Sunday, January 19, 2020

Sandip Ki Rasoi uttapam and Paranthe 15 Jan 2020

पौष्टिक उत्तपम
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● चावल के आटे और रवे को बराबरी से मिलाकर स्वादानुसार नमक और एक नींबू निचोड़कर अच्छे से मिला लें, फिर इसमें आवश्यकता अनुसार पानी मिलाकर एक घोल तैयार कर लें
● रात भर इसे ढाँककर रख दें
● सुबह पत्ता गोभी, हरा प्याज, हरी मिर्च, मटर के दाने, अदरख, खूब सारा बारीक ताज़ा धनिया पत्ता और जो भी ताज़ी सब्जी आप मिलाना चाहें मसलन -शिमला मिर्च, मैथी, पालक, लाल भाजी, ताज़े मशरूम, शकरकंद या अन्य कोई , मिलाकर अच्छे से हिलाएं और आधा घण्टा रहने दें
● सभी सब्जियों को साफ़ धोकर बारीक काटकर ही मिलाएँ , इसमें लाल मिर्च बिल्कुल नही है - यदि आप चाहें तो काली मिर्च कूटकर डाल सकते है इससे स्वाद आएगा और अधिक
● अब गर्म एक फ्राई पैन पर हल्का सा तेल डालकर मिश्रण को गोलाई में फैला लें और दोनो तरफ अच्छे से सेंकें
● स्वादिष्ट और पौष्टिक उत्तपम तैयार है - इसे हरे लहसन की चटनी या हल्दी के अचार से गर्मागर्म खाएँ - मज़ा ना आएँ तो फिर ना कहना
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2 - मूली के पराँठे और ताज़े लहसन की चटनी
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● इन दिनों खूब ताज़ी और सस्ती मूली आ रही है और ताज़ा हरा लहसन भी, सर्दियों में दोनो का उपयोग और खाना पौष्टिक और स्वादिष्ट है

● मिक्स ग्रेन के आटे में मूली किस लें और नमक, मिर्च, हल्दी, जीरा और अजवाइन डालकर थोड़ा सा मोयन मिलाएँ और पानी मिलाकर गूंथ लें, ध्यान रहें पानी बहुत कम लगेगा क्योकि मूली पानी छोड़ती है
● अब पराँठे बेल कर सेंक लें और घी या तेल का प्रयोग करें
● ताज़े लहसन की पाँत को धो लें और मिक्सी में हरी मिर्च, कोथमीर (धनिया पत्ती), खोबरे के बुरादे और नमक के साथ मिलाकर बारीक पीस लें
● गर्मागर्म पराँठे इस हरी चटनी के साथ बहुत बढ़िया लगते हैं
● बाज़ार में पपीते की भी बहार है, पराँठे के साथ काटकर खायें, नेचुरल शुगर भी मिलेगी - नाश्ते या भोजन की पौष्टिकता बढ़ जाएगी, दो पराँठे और आधा किलो पपीता खाने से दिनभर के लिए पर्याप्त कैलोरीज़ मिल जाएगी, हां याद रहें कि खाने के तुरंत एक घँटे पहले या बाद चाय या कॉफ़ी नही पियें
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Saturday, January 11, 2020

