Monday, March 19, 2018

Posts of 17/18 March 2018


किसी के देहांत की सूचना देना, अंतिम यात्रा का विवरण देना, उठावना आदि की सूचना देना भी उचित है, या मृतक का फोटो डालना भी उचित है पर शव के साथ तस्वीर डालना और श्रद्धा सुमन या श्रद्धांजली देना कितना उचित है इस सोशल मीडिया पर............
मेरे लिए यह थोड़ा अनुचित और अनावश्यक सा है.
हद तो तब हो जाती है जब मृत देह के साथ सेल्फी लगाकर बेशर्मी की 
सीमाएं पार कर देते है मित्र लोग..........

गुणीजन अपनी राय दें

स्वच्छ भारत अभियान का जोश सिर्फ सर्वेक्षण तक ही सीमित रहता है उसके बाद सिर्फ नगर निगम बाबूगिरी में व्यस्त हो जाता है।
इन लोगों को मालूम है कि जुमला सरकार का व्यवहार भी ऐसा ही है । देख लीजिए सब जुमलों पर काम हुआ तीन तलाक हो, कश्मीरी पंडितों की बसाहट की बात हो या स्वच्छ भारत की।
काम हुआ कि पतली गली से निकल लो और नए जुमले के प्रचार प्रसार में लग जाओ। सर्वेक्षण के बाद जगह जगह बना दिये गए शौचालय हो या सुलभ , डस्टबिन हो या कचरे के ढेर , पिक अप गाड़ियां हो या दफ्तर - गंदगी के ढेर वैसे ही पड़े है जैसे इनके दिमाग़ वही सदियों पुराना कचरा और बजबजाते कुतर्क !

Thursday, March 8, 2018

सखाराम मार्च 2018 से आरम्भ


#सखाराम 

क्यों रे सखाराम - और कितना उत्पात मचाएगा और झूठ बोलेगा उल्लू के चचा !!!
क्यों रे सखाराम, तीन का पहाड़ा याद किया या चौथी पास से भी कमजोर है ?
महिला दिवस पर दिल की भड़ास में महिलाओं के हक के बारे में बहुत कुछ बोला सखाराम और बोलते बोलते रोने लगा। अपनी माँ और माँ भारती की सेवा के बारे में भी उसके द्वारा की जा रही सेवाओं के बारे में, नई योजनाओं के बारे में बताने लगा।
फिर किसी ने पीछे से एक महिला विशेष का नाम लेकर कुछ पूछ लिया तो अनायास सखाराम के मुंह से माँ - बहनों के नाम से सुसंस्कृत भाषा झरने लगी।
सवाल तो आप समझ ही गए होंगे ना !
पकौड़े तलने के बाद मूर्ति भंजन का नया रोजगार सृजित किया है मित्रोंssssssssss.
सखाराम का दिमाग नही है वह कॉपी पेस्ट करके किसी भी पोस्ट पर कुछ भी चेंप देता है , एक बार पूछा मैंने पूछा कि "सखाराम अब सरकार कश्मीरी पंडितों को बसाने में देर क्यों कर रही है" तो बोला "जब तक बुलेट ट्रेन नही आयेगी और जापान के शिंजो को अहमदाबाद सरीखा झुला नही दे देते हम लोग, या दिल्ली में गंगा आरती रोज शुरू नहीं करवा देता केजरीवाल या नवाज की माँ की तरफ से बिरियानी नही आ जाती कडकनाथ मुर्गे की तब तक कश्मीरी पंडितों को नही बसायेंगे".
फिर बोला सखाराम कि मूर्तियों के देश मे हम इसलिए मूर्तियां ढहाते है कि अगले चुनाव के पहले हमारे बुड़बक नेता हर गली मोहल्ले में नई मूर्तियां लगवाने के वादे कर सकें और उनके छर्रें ठेके लेकर रूपया कमा सकें।
सखाराम हंसी उड़ाते हुए बोला कि आलू से सोना बनाने वाली मशीन लगाएंगे ?
पप्पू बोला बिल्कुल "आलू से सोना बनाने वाली मशीन भी लग जायेगी पहले, सबको परिधान मंत्री 15 लाख दे दें - नही तो सोना कौन खरीदेगा, जैसे सब पकौड़ा बनाएंगे तो खायेगा,खरीदेगा कौन "
पप्पू हंसने लगा और सखाराम के माथे पर कश्मीरी बर्फ का पसीना आने लगा ।
वादा निभा दें कम से कम एक तो या हंसी ही उड़ाते रहोगे सखाराम , ऐसा ना हो कि बूमरेंग - (जानते हो ना , नही जानते बूमरेंग के बारे में तो किसी असली पढ़े लिखें से पूछना - येल पेल वाले शिक्षित से नही)
वचन नही निभाने वाले को "प्राण जाए पर वचन ना जाये" कौन होते है मालूम है ना !!!
ऊपर से सुतिये भारतीयों को समझ नही आता कि जैसे 15 लाख, 370 धारा हटाना वैसे ही आलू से सोना बनाने की मशीन और दोनों ही विदेश ज्यादा देश मे कम पाये जाते है ! 

