Thursday, March 31, 2016

Dr Anula Khare, Principal, Bhopal Instt of Engineering, Bhopal MP


Dr Anula Khare यानि हमारी मित्र अनुला, आज इनसे भोपाल में 27 बरसों बाद मिला. सन 87 - 88 की बात है एकलव्य देवास से दवाईयों को लेकर एक जनविज्ञान यात्रा निकल रही थी हम सब युवा जोश में शामिल थे , बर्तोल्ड ब्रेख्त की कविता " डाकटर हमें मालूम है अपनी बीमारी का कारण" जैसी सशक्त रचना थी, डा मीरा सदगोपाल , डा प्रीती तनेजा और उनके दो विद्यार्थी राजीवलोचन शर्मा और मोहम्मद अली आरीवाला के साथ कई लोग इस यात्रा में थे. दो छोटी सी नन्ही कलाकार भी थी जिनमे एक वन्दना मालवीय और अनुला थी. बस उसके बाद अनुला से थोड़ा सम्पर्क रहा, बाद में वो इंजीनियरिंग करने चली गयी फिर शादी और सम्पर्क टूट गया. पिछले हफ्ते अचानक लिंकडेन पर मिल गयी खूब बातें हुई और आज आखिर भोपाल में प्रत्यक्ष मिलें, हमारी लाडली अनुला आज भोपाल के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग महाविद्यालय की प्राचार्या है और शादी के बाद अपने पति के सहयोग के कारण एम टेक किया, पी एच डी की, यूरोप घूमी और आज एक बड़े स्टाफ और कई ट्रेंड पढ़ने और पढ़ाने वालों को मैनेज करती है.

दो प्यारी सी बेटियाँ है, एक जेंडर प्रशिक्षण कार्यशाला में अनुला ने बहुत प्रभावी उदबोधन दिया इतना कि वहाँ उपस्थित महिलायें और किशोरियां अनुला को देर तक घेरे रही और पूछती रही सवाल और संतुष्ट होती रही, लड़कियों को एक राह मिली और कुछ ने तो संकल्प भी लिया.
वाह अनुला मजा आ गया यार तुम्हे इत्ता बड़ा देखकर, अदभुत दोनों बहने अनुला और सोनुला गजब की होशियार और तेज तर्राट , गर्व होता है और अपने को तुम लोगों से जुड़ा होने का फक्र भी. !!!!
क्या आपने अनुला नाम सुना है ? सम्राट अशोक ने जब बुद्ध धर्म ग्रहण करके बुद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपनी बहन संघमित्रा के साथ दुनिया के कई देशों में गए तो श्रीलंका भी गए और वहाँ वे मिलें वहाँ की राजकुमारी से जिसका नाम अनुला था, और बाद में अनुला ने भी बौद्ध धर्म ग्रहण किया और अशोक के साथ भारत आई थी.
खैर खुश रहो अनुला, खूब तरक्की करो यश कमाओं और आगे बढ़ती रहो.

सदाचार 29 March 16



सदाचार 
"कुछ किया नही जा सकता अब , हम ही नही सारी कायनात भी इसी से परेशान है। देखो ना अब बाजार में कितने अच्छे संतरे आ रहे है, सुंदर पीले और गोल मटोल पर स्वाद सबका एक जैसा कहाँ है खट्टे मीठे, बेस्वाद वाले भी है पर कोई देखकर पहचान सकता है इन्हें ? दुःख तब होता है जब हम अच्छा खासा, बड़ी फांक वाला संतरा खोलते है और रेशों को छिलते है तो सबसे मीठी फांक बगैर बीज वाली निकलती है!!! किसने सोचा था, तुम बताओ क्या कोई जानबूझकर यह बगैर बीज वाली फांक का सन्तरा खरीदकर लाया था ...."
कमरे में सन्नाटा था, और सब चुप थे। कांता बुआ फर्श पर बिखरी इमली फोड़ रही थी और फिर कहने लगी, "देखो इसमें भी चीये नही निकल रहे, अब इत्ता बड़ा पेड़ , इत्ती मनभर इमली और कुछ बगैर चीये वाली, पेड़ का दोष नही है बेटा, बहु को समझा...."
सब कमरे से उठकर जाने लगे थे और बुआ ने एक टेर छेड़ दी थी ..... वंशिका की आँखों से अश्रू झर रहे थे और कुलदीपक ने उसे आहिस्ते से अपने कांधों से लगाया और अपने कमरे की ओर ले गया, अम्मा बाबूजी चकित थे कि कैसे सात साल से चला आ रहा कलह एक झटके में मिट गया ।