हाथ पीले और अचार का किस्सा 11 Jan 2020

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हाथ पीले और अचार का किस्सा


● इन दिनों खूब ताज़ी नर्म हल्दी आ रही है, सस्ती भी है - बस हाथ पीले करिये और बनाईये अचार
● आधा किलो ताज़ी हल्दी की गठानें ले आईये, साफ धोकर सूखा लीजिये और छीलकर बारीक काट लीजिये
●अब लाल मिर्च, हल्दी, सौंफ, खूब सारी कलौंजी, राई की दाल, नमक, काली मिर्च स्वादानुसार मिलाकर अचार मसाला तैयार कर लीजिए, यदि ये सब झंझट नही करना तो बाज़ार से तैयार अचार मसाला ले आईये
● बस इस मसाले में कटे हुए हल्दी के टुकड़े डालकर अच्छे से मिला लें और चार पांच नींबू का रस निचोड़कर डाल लें
● अब सरसो का तेल अच्छे से गर्म कर उसमें खूब सारा हींग पाउडर डालें और ठंडा होने पर मिश्रण में मिला दें
● दो दिन ढाँक कर रखें और मिश्रण को दिन ने दो बार हिलाते रहें
● अचार तैयार है, इसके गुण बताने की जरूरत नही - त्वचा, पेट, खून और बाकी सब साफ़ तो होगा ही, स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और सबसे बड़ी बात जीवन में हाथ पीले करने के " बेस्ट अवसर " बहुत जल्दी आएंगे
● तो जाईये बाज़ार और ले आईये ताज़ी हल्दी, करिये हाथ पीले - कल रविवार भी है
[ सुनील भाई, बहादुर और ज्योति के विशेष अनुरोध पर सबके हाथ पीले करने का अभियान शुरू आज से, अपना एक ही नारा - लड़ेंगे जीतेंगे ]

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Friday, January 10, 2020

Drisht Kavi and other 9 Jan 2020

सर्दी बहुत है
जी, सही कह रही आप
धूप में मन लगता है, देर तक बैठी रहूँ और मटर छीलती रहूँ
जी, कब बैठती है आप, मैं भी आ जाता हूँ
आपकी नौकरी....
अरे कालेज का क्या है , कह दूँगा मतदान का ट्रेनिंग है और स्थानीय निकाय के काम शुरू होंगे ही
आप तो एक काम करिये कालेज में ही मटर ले जाइए दो किलो , शाम को याद से दें देना, दिल्ली जा रही हूँ कल इंटरसिटी से पुस्तक मेले में - वहाँ फलाने जी, जिज्जी को और अमके - ढमके प्रकाशक को मटर की कचौड़ियाँ बहुत पसंद है , सो बनाकर ले जाऊंगी, ढाई किलो गाजर किस सकते है क्या - मुस्कुराकर कवियत्री बोली
जी, आज तो सम्भव नही, नैक की टीम आ रही है ...अंग्रेजी का प्रोफेसर उर्फ बूढ़ा कवि कुतिया, छिनाल मन ही मन बोलते बड़बड़ाते हुए निकल गया कवियत्री के घर से
