Saturday, October 29, 2011

देवास के चुतियापे

सुबू चार पांच बजे उठकर बस स्टेंड पहुँचना और भोपाल जानेवाली बसों से अखबार उतारना, गिनना, छोटे लोंढो को बांटने को देना, फ़िर बचे खुचे अखबार बेचना, नो बजे के करीब घर जाना थोड़ी देर तक और सोना, फ़िर बारह बजे घर से झकास खादी का सफ़ेद कलफ किया हुआ कुर्ता पाजामा पहनकर निकलना और किसी भी सरकारी विभाग में जाकर ब्लेकमेल करना कि रूपया दे दो ठाकुर वरना कल के अखबार में छप जाएगा पुरे का पूरा घोटाला....आते समय थाने से दारू की बोतल का इंतज़ाम, देर रात सरकारी अस्पताल में घुसकर जवान खूबसूरत लेडी डाक्टर से हुज्जत करना फ़िर उसके हाथ से चांटे खाना, फ़िर अस्पताल के खिलाफ लिखना कि सुविधाएँ नहीं है बला बला ........ये सब चुतियापे पत्रकारिता कहलाता है इस देवास में!!! भला हो कि अब अखबार वाले ब्यूरो रखने लगे है जिनके सरकारी भाई बहन अखबार का पेट भरते है, कमीशन वसूलते है, फोन अटेंड करते है और नौकरी तो बिलकुल नहीं करते अब ये चुतियापे तो देवास में ही संभव है ना. ( देवास के चुतियापे)

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