Sunday, March 6, 2016

Posts of 5 March 16



एक बात तो है - जसोदा और कन्हैया दोनों ने बदनाम तो बहुत किया।
!!! इति !!!

*****
एक कन्हैया की जीभ काटने के पांच लाख और अगर तीन वामपंथी या कांग्रेसियों की काटेंगे तो पन्द्रह लाख खाते में आएंगे ।
अब समझे काला धन मतलब कन्हैया जो काला था कि "लाल जुबान" काटोगे तो काला धन मिलेगा।
असल में घोषणापत्र का संशोधित स्वरुप अब आया है, बेचारों ने लगभग एक साल दस महीने में घोषणा पत्र में बदलाव किया जो कि वाजिब है।
तुम साले सब गधे हो , बहन विस्मृति की तरह बारहवीं पास और सात दिवसीय येल डिप्लोमाधारी हो, कम्बख्तों जे एन यु में पढ़ने ना सही - रात के उतरे छिलके गिनने ही चले जाते !!!
*****
क्या सोच रहे थे परसों रात में जब मेरा भाषण पूरी दुनिया सुन रही थी और कल जब मै रविशकुमार के साथ बात कर रहा था और एक बार फिर से हिन्दू राष्ट्र सुन रहा था, अब यही बता दो - 'मन की बात' करोगे अगले महीने, तब तक मै भरी गर्मी में तुम्हारा पसीना निकालने आसाम, पश्चिम बंगाल या कही और चला जाउंगा.........
अच्छा ये बताओ कि कल रात को फोन आये कि नहीं-
श्रद्धेय महामात्य द्वय आडवानी जी और मुरली मनोहर जी के 
परम पूज्य मोहन भागवत जी के
बहन विस्मृति ईरानी के
योगीनाथ, साध्वी उमा भारती, और अन्य तपस्वी सांसदों के
गोविदाचार्य जी के
अमित जी भाई शाह के
शिवराज, रमण और वसुंधरा के