जहाज डूबने की खबर उन जगह के लोगों को पहले मालूम पड़ता है जो समुद्री इलाकों में रहते है पर समुद्र तो वहां भी है फिर समझ क्यों नही आ रहा सखाराम तुम्हे?


तो स्थानीय मुद्दों पर बस नही चला सखाराम का और आखिर अल्पमत में ले आये श्यामाप्रसाद मुखर्जी से लेकर अटल जी की भाजपा को सदन में। नरेश अग्रवाल से कहो कि जाकर सेटिंग करें अपने नैहर में - इतना मल्टी परपज़ आदमी कहाँ मिलेगा जो बसपा, सपा और कांग्रेस से भी सेटिंग कर लें सब उसके घर के है।

अब आगे क्या , आज तो सब ज्ञानान्ध भी आहत है अंदर ही अंदर भरे बैठे है । चाय की गुमटियों से लेकर कॉफी हाउस और ढाबों की खटिया और बासते सोमरस के बीच में से गंधाते अजीब उच्चारणों के बीच कुछ कुछ विद्रोही तेवर सुनाई भी दे रहे है। मुझे चिंता है कि आई टी सेल में बैठे आजीविका कमा रहे दक्ष युवाओं को आज क्या ट्रोल मिलेगा ? शब्दों की भी गन्ध होती है और गन्ध का भी एक इहलोक सखाराम , जानते हो ना !


और योगी को बता दिया गया है कि ज्यादा उड़ना मना है । 2024 का भावी प्रतियोगी है , अभी से उड़ने लगा एक साल हुआ नही इसलिये ससुर को अपने ही घर के बूथ मे 43 वोट दिलवाए गए । और मीडिया वालो सुन लो - यह काँग्रेस, सपा या बसपा से कम हमारी भाजपा का अंतर्कलह ज़्यादा है, मेरे ही दुश्मन पैदा हो रहे है इसलिये यह तय है अब कि जो ज्यादा उड़ेगा - उसे जनता दरबार मे ही निपटा दिया जाएगा। जब चीन में आजीवन राष्ट्रपति रह सकता है जो मेरा दोस्त है तो मैं भारत मे चिर प्रधानमंत्री क्यों नही ?
औकात में रहो बे!!!


राज ठाकरे ने आज जो मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जो भी ठोस , तर्क सम्मत बोला और सबसे महत्वपूर्ण बात कही कि यह सरकार राम मंदिर के नाम पर हिन्दू मुस्लिम दंगे करवाकर या पाकिस्तान पर छदम युद्ध करवाकर 2019 का चुनाव छल से जीतना चाहती है। आज राज ठाकरे ने जो खरी खरी बोलकर महाराष्ट्र के लोगों के सामने मोदी सरकार की पोल खोली है और सचेत किया है कि इन सबसे बचकर रहें - वह बेहद चौकाने वाला है।
इधर राहुल गांधी के तेवर भी देखने लायक है, देश रोज़गार, आर्थिक उन्नति, उत्पीड़न से परेशान होकर उबल रहा है। ज्ञानान्ध भी परेशान है। सारी साथी संगी पार्टियां जुमलेबाजी और घटिया फेंकने की अदा से वाकिफ होकर साथ छोड़ ही रही है, उप्र में योगी के कारनामों ने अल्पमत में ला ही दिया है।


मोदी सरकार की हालत खराब है और कुछ मूर्ख लोग जिसमें मेरी पढ़ी लिखी महिला मित्र भी शामिल है , गंवारों की तरह आई टी सेल के नाजायज उत्पाद वाट्स एप विवि से ठेल रहे है। गधों की कमी नही है।
कुल मिलाकर सखाराम के भजन गाने के दिन आ गए हैं। बोलो सखाराम हारमोनियम ख़रीदे ?
सिर्फ मैं अकेला दोषी नही हूँ । केजरीवाल भी असली नेता है।अब आपको समझ आ रहा है कि दिल्ली में कैसे वो 67 सीट ले गया नाक के नीचे और शेर जैसा होने का नाटक कर रहा था।
किन लोगों से माफी मांग रहा है समझे कि नही ? मैं तो फिर भी विश्व स्तर का नेता हूँ भाईयों बैंनो !
उससे अच्छी राजनीति जानता हूँ याद करो योगी को और मार्ग दर्शक मंडल को !!!