***
पुस्तक मेले में छपी किताबों के केश लोचन समारोह उर्फ लोकार्पण देखकर एनजीटी को प्रकाशकों के ख़िलाफ़ सख्त कदम उठाना चाहिये
प्रकाशक हिसाब दें कि कितनी छपी, कितनी बिकी और कितनी शेष और कागज़ पर सब्सिडी बंद हो, एक राष्ट्रीय समिति तय करें कि क्या छपने योग्य है क्या नही, जो आता है वह किताब छपवा लेता है - पति अफसर तो पिछड़े जिले में भ्रष्टाचार करके अपनी पेज थ्री तितली का घटिया माल छपवा लिया रुपये देकर या खुद नौकरी ना जाकर या नौकरी पर रहकर कवि कहानी के कुकर्म कर पोथा बना लिया
पर्यावरण तो हमारा बिगड़ रहा - तुम 25 - 50 हजार देकर रद्दी इकठ्ठी कर रहें हो और प्रदूषण देश का बढ़ रहा, प्रकाशक चांदी काट रहें है रॉयल्टी तो दूर ससुरे बताते भी नही कि किताब का हुआ क्या - मरघट में कंडो की तरह तो नही बेच दी
" अंजू मंजू सीता गीता अनिता सुनीता और रामलाल बाबूलाल छेदीलाल मुन्नालाल के गैंग " के कचरे को छपाने में कितने पेड़ कटे होंगे - और होगा क्या इतना कचरा छापकर - रंगा बिल्ला के एक बयान से सारे बुद्धिजीवी हकलाकर बिल में घुस जाएंगे , मूर्ख जनता झंडा पकड़कर CAA के समर्थन जुलूस में "चोली के पीछे क्या है" गाने पर नाचेगी और हिंदी के कायर लेखक प्राध्यापक वीसी बनने के चक्कर में बीबियों के पल्ले में मुंह छुपाकर वाट्सएप पर जिज्जी और साड़ी की तारीफ करते रहेंगे
शर्म मगर इनको आती नही
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भोर के सपने झूठे नही होते
नरेंद्र मोदी 24 तक पीएम बने रहेंगे यह लगता नही अब- छबि खराब ही नही खत्म हो गई है , सबसे बड़े फेल्योर रहें हैं आजाद भारत के और भाजपा का यह इक्का अब गेम नही जीत सकता, बड़बोले और जुमलेबाजी से देश को मुक्ति मिलेगी पर बड़ा हिटलर आएगा 2024 तक के लिए यह दुखद है
अमित शाह अगले 6 माह में पीएम और 2024 के बाद घर, लम्बी विदाई
इधर संघ को भी समझ आया है कि गैर चित पावन बामणों को सत्ता देने से कितना कबाड़ा होता है, और इन दोनों ने बर्र के छत्ते में हाथ डालकर 2024 में संघ की 100 वीं जयंती वर्ष और हिन्दू राष्ट्र का कितना नुकसान कर दिया है
कश्मीर, मन्दिर, हिन्दू मुस्लिम, पाकिस्तान के मुद्दे अब पीछे है - अस्मिता की लड़ाई ही जीवन है और यहाँ अमित शाह भी फेल हो गया है, देश के 55 % युवाओं ने नकार दिया है
कल्लू मामा, गोली मार भेजे में - भेजा शोर करता है
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नश्वर संसार के हम भुक्तभोगी 9 Jan 2020