ममता आंटी ने नीतिश, लालू और सीता "राम" चाचा से बात की है और न्यौता भेजा है माछ-भात का. अंकल मै दिल्ली छोड़कर जाऊं - अरविन्द भाऊ की दिल्ली.....
सोये भी नहीं रात भर, सही भी है अब चचा येचुरी मुझे अप्रेल में पांच राज्यों में भ्रमण करवा रहा है कल कह दिया उसने, सरेआम चैनल्स पर....
और हाँ, सुना कि दीपक, रोहित, अर्नब और आँखों का तारा राजदुलारा सुधीर आज सुबह सफ़ेद झक्क कपड़ों में मातम पुरसी में आये थे निजी निवास पर!!! क्या नाश्ता दिया - फाफडा, ढोकला, डाभेली और उष्णपेय ?
आज कसम से गंगा ढाबा आ जाओ, लंच साथ करते है, पनीर, मैथी, दाल तड़का और तंदूरी रोटी एकदम कड़क - माँ कसम बटर लगा के खिलाउंगा शाकाहारी गनगा, झेलम और सतलज के पानी से बना सात्विक भोजन, एकदम फिरी में.... कल हो ना हो, जेएनयु में कोई कुछ नहीं कहेगा........और विस्मृति को ले आना दोपहर में मानद "डी लिट्" दे देते है , उन्हें ताकि "कलंक कागज़ से कारा" दाग मिट जाए........
माफी दे देना माई बाप.....मै राष्ट्रप्रेमी हूँ शत-प्रतिशत.
*****
जिन मुफ्तखोर क्रिकेट खिलाड़ियों, सिने कलाकारों को गरीब जनता ने अपना पेट काटकर दुनिया के अमीर लोगों में ला दिया वे देश प्रेम और द्रोह पर बोल नही रहे, ये दो कौड़ी के टुच्चे लोग किसी की तरफ से बोले पर आएं तो सड़कों पर, इसका साफ़ मतलब है कि बाढ़, भूकम्प और त्रासदी में जब ये चन्दा उगाहने आते है तो भृष्ट नेताओं की तरह ये भी अपना घर भर लेते है।
भक्तों समझ रहे है, इनसे तो साहित्यकार भले जो सड़क पर आये जूते खाये तुम्हारे और पुरस्कार भी वापिस किये।
आओ सचिन, गावस्कर, रैना, कोहली साइना, अनुष्का, सनी लियोन, कोंकणा, प्रियंका और सदी के नायक अमिताभ , सड़क पर आओ, बताओ तो सही पार्टनरों तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है ?
और अंत में अडानी, जिंदल अम्बानी, टाटा, गोदरेज, अजीम प्रेम, नारायण मूर्ति , सुधा मूर्ति सिर्फ घर ही भरते रहोगे, कुत्तों की तरह दूम ही हिलाते रहोगे या कभी जाकर बाथरूम में ही सही एक बार तो अपना चेहरा नंगे बदन आईंने में देख लेना और पूछना अपने आप से कि किधर खड़े हो तुम ???
*****
आदिवासियों के लिए जिनका सब कुछ छीन लिया और बाद में नक्सल कहकर मार दिया, रमन सिंह अजीत जोगी , महेंद्र कर्मा ने जितनी आदिवासियों की हत्या की है नक्सल के नाम पर वह सुधीर चौधरी जैसे चूतियों की फेब्रीकेटेड न्यूज समझकर कम से कम दिल्ली में तो समझ नही आ सकता उसके लिए पहाड़ी कोरबा से लेकर खत्म होते आदिवासी समुदाय के बीच जाना होता है और जटिल जीवन को समझना होता है। सिर्फ लिजलिजी देश प्रेमी भावनाये भड़काकर और जवानों को आगे करके अपनी राजनीति चलाने वाले क्या जानते है। यहां देश भक्ति का ज्ञान और जवानों की बात करने वाले कितना जानते है छग को, उन्हें पता है वे एक नमक की थैली और दो रुपये का तेल लेने एक दिन में तीस से चालीस किमी चलते है। आपको पता है इस लूट ने आदिवासियों की कई प्रजातियों को खत्म कर दिया, कभी मिले है सोनी सोरी से, कभी गए है दंतेवाड़ा इस सुकमा के किसी गाँव में जहां अर्ध सैनिक बल की टुकड़ियां शोषण का तांडव मचाती है नाबालिग बच्चियो के साथ बलात्कार करती है। उनकी जल जंगल जमीन छिनकर अडानी, अम्बानी और जिंदल को दे दी इन्ही मासूम जवानों को आगे करके। 
कभी दिल्ली में हो तो भाई Himanshu Kumar से मिलो, पूछो या गरीबी देखना हो तो चलो मेरे साथ गरियाबंद या सुकमा।
सुधीर चौधरी जैसे मूर्ख और दलाल को क्या मालूम कि आदिवासी होता क्या है, विस्थापन होता क्या है, आपको जाट आंदोलन में एक समय पानी नही मिला तो सुप्रीम कोर्ट चले गये और छग में सरकार ने नदी बेच दी थी, सोचो तुम्हारे घरों में छग की मजदूर लड़कियां काम ना करें तो तुम दफ्तर ना जा पाओ या पोटी भी ना कर पाओ , सोचा ये बच्चियां क्यों है घरों में तुम्हारे ???