यूपी और बिहार में जो कुछ भी कल हुआ उससे मेरा लेना देना नही, दो साल की राज्यसभा के लिए मैं हाथ नही डालता, योगी भोगी उसके किये बहुत है।
मैं तो सम्यक दर्शन का अनुयायी हूँ। क्षमा वीरस्य भूषनम।
ना ही मेरे अरविंद केजरीवाल के 20 विधायकों को जोती ने जाते जाते जो किया और फिर हाई कोर्ट ने जो किया उससे भी लेना देना नही। मैं जोती की ना पेंशन रोकूंगा ना उसके खिलाफ कुछ करूँगा। गिरगिटों से वैसे भी मैं कम नही अस्तु
अब आगे कर्नाटक चुनाव है और उसके बाद मप्र, राजस्थान, छग आदि। लिहाज़ा, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में मैं इन दिनों विजिटिंग प्रोफेसर हूँ और उनके साथ अपनी कला को भी मांज रहा हूँ। विदेश जाने का योग देखो कब बनता है !


Saturday, March 3, 2018

बुरा ना मानो होली है...............2 March 2018

बुरा ना मानो होली है...............

शिवराज सरकार ने आज पावन दिवस पर घोषणाएं की-
श्रीदेवी को मरणोपरांत एक करोड़ और बोनी कपूर को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की
जिन पत्रकारों ने जोख़िम उठाकर पुनर्जन्म करवाया, लाइव करवाया उन्हें नर्मदा किनारे प्रधानमंत्री आवास देने की घोषणा

रजत शर्मा, सुधीर चौधरी को मप्र गौशाला की प्रबन्धन समिति में सदस्य बनाया , दो कौड़ी के मंत्री समकक्ष की सुविधाएं मिलेंगी, इन दोनों के पास मप्र शुकरदेव समिति के क्रमशः अध्यक्ष और सचिव का प्रभार अतिरिक्त रहेगा
अर्णब को नया कमिश्नर , जनसम्पर्क बनाया , संबित पात्रा निज सचिव मुख्यमंत्री और राकेश सिन्हा को कुक्कुट पालन का प्रभारी बनाया
उमा भारती से लेकर केंद्र में मप्र के प्रतिनिधि मंत्री, सांसदों को व्यापमं का सदस्य बनाया
अमित शाह और नरेंद्र मोदी को मप्र सरकार का समरसता पुरस्कार देने की घोषणा
मप्र के भांड मीडिया के कुछ लोगों को माखनलाल विवि में गौ गोबर पीठ पर विभूषित किया अब ये शिव पुराण लिखेंगे नया
मप्र के योग्य और अतुलनीय विधायकों को निशुल्क प्राथमिक शिक्षा देने की, महापौरों को आंगनवाड़ी में प्रवेश, पार्षदों को निशुल्क पोषाहार , सरपंचों और पंचों को स्वच्छता अभियान से चलित संडास देने की घोषणा की
भ्रष्ट ब्यूरोक्रेसी को अरविंद टीनू जोशी द्वारा निशुल्क कोचिंग का प्रावधान किया जाकर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तुरन्त भेजने की घोषणा की
किसानों को फांसी हेतु निशुल्क रस्सी, सल्फास और सड़क पर मरने के लिए रोड़ रोलर की घोषणा
कुपोषित और नवजातों को गोरखनाथ अस्पताल में भेजने की निशुल्क हवाई सुविधा
संविदा कर्मचारियों को परिजनों सहित अंडमान की सेल्युलर जेल में 5 वर्ष का भोजन निशुल्क
कांग्रेसी, वामियों और बसपाइयों के लिए पतंजलि का जहर निशुल्क , रामदेव वितरित करेंगे
मुसलमान, आदिवासी और दलितों को पाक में जाकर बसने पर दस करोड़ प्रति परिवार मुआवजा
सभी मरने वालों का श्राद्ध मुख्यमंत्री सहायता निधि से होंगे, ब्राह्मणों को जनेऊ निशुल्क
महिलाओं के खिलाफ कोई अपराध पंजीकृत नही होंगे हेमन्त कटारे से लेकर बलात्कारी भाजपाइयों को आधार कार्ड दिखाकर सब करने की छूट