नश्वर संसार के हम भुक्तभोगी

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स्व रामचन्द्र नाईक को आज ही एक सौ दस बरस हुए थे पैदा हुए, 1911 में दादाजी जन्में थे और वे 85 की उम्र में गुजर गए , जीवन के संयोग भी अजीब होते है - उनकी बड़ी बेटी लीला जो 1934 में पैदा हुई थी, आज से ठीक तेरह दिन पहले यह संसार छोड़कर चली गई - यह संयोग की आज वे अपनी बेटी से कही मिलें होंगे और सुख दुख की बात कर हम सबके बारे में भी पूछा होगा
आज उज्जैन में रामचन्द्र नाईक का कुनबा जो एक भीड़ हुआ करता था, आज जब तेरहवीं की रस्में अदाकर अपनी श्रद्धाजंलि दे रहा था तो मात्र तेरह लोग ही उपस्थित थे, समय, शहरों की दूरियाँ, नौकरी, काम के दबाव और चाहने के बाद भी उपस्थित ना होने की पीड़ा, अवसाद वहाँ अनुपस्थितों के बहाने तैर रही थी
बुआ सबसे बड़ी थी फिर पिता थे, दोनों ने दसवीं करते ही नौकरियां शुरू की कि छोटे भाई बहनों को पढ़ाना है और मरने तक लगे रहें, पिताजी यहाँ वहाँ और बुआ शादी के बाद परदेशीपुरा इंदौर के स्कूल में, सबको पढ़ाया, लायक बनाया और शादी ब्याह किये छोटों के
बुआ का बेटा बरसों पहले मुम्बई चला गया था और वही उलझकर रह गया, बड़े शहर लील जाते है रिश्ते - नाते और भावनाएं पर फिर भी वो अभी तक जुड़ा है सबसे और सहोदर से ज़्यादा प्यार है हम सब भाई बहनों में, बुआ भी मुम्बई चली गई थी आखिरी बार 2009 में आई थी इंदौर पर जब भी मुंबई जाता तो कहती ”इंदौर आऊंगी तो देवास भी आऊंगी, झब्बू, रमी, सत्ती लगाओ खेलेंगे और खूब गप्प करेंगे" पर हमारा सोचा कुछ हो पाता है क्या जीवन में कभी
हमारी पीढ़ी की बड़ी बहन आज चित्रा मंदसौर से अकेले आ गई बस से, उसका हीमोग्लोबिन 4 हो गया था, चेहरे पर सूजन पर बोली "बड़ी माऊशी थी - आज नही आती तो फिर कब आती", छोटी बुआ , फूफ़ा, दो चाचियां , बहन टीना, दामाद और एक चाचा भी हम भाईयों के साथ मौजूद थे
परिवार कब बड़े होकर सिमटने लगते है मालूम नही पड़ता, दादाजी का इतना बड़ा कुनबा था और महू के घर में एक कमरा नीचे, एक ऊपर था और आंगन - कभी जगह कम नही पड़ी, दादी के बाद माँ ने सम्हाला खानदान, माँ के बाद बुआ ने और अब चाची के हवाले है सब निर्णय और घर के रीति रिवाज़ पर अब सब स्वतंत्र भी है - हम किसी को कुछ नही पूछते अब, अपनी मर्जी के मालिक है, ख़ैर
एक जीवित व्यक्तित्व जिसने आपके होने और समझ बनाने में योगदान दिया हो उसे तस्वीर में देखना वो भी किसी हार फूल के संग साथ सिर्फ कालजयी पीड़ा ही हो सकती है कोई दूसरा नाम नही दिया जा सकता; उन आँखों को, स्निग्ध मुस्कान को और सदा के लिए खामोश हो गए होठों को देखकर ही हम चुप हो जाते है
पूरे कार्यक्रम के बाद जब हम कौटुम्बिक लोग बिछड़ रहें थे तो अनगिनत मौतों की दस्तक में मुझे दादाजी, दादी, पिताजी, विभाकर काका, मन्या काका, शांति आत्या, माँ, भाई, भोपाल वाले फूफाजी, नानी, मामा, मामी, मौसाजी और इस बुआ के संग कई चचेरे - ममेरे चेहरे झाँकते नजर आ रहें थे - उज्जैन का रामघाट, चावल और आटे के पिंड, क्रिया विधान और वो सब रस्में जिन्हें मैं मानता ही नही पर लोक परम्परा में हम निभाते जाते है, तेरहवीं का मीठा भोजन खाते कितने निर्लज्ज हो जाते है हम
एक कहानी के खत्म होने से संसार नही रुकता पर पीछे छूट गए लोग सच में वंदनीय ही हो जाते है - जो स्मृतियों के दंश और पीड़ा झेलकर सब कुछ भूलाते हुए जीवन में आगे बढ़ते है
नमन और श्रद्धांजलि

Tuesday, January 7, 2020

JNU Posts of 6 and 7 Jan 2020


पर हम पुस्तक मेले में आत्म मुग्ध होकर अपनी किताबें बेचते रहेंगे और सेल्फी चैंपते रहेंगे
हम बेशर्म हिंदी के प्रकाशक, लेखक , घर से फुरसती बूढ़े नाकारा लोग और किटी पार्टी वाली पेज थ्री की बेशर्म तितलियां
क्यों ना सब पुस्तक मेले का बहिष्कार कर बाहर आ जाये और एकजुट होकर इस फांसीवादी सरकार के ख़िलाफ़ दुनिया को इनका चाल चरित्र बताएं