*****
हिंदुस्तान के सबसे बड़े वाले गंवार देखना हो तो लाईन से न्यूज चैनल देखते चलें, कसम से सिर फोड़ लेंगे, इतने चूतिये एक साथ मिलेंगे कि लगेगा कि सही किया मोदी ने विस्मृति को मानव संसाधन मंत्री बनाकर।
*****
सुधीर चौधरी कितना बड़ा गधा है, इस चूतिये को सुकमा भेज दो साले को - लोटा भी मत दो, नक्सली इसकी ऐसी बजायेंगे कि मीडिया भूल जाएगा और मण्डी हाउस में ना अंडे बेचे तो नाम पलट देना।
*****
Zee न्यूज सच में सदमे में है, माफ़ कर दो इन कमीनों को। छग में 125 करोड़ लोगों की सुरक्षा सुकमा में हो रही थी। Dilip Khan, कोई कारगर इलाज है क्या इन $#@$#@ का ???
*****

Wats app वैसे उन लोगों और भड़ासियों के लिये अच्छा मंच है जो कही छप नही पाते और अपने पांच पचास लोगों को रोज वही बासी मसाला भड़ास परोसकर दिन भर बकलोल करते रहो, रात में सबकी माँ बहन सभ्य तरीके से करते हुए सोने का स्वांग भरो
फेसबुक इससे बड़ा मंच है जो चार पाँच हजार तथाकथित दोस्तों से लड़ते भिड़ते दिन भर निकालो, रोज मेहनत करो और फिर लाइक गिनते, काले कलूटों को ब्लॉक करके सोते जाने का स्वांग करो।
बाकि सब तो हर पन्द्रह दिन में मिलजुलकर रिटायर्ड और मरे खपे लोगो की घटिया किताबों पर चर्चा करके, देश विदेश के यात्रा संस्मरण, और राजनैतिक सामाजिक अप्रासंगिक विषयों पर व्याख्यान का धंधा चलाकर भी आप महान और प्रसिद्ध हो सकते है। यानि जब देश में देश द्रोह की बात हो, रोहित वेमुला मर जाये तो आप प्रेम, देह, कहानी की उपादेयता, कविता में सौंदर्य की बात करो यह जताते हुए समाज को कि साहित्य समाज का दर्पण है और बेबस नंगे भूखे लोगों को ब्रिटेन, अमेरिका के यात्रा संस्मरण सुनाये किसी दारु के ठेके पर और पूछे कि पार्टनर पॉलिटिक्स क्या है, या अपने जन्मदिन को चार मुफ़्त खोर लौंडों को दारु का लालच देकर किसी चौराहे पर बैठकर फेसबुक पर आत्ममुग्ध होकर चुगद किस्म के फोटो चेपते रहो - एक दिन में पचास हजार ।
इस सबमे सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाले चापलूस मक्कार और अवसरवादी तो बन ही जाते है पर अंत में रीढ़ की हड्डी खो देते है एक दिन। हाँ खाते में इस दौरान सहेज लेते है - कई पुरस्कार, कागज के चीथड़े, बूढी हो चुकी महिलाओं के फोन नम्बर, कमसिन लड़कियों के सिर पर हाथ फेरने का हौंसला, और चार छह संपर्क जो बुढ़ापे में दूध दे सकें और मरते समय हाय वो दिन, हाय ये दिन कर सकें और अंत समय कम से कम श्मशान में एक भीड़ जिसमे से कोई भी जल्दी से दो टसुये बहाकर धीरे से निकल लें कहते हुए कि "बड़ा चालू था साला " ....
और अंत में छपने वाले, जब तक सरकारी नोकरी के साथ प्रकाशक बनकर किताबें छापने वाले घाघ और हरामखोर प्रकाशक सह वेब पोर्टलों के स्वयं भू सम्पादक ज़िंदा है - लिखने वाले और छपवाने वाले मूर्खों की कमी नही है, एक बार किताब बाहर हुई सात माशी (अर्ध विकसित बच्चे की तरह) फिर वाट्स एप से यानी ऊपर से पढ़ना शुरू करो ।

