विसरेंगे नहीं, हमें कभी श्रीलाल ||"

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