नही जी, हमें तो "अंजू मंजू सीता गीता अनिता सुनीता" और अलाने - फलाने, घटिया और टुच्चे के साथ मिलना है फोटो खींचने का है ना
अरे महाधूर्त घटिया लेखकों और बुद्धिजीवियों जब शिक्षा के मंदिर बचेंगे तभी ना, पढ़ने - लिखने वाले पैदा ही होंगे नही तो तुम्हारी किताबें क्या मुर्दों को जलाने के काम आएंगी
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Completely failed Govt on all Fronts, time to change the same with immediate effect. instead of feeling shame change them and get rid from....
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Police is the worst system in free India . It is important to reiterate here that failure of Govt especially Modi and Shah , is being replaced by brutality of police and the students are being victim
Govt should feel shame on acts and controlling the Human in the guise of Police. A failure govt has only this way to divert things and focus from poverty, hunger, malnutrition, children's death across the country including Gujrat and mismanagement of finance
Why don't they Resign and leave.
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कैसे राष्ट्र भक्त और समझ वाले लोग है - एक इंदौर को जला देने की बात करता है , 30 - 40 गुंडे मवाली विवि में जाकर छात्रों और शिक्षकों को मार आते है रात में , नपुंसक छात्रा पर हाथ उठाते है जो देवी के नाम की माला जपते है, एक दहाड़ता है कि जेएनयू को नेस्तनाबूद कर देंगे, गृह विभाग का मुखिया राहुल प्रियंका को दंगे के लिए जिम्मेदार ठहराता है , एक CAA है ही नही जैसा कह कर देश को बरगलाता है
हर मोर्चे पर असफल , लगातार खोते जा रहें राज्य और विदेशों में खराब होती इमेज और अपने ही लोगों का भरोसा खो चुके ये लोग अपनी ही जननी जन्म भूमि और जग सिरमौर भारत को कबाड़ा में बेच रहे है 138 करोड़ जनमानस को बेवकूफ बनाकर

अभी तो 138 करोड़ लोगों को घर घर मे घुसकर मारेंगे , पुलिस को तो नपुंसक बना ही दिया है, प्रशासन को गुलाम और मीडिया तो रखैल है ही - रहा सवाल ... सवाल है ही कहाँ शेष
हमने ही चुना है कुपढ़, अपढ़, नाजियों को अब हम ही भुगतेंगे
हम सब मुर्दाबाद
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जेएनयू के वीसी को सड़क पर लाया जाए और देशभर के उन सब हरामखोर प्राध्यापकों को भी जो छात्रों के बजाय अपढ़ गंवार और जाहिल लोगों के आदेश मानते है और वहशत फैलाने के नाम पर छात्रों को निशाना बना रहे है
इन नालायकों को यह नही समझ रहा कि ये भी कल मारे जाएंगे - धर्म और शिक्षा का अर्थ और भेद नही मालूम तो इन को सबसे पहले जूतों की माला पहनाकर बाहर करो , सबसे ज़्यादा गन्द वीसीज़ और प्राध्यापकों ने इस समय मचा रखी है
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जग सिरमौर बनेंगे 2020 में
अपना स्तर देख लो -कितना और नीचे गिरोगे बै
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Book Launch by PM on Kirloskar 6 Jan 2020

अभी अभी
मेरे द्वारा मराठी से हिंदी में अनुदित स्व लक्ष्मण राव किर्लोस्कर की ऑटो बायोग्राफ़ी "यांत्रिक की यात्रा" का विमोचन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में किया
प्रकाशक ने जो भी किया , उसमे मेरा कोई हाथ नही है, बड़े लोग बड़ी बातें है - अपन सिर्फ मजदूर है - काम करते है और पारिश्रमिक लेते है , किताब मिलेगी तो यहाँ फोटू चेंप दूँगा , ज्यादा प्रतियां मिल गई तो बांट भी दूँगा
यहाँ देख सकते है - अभी खोजी लिंक और ये फोटू स्क्रीन शॉट है
सूचना समाप्त हुई
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Monday, January 6, 2020

