मित्रों, शिक्षा का अधिकार क़ानून बन गया है सभी जगह इसे लागू करने के भरसक प्रयास किये जा रहे है. नया सत्र चालू होने वाला है. शासन स्तर पर अतिरिक्त राशि जुटाकर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गये निर्देशों के पालन हेतु भी राज्य दृढ संकल्पित है. सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारें स्कूलों में कई प्रावधान कर रही है. शिक्षकों की भर्ती में बीएड की अनिवार्यता की जा रही है, छोटे-मोटे निजी विद्यालयों पर भी इसके शिकंजे कसे जा रहे है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किये जा सके. जो शिक्षक शासन में प्रशिक्षित नहीं है उन्हें सरकार क्रम से प्रशिक्षित कर रही है, और यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले तीन वर्षों में पुराने सभी शिक्षक प्रशिक्षित हो जायेंगे. इस पुरे परिदृश्य में जो छोटे-मोटे एनजीओ, संस्थाएं और बड़े कार्पोरेट्स शिक्षा में काम कर रहे है यानी सरकारों के साथ विद्यालयों में एमओयु साईन करके शिक्षक प्रशिक्षण से लेकर पाठ्यक्रम बनाना, इसे पाईलेट स्तर पर देखना-परखना, फ़िर लागू करवाना, मूल्यांकन, अनुश्रवण, कक्षा में बच्चो के साथ गतिविधियाँ करना, समुदाय को शिक्षा से जोड़ना, पालक शिक्षा संघ के...
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