Friday, March 4, 2016

Posts of 4 March 16 #Kanhaiya, - the JNU President



कन्हैया का भाषण सुनकर याद आया कि कल ही संसद में परम पूज्य दुनिया के सबसे बड़े सर्वमान्य नेता, लोकतन्त्र के उपासक , काला धन के प्रणेता, भारतीय संस्कृति को जगसिरमौर बनाने वाले श्रीश्री 1008 नरेंद्र मोदी, माननीय प्रधान मंत्री, भारत सरकार, ने कहा था -
कुछ लोगों की उम्र तो बढ़ती है, लेकिन समझ नही।
स्वमूल्यांकन तो नही कर रहे थे - क्या कहते है अँग्रेजी में Introspection !!!!
इति !!!
*****
कन्हैया जो कह रहा है उस पर तार्किक बात करो उजबक, मूर्ख और संघी doctored रटी रटाई बातों पर कोसो मत मित्रों। और वो नेतागिरी कर रहा है तो यह ध्यान रहें कि सारा ठेका गली मोहल्ले में पड़े और कुंठित हो रहे टुच्चे लोगों ने नही ले रखा है, तुममे से कोई एक भी इस तरह का तार्किक भाषण दे दें, विस्मृति से लेकर महामात्य भी तो मान जाऊंगा।
असल में सत्यमेव जयते को तुम लोगों ने अपनी "फादर प्रॉपर्टी" समझ लिया इसलिए कन्हैया का एक एक शब्द नश्तर की भाँती चुभ रहा है।
मुझे द्रोपदी के शब्द याद आते है जो भीष्म के लिए थे कि नमक उनका खाया है ना तो सत्य के समर्थन में न्याय कैसे करोगे , तुम लोग तो कर्ण बन गए हो जो सत्य को जानते हुए भी गलत के साथ खड़े हो । अपनी नही, देश की नही पर अपनी औलादों के लिये एक सही, अच्छे और न्याय पर टिके समाज के लिये बोलो, सोचो और तय करो।
*****
आईये मुझे कोसिये
मैं कन्हैया को 2019 या 2024 के चुनावों के बाद भारत के प्रधानमन्त्री के रूप में देखता हूँ ।
नए गठजोड़ में अरविन्द केजरीवाल, बसपा और जे एन यु पार्टी मिलकर देश में सरकार बनाएंगे।
जल्दी लग रहा है या आपको मैं उतावला लग रहा हूँ या ...... आप रिक्त स्थान की पूर्ति करें , पर यह ना भूलें स्व दुष्यंत कुमार बहुत साल पहले लिख गए है
लाल सूरज अब उगेगा, देश के हर गाँव में
अब इकठ्ठे हो चले है, लोग मेरे गाँव के

ले मशालें चल पड़े है, लोग मेरे गाँव के !!!
*****
You tell me one leader of 29 years old leader in last 70 years who could speak so smartly with logics, facts, satire, vision, action and clear strategy in a spontaneous way and extempore. Neither Nehru, nor Gandhi, nor Ambedkar nor even Modi. He may fail tomorrow but his speech is a world heritage. Accept it generously.
*****


Thursday, March 3, 2016

Posts of 1-3 March 16

यादें माज़ी अज़ाब है या रब 

छीन ले मुझसे हाफ़िज़ा मिरा !!!