बेड़ई और आलू की रस्सेदार भाजी 5 Jan 2020

बेड़ई और आलू की रस्सेदार भाजी
ग्वालियर, भिंड, शिवपुरी , मुरैना यदि आप जाएं तो नाश्ते में इडली या वड़े के बजाय एक प्लेट गर्मागर्म बेड़ई और आलू का रस्सा खा लें आपको जो स्वाद और ऊर्जा की अनुभूति होगी वह स्वर्गिक होगी - बड़े प्यार और चाव से खाएं जाने वाली यह डिश बनाना बहुत आसान है, यह स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी है
आटे और रवे को बराबर मात्रा में मिला लें उसमे आधा कटोरी दही, दो चम्मच मोयन (गर्म तेल) और नमक मिलाकर गूंथ लें और आधे घँटे के लिए कपड़े से ढँककर रख दें
मूंग की दाल को रात को गला दें पर्याप्त पानी में और फिर सुबह लहसन, हरी मिर्च, अदरख डालकर स्वादानुसार नमक, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर , गरम मसाला और नमक डालकर अच्छे से पका लें, ऊपर से ताज़ा कटा धनिया डाल दें और ठंडा कर लें
आधे घँटे बाद आटे को पुनः एक बार अच्छे से गूंथ लें और छोटी छोटी लोई बनाकर रख लें, अब हर लोई में पकी हुई मूंग की दाल के भरावन को अंदर भरकर बेल लें और गर्मागर्म तेल में भूरा होने तक तलें
आलू की रस्सेदार सब्जी बनाने के लिए कोई विशेष तकनीक नही है बस खूब ताज़ा मटर, प्याज़, लहसन, टमाटर, हरी मिर्च और धनिये के साथ बढ़िया तीखा रस्सा हो ताकि खाने में स्वाद आएँ
इन दिनों खूब अच्छी बड़े पत्तों वाली मैथी की भाजी भी आ रही है , आप खूब सारा लहसून और लाल खड़ी मिर्च डालकर मैथी की तीखी सब्जी बनाकर भी आलू के रस्से के बदले बेड़ई के साथ खा सकते हैं
गर्मागर्म बेड़ई और आलू के रस्से को खाएं इन सर्दियों में मज़ा आएगा, बच्चे अक्सर अलग अलग प्रकार की दाल खाने में नखरे करते है - इस तरह से आप दालों को खिला भी सकते है और खाने में विविधता भी आएगी

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हम सब मुर्दाबाद 5 Jan 2020

हम सब मुर्दाबाद
Police is the worst system in free India . It is important to reiterate here that failure of Govt especially Modi and Shah , is being replaced by brutality of police and the students are being victim
Govt should feel shame on acts and controlling the Human in the guise of Police. A failure govt has only this way to divert things and focus from poverty, hunger, malnutrition, children's death across the country including Gujrat and mismanagement of finance
Why don't they Resign and leave.