Friday, March 2, 2018

मनोज पवार- मालवा का रंगीन चितेरा कलाकार - होली 1 मार्च 2018


मनोज पवार- मालवा का रंगीन चितेरा कलाकार 
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देवास संस्कृति का एक बड़ा केंद्र रहा है और यहां के लोग जिसे प्यार करते हैं उसे पूजते हैं उसके बंधुआ बन जाते हैं और अपने आशीष से हमेशा नवाजते हैं. होली के अवसर पर चौराहे चौराहे पर होलिका दहन के साथ रंगोली बनाने का बड़ा रिवाज है एक जमाने में स्व. प्रोफेसर अफजल, रमेश राठौर आदि जैसे लोग यह काम किया करते थे कालांतर में धीरे-धीरे यह परंपरा सिमट गई और गिने चुने लोग ही इस काम को करने लगे. यूं तो देवास में विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले भी कम नहीं हैं जो लकड़ी का बुरादा इस्तेमाल कर पानी पर फेंक देते है, पानी पर रंगोली बनाने की बात करते हैं और उन्हें विश्व रिकॉर्ड बनाने के खेल में महारत भी हासिल है परंतु उसका वह मजा नहीं है जो वास्तव में सड़क पर बड़ी सी रंगोली बनाने का होता है.
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मनोज पवार मूल रूप से चित्रकला के अध्येता है और वरिष्ठ चित्रकार हैं देश में इनकी अनेक जगहों पर प्रदर्शनी लग चुकी हैं, पेशे से शासकीय सेवा में हैं और रंगोली बनाने का उनका जुनून होली आने के बहुत पहले से शुरू हो जाता है, और असली काम 10 दिन पहले से शुरू हो जाता है. गत कई वर्षों से वह लगातार देवास के एकमात्र कलाकार बने हुए हैं जो इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं इस वर्ष भी उनकी रंगोली कल का सबसे बड़ा उत्सव था, जहां एक और उन्होंने मांडव के जहाज महल को बहुत बारीकी से उकेरा - वही श्रीदेवी से लेकर कैडबरी चोकलेट को भी बनाया. एब बच्चे को आकाश में निहारते हुए बताना उनकी सामाजिक चिंता का भी द्योतक है जहां वे कह रहे है कि आज हमारे बच्चे आसमान को देखना ही भूल गए है और बचपन से ही मोबाइल में आँखें गड़ाकर प्रकृति, चाँद सितारों को देखना ही भूल गए है. दो नायिकाओं के साथ इस बार वे रंगोली में उपस्थित है जहां एक आत्म्मुग्ध है वही दूसरी की चुनर इतनी झिलमिल है कि रंगोली के रंगों से देखने में आपको आश्चर्य लग सकता है. अंग्रेज महिला के गोर रंग को बारीकी से देखना हो और बिल्ली के बालों को रेशा रेशा देखना भी बहुत रोमांचक है. इस बार उन्होंने स्थानीय सामग्री से एक समुद्र तट को बनाकर भी एक नया सफल प्रयोग किया जो बेहद आकर्षक और प्रेरक है.
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मनोज का काम देखने शहर ही नहीं वरन आसपास के क्षेत्र से लोग बड़ी तादाद में जुटते है और सराहते है, उतनी ही विनम्रता से वे सबसे मिलते है और होली की मुबारकबाद भी देते है. कल उन्होंने मुझे अपने साथ पूरी रंगोलियाँ दिखाई. अपने बचपन के साथी को इस तरह प्रतिबद्धता से हर वर्ष यह श्रमसाध्य करते देखना कौतुक ही नहीं बल्कि प्रशंसा का भी काम है. हम लोग सन 1970 से सखा है और मै उनका बड़ा मुरीद हूँ.
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मुझे लगता है कि इस शहर में कला संस्कृति के नाम पर काफी सफल प्रयोग हुए है परन्तु नए युवा इस क्षेत्र में अभी नहीं दिख रहें जो इस काम को आगे ले जा सकें अस्तु आवश्यकता है कि अब नए लोगों को इसमे थोड़ा ध्यान देकर इस हुनर को सीखें और इस समृद्ध परम्परा को आगे बढायें इस काम में निश्चित ही मनोज पवार, राजेश जोशी, जय प्रकाश चौहान, डाक्टर सोनाली पिठवे, आदि वरिष्ठ जन उन्हें मार्गदर्शन देंगे इसमें कोई शक नहीं. बहरहाल मनोज का यश और फैलें और वे पूरी तन्मयता से नया नित सृजन करें यही शुभेच्छाएं है.
यकीन मानिए ये सब रंगोली से बनें है और यदि आप इन्हें देखना चाहते है तो यह प्रदर्शनी आज और भर है देवास में.
कल ब्रजेश भाई और भाभी से मिलना भी बहुत सुखद था इस समागम में बहुत ही अच्छी शाम बीती. अग्रज अमिताभ जी को मिस कर रहा था यहाँ कल शाम.
आप सबको होली की अशेष शुभकामनाएं.