जमानत के सिलसिले में सही, पर (दरअसल वास्तव में गुलशन बावरा) के लिखे मनोज कुमार की देशभक्ति भुनाने वाली फिल्म 'उपकार' के गाने (मेरे देश की धरती सोना उगले) से 'मातृभूमि' के प्रति प्रेम को परिभाषित करता फैसला कन्हैया कुमार के देशभक्तिपूर्ण भाषण पर भरोसा करने में हिचकिचाता है, न्यायाधीश महोदया का यह कहना कि उपकार से देश भक्ति सीखें..... इसी तरह से कानन कौशल संतोषी माँ के रूप में स्थापित हुई थी और अरुण गोविल श्रीराम के रूप में, दीपिका सीता मैया के रूप में.........और चैनल्स पर इन दिनों बजरंग बली से लेकर तमाम धार्मिक ग्रंथो की भरमार है, उर्दू हो, हिन्दी या, क्षेत्रीय भाषा में !!! जीसस से लेकर सारे भगवान, खुदा, और सर्व शक्तिमान मौजूद है.
यानी अब हमारी न्याय पालिकाएंं हमें फिल्मों से प्रतीक सीखकर धर्म, देशभक्ति या अन्य मूल्य सीखने को कह रही है. एक धर्म निरपेक्ष राज्य और संविधान से शासित देश में कैसे न्यायपालिकाएं अपने फैसलों में धर्म, नैतिकता और अन्य आख्यान या दृष्टांत देकर फैसलें दे रही है यह समझना हो तो पिछले तीन सालों में आये फैसलों को पढ़ लें चाहे वे स्त्री विमर्श के हो, श्रम क़ानून के, व्यक्तिगत अधिकार के मसले मसलन- भोजन, सेक्स, लिखने- पढ़ने या अन्य कुछ.
दुर्भाग्य यह भी है कि इतने बड़े देश में इतनी भीड़ में न्यायालय ही बचे है जो कोयला आवंटन, बस- रेलवे, कैटरिंग, नौकरी, इन्क्रीमेंट, सार्वजनिक कर, LGBT समुदाय के हक़, ग्रीन ट्रिब्यूनल, चुनाव से लेकर बाकि सारे काम करते है क्योकि हमारा तंत्र लड़खडा ही नहीं गया ध्वस्त हो गया है और अब देशभक्ति को सीखने - सिखाने को न्यायालय ही रह गए थे जो Doctored वीडीओ, बस्सी जैसे नापाक अफसरान और उपकार के स्व मनोज कुमार के सहारे देश भक्ति सीखा रहे है.
जो युवा पिछले दो दशकों से हमारा प्रिय भारत देश छोड़ रहे है वे मूर्ख नहीं है सही पढ़े है IITs, IIMs में, जिसे आप "ब्रेन ड्रेन" कहकर कोसते है - वे असली समझदार है; मूर्ख हम और आप है जो इस लद्दड और खंडित हो चुकी व्यवस्था में जीने को अभिशप्त है........

सही पकडे है, अब बोलना मत, थोड़ा विचारिये और मंथन करिए.......आप है कहाँ जनाब और ये सब आपका ही किया धरा है कोई मंगल या शुक्र ग्रह से नहीं आया था सिखाने को- बिगाड़ने को अब कलयुग में अवतार की प्रतीक्षा कीजिये........... एक अवतार तो आपने देख लिया महिषासुर और दुर्गा भी बस, याद रखिये हम सब भस्मासुर है ............

*****
LBSNAA मसूरी के पाठ्यक्रम में जब तक बदलाव नही लाएंगे तब तक बस्सी और पिल्लई जैसे सांप और संपोले पैदा होंगे।
देश हित में जरूरी है कि इसे बम से उड़ा दिया जाए ताकि नए पानी की झीर से साफ़ , निर्मल पानी आये और नवनीत जैसे उपयोगी देश के हित में बोलने और काम करने वालों की उत्पत्ति हो ना कि चापलूस, और भृष्ट ब्यूरोक्रेट्स की।
बस्सी को देश के हित में सार्वजनिक रूप से बेइज्जत किया जाए और उसके पेंशन उपरान्त लाभांशों पर प्रतिबन्ध लगाया जाए।

*****
नेपाल की बेरोजगारी का असर दिख रहा है, अनुभवहीन, मक्कार और उज्जड़ किस्म के चौकीदारों की संख्या देश में अचानक बढ़ गयी है, दे दो रे , इन बेरोजगार निर्लज्जों को कुछ भी काम - कुछ नही तो अपने कुत्ते घूमाने को रख लों !! ये अपना और अपने बाप का देश समझकर यहां चले आये है और कमजोर दक्षताओं और बगैर कौशल के मेरे देश की चौकीदारी करने आये है, हाँ बहुत सस्ते और रीढ़विहीन जरूर है - पर जमे रहेंगे क्योकि वहाँ कुछ काम नही है, एक निठल्लों की फौज जमा है और हर कोई अब चौकीदारी करने का बीड़ा लेकर जोश में है।
जय हिन्दू राष्ट्र नेपाल की !!!