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कैसे राष्ट्र भक्त और समझ वाले लोग है - एक इंदौर को जला देने की बात करता है , 30 - 40 गुंडे मवाली विवि में जाकर छात्रों और शिक्षकों को मार आते है रात में , नपुंसक छात्रा पर हाथ उठाते है जो देवी के नाम की माला जपते है, एक दहाड़ता है कि जेएनयू को नेस्तनाबूद कर देंगे, गृह विभाग का मुखिया राहुल प्रियंका को दंगे के लिए जिम्मेदार ठहराता है , एक CAA है ही नही जैसा कह कर देश को बरगलाता है
हर मोर्चे पर असफल , लगातार खोते जा रहें राज्य और विदेशों में खराब होती इमेज और अपने ही लोगों का भरोसा खो चुके ये लोग अपनी ही जननी जन्म भूमि और जग सिरमौर भारत को कबाड़ा में बेच रहे है 138 करोड़ जनमानस को बेवकूफ बनाकर
अभी तो 138 करोड़ लोगों को घर घर मे घुसकर मारेंगे , पुलिस को तो नपुंसक बना ही दिया है, प्रशासन को गुलाम और मीडिया तो रखैल है ही - रहा सवाल ... सवाल है ही कहाँ शेष
हमने ही चुना है कुपढ़, अपढ़, नाजियों को अब हम ही भुगतेंगे
हम सब मुर्दाबाद
***
जेएनयू के वीसी को सड़क पर लाया जाए और देशभर के उन सब हरामखोर प्राध्यापकों को भी जो छात्रों के बजाय अपढ़ गंवार और जाहिल लोगों के आदेश मानते है और वहशत फैलाने के नाम पर छात्रों को निशाना बना रहे है
इन नालायकों को यह नही समझ रहा कि ये भी कल मारे जाएंगे - धर्म और शिक्षा का अर्थ और भेद नही मालूम तो इन को सबसे पहले जूतों की माला पहनाकर बाहर करो , सबसे ज़्यादा गन्द वीसीज़ और प्राध्यापकों ने इस समय मचा रखी है
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जग सिरमौर बनेंगे 2020 में
अपना स्तर देख लो -कितना और नीचे गिरोगे बै
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कांग्रेस 60 बरसों में इतनी डरपोक नही थी कि निहत्थे छात्रों और शिक्षकों पर हमला करती
अनपढ़, गंवारों और कुपढ़ों से और क्या उम्मीद कर सकते है
हर मोर्चे पर जब असफल हो गये और कुछ ना बना तो छात्रों पर और विद्या के मंदिरों पर टूट पड़े - कमअक्ली की यही निशानी है, सारे देश को कबाड़ बनाकर रख दिया है
और अब लिख लो कि तुम्हारे दिन लद रहें है दिनोंदिन हारते हुए चुनाव परिणामों से समझ नही आ रहा कि क्या औकात रह गई है
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जेएनयू में जो कुछ हो रहा है वह इस देश के कायर, डरपोक और सत्ता के दलाल बुद्धिजीवियों की वजह से हो रहा है
ये लोग वो कौम है जो आत्म मुग्ध है और चुप रहकर वाट्सएप समूहों में या सोशल मीडिया पर छिछोरी हरकतें करके चर्चा में बने रहना चाहते है
2014 से ये सब संगठित रूप से इस अपराध में शामिल है और अपनी दलाली कमाते हुए , सरकारी नौकरियों को बचाते हुए बकैती में लगे है - सेमिनार से लेकर देशाटन इनका पेशा बन गया है
विद्यार्थियों को सरकार को नही इन चूहों , गिरगिटों, भेड़ियों को बिलों से निकालकर सड़कों पर धोना चाहिये प्रेम से पहले - ताकि इन्हें इनकी औकात समझाई जा सकें
धिक्कार है इनकी थोथी, घटिया और चाटुकारिता की समझ पर - ये सब मुर्दाबाद है
***
दिल्ली में आज से चुनाव प्रचार आरम्भ हुआ और आज ही जेएनयू निशाने पर आया
अभी इनकी नापाक हरकतें और बढ़ेंगी लिखकर रख लें - चुनाव जो है
सबसे बड़ी फ़ौज वाली और ताकतवर सरकार कायरों की भांति युवा छात्रों पर हमले कर रही है - शर्मनाक है
हम सब ज़िम्मेदार है कि हमने इनको चुना है - हम सब मुर्दाबाद है
समय आ गया है जब या तो भ्रष्ट पुलिस व्यवस्था को भंग कर दिया जाये या फिर दिल्ली पुलिस को राज्य सरकार के अधीन कर दिया जाये
जिस देश में छात्रों पर हमले हो वहां के 138 करोड़ लोग सिर्फ झुनझुने है और दो कौड़ी के वोट
अफ़सोस सुप्रीम कोर्ट में सन्नाटा पसरा है और राष्ट्रपति भी चुप है यह गम्भीर और घातक है देश के वर्तमान के लिए