होली 1 मार्च 2018 

Thursday, March 1, 2018

Vaibhav Kishore Jayaswal at Home 28 Feb 2018

Vaibhav Kishore Jayaswal at Home 28 Feb 2018


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Kishor Vaibhav Abhay रायपुर में रहते है और केंद्र सरकार में काम करते है।
छग जाना होता था तो फेसबुक के दोस्तों को खोजता था कि लिखने पढ़ने वाला कोई मिल जाये । एक बार समय पर्याप्त समय था - शाम को जल्दी फ्री हो गया तो वैभव को फोन किया - मिला, अच्छा लगा और खूब बातचीत की। बाद में वैभव ने नुक्कड़ टैफे की टीम से मिलवाया- गौरव, प्रियंक, शिज्जु , चन्द्रमोहन, पूर्णाक्षी और भी बहुत से मित्र जो लिखने पढ़ने की बिरादरी से आते हैं । अभिजीत से हालांकि अभी तक मिला नही हूँ पर वो भी लाड़ला है। नुक्कड़ पर मेरी किताब का कार्यक्रम रखवाया था उस रात जहां प्रबुद्ध लेखक और पाठक मौजूद थे। अविस्मरणीय शाम थी मेरे जीवन की जहां सब प्यारे लोग मिलें और मेरे जीवन का जीवंत हिस्सा बन गए।
फिर लगातार मिलना होता रहा, गत वर्ष मई में जब इनका ब्याह था तो मैं सुकमा में फंस गया एक हमला हुआ था एक गांव में और हम लोगों को केशकाल घाटी पार नही करने दी गई, और मैं छग में होते हुए भी नही पहुँच पाया। तब से बस बातें ही बातें हो रही थी।
वैभव मूल रूप से नाटक के कलाकार है और प्रयोगधर्मी है। रायपुर में नाटक का अच्छा खासा समूह है और लगातार वे रिहर्सल और प्रदर्शनों में लगे रहते है। अच्छे कवि और लेखन की समझ भी उम्दा है। इस सबसे ज़्यादा अच्छे इंसान है, कई बार ट्रेन पर मुझसे मिलने आये अपनी व्यस्तता में और मैं शुगर का मरीज हूँ इस वास्ते मेरे सेहत के अनुरूप खाना भी लेकर आये है और ये वो सबके लिए करते है। मुझे छग के विशेष पकवान खिलाने गढ़ कलेवा भी लेकर गए है रायपुर में जो अप्रतिम जगह है। मेरे जैसे मराठी मानुस और मालवा के चटोरे को ऐसे दोस्त मिल जाये तो क्या कहना !
अपने मित्रों के बीच लोकप्रिय वैभव ने आज अचानक फोन किया कि इंदौर में हूँ - मैंने कहा मैं भी लौटा ही हूँ आ जाओ घर , बस दोपहर को वैभव हाजिर। खूब गप्प की और खाना खाया। रुकने का बोला पर उन्हें जाना पड़ रहा है निजी कारणों से। वे आशीष पाठक के नाट्य समारोह में हिस्सा लेने जबलपुर आये थे, और यहां आकर एक सरप्राइज दे दिया। शुक्रिया ही कह सकता हूँ इस अनुज को।
वक्त कम था, बस 4 - 5 घँटे ही गप्प कर पाएं, पर जल्दी ही आने का वादा कर निकले है मार्च का। मजा आया सच मे । दोस्तों से मिलने में ही खुशी है और जीवन है।
वो अंग्रेजी की कहावत है ना "To a Friend's House , the Road is never Long"
बाकी ऊपर लिखित मित्रों का यूँही इंतज़ार है एक दिन आकर वे भी अचंभित करेंगे यह विश्वास है। लेपटॉप बाबा के आश्रम में सबका स्वागत है मित्रों।
शुक्रिया वैभव , खुश रहो, खूब यश कमाओ

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