*****
DM Delhi देश द्रोही है , कन्हैया से मिला हुआ है मितरो !!!!

*****
कितना और गिरोगे
वो तो मूर्ख है ही, पप्पू है पर तुम तो गणमान्य हो, इतने ओछे स्तर पर आ गए । शर्मनाक नही है, इतिहास में लोकसभा की बहस में इस तरह से याद कहलाना चाहोगे ? छी !!!
लोकसभा में भांड

*****
First time a powerful govt of second largest country got scared of 10 young students, merely because of 4 Stupid media guys and a cunning lady called Shilpi Tiwari , interestingly the govt got scared due to doctored video, what hell they talk of fighting with Pak. We cant trust these guys who bank upon photo shop and minister who speak Lie in parliament.
Still entire Modi govt got a good shock who were involved in conspiracy. Should feel shame that representing 125 cr persons is deeply involved in such a dirty work along with a team of idiots in Media and illiterate MPs, ministers and photo shop operators. A big shit on faces of ruling ones. I have read the decision as well, some points r valid but on the contrary Court is also in role of preachers and giving away non constitutional references. One can refer the recent decisions given by Hon Courts - full of preaching and religious examples, though we r a secular state. Strange but true !!!!

*****

आज फिर कहता हूँ कन्हैया तुम पर मुझे गर्व है, हम सब तुम्हे , तुम्हारी हिम्मत और जज्बे को प्यार करते है, We Love You ‪#‎Kanhaiya‬
आज पूरी पुलिस, बदले वाली राजनीति, घटिया प्रशासन और सुधीर चौधरी, शिल्पी तिवारी, दीपक, रोहित और अर्नब जैसे लोग फेल हुए है।
स्मृति ईरानी जैसे बचकाना नेता शर्मसार हुए है जो बैकडोर से आये है और मोदी जैसे घाघ नेता और भाजपा जैसी राष्ट्रवादी पार्टी ने देश का महत्वपूर्ण विभाग दे दिया, ये अनुभव की कमी, बगैर पूर्वाग्रह से कह रहा हूँ, भाजपा को ले डूबेगी। मोदी जी आप फेल हो रहे है आप भाजपा के आंतरिक कलह के शिकार हो रहे है, सम्हालिए हम आपको फेल होते नही देखना चाहते क्योकि अभी कोई विकल्प भी नही है ।
दूसरा, अंग्रेजों के बनाये क़ानून की समीक्षा और उन्हें विलोपित करके आज के और आने वाले कम से कम पचास वर्षों के संदर्भ में सुसंगठित किया जाए चाहे वो 370 हो, 377 या 498 या वन क़ानून, रेवेन्यू या सीमा के क़ानून या प्रत्यार्पण के क़ानून।
इस बात को मानिए कि शिक्षा एक पूरी राजनीति है और इस बात को ध्यान में रखकर अपनी किताबें , पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, संस्थान बनाइये, बजट का प्रावधान करिये और खर्च भी करिये, क्योकि कन्हैया के केस से देश में जो ध्रुवीकरण हुआ वह बेहद चिंताजनक है और इस सबके बाद अभी चार " बच्चे " जेल में है, उन्हें भी बाहर लाया जाए और समझाईश दी जाए। वकीलों पर हिंसा की कड़ी कार्यवाही की जाए और बस्सी जैसे गिरगिट अधिकारी जो " स्टील फ्रेम " में गढ़े जाते है उन पर नजर रखने की जरूरत है।
लोगों को अब अपने प्रेशर ग्रुप बनाकर समाज पर निगाह रखना होगी क्योकि सरकार चाहे मोदी हो या मनमोहन कुल मिलाकर लिजलिजी और टाइम पास ही होगी असंवेदनशील और एडहॉक , तो फिर हम सब क्यों भुगते ?
धैर्य रखें और मनन करें , मन की बात 17 बार सुनकर देश का नुकसान ही हुआ है। तो अब अपनी सुनें अपने घर, परिवार, समुदाय, मोहल्ले, शहर की चिंता करें, देश अपने आप ठीक हो जायेगा।
पुनश्च, ‪#‎कन्हैया‬ तुम हम सबके प्यारे, सम्माननीय रोल मॉडल और आज के युवाओं के आइकॉन हो।

*****