Monday, June 18, 2018

इक चाँद ही है जो भीगी सुबह ले आता है - ईद मुबारक 16 June 18



इक चाँद ही है जो भीगी सुबह ले आता है - ईद मुबारक 
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इक चाँद आसमान में आने से क्या क्या हो जाता है - करवा चौथ का व्रत टूटता है , महीने भर भूखे रहकर कड़ी धूप में पसीना झेलते रोज़ों की समाप्ति हो जाती है, एक पाक माह में सबके लिए दुआएँ मांगने का सिलसिला यकायक थम जाता है, इस खूबसूरत चाँद को देखकर दिल दुआएँ देने से रुकता नही मानो पूरी कायनात आज चाँद को देखते हुए थम जाएगी और निहारती रहेगी उसकी पाकीज़गी और खूबसूरती को
प्रार्थनाएँ , दुआएँ , प्यार - मुहब्बत की बरसात तो बारहों मास - चौबीसों घंटे होती रहती है, इस प्रकृति में नेक नियत और अमन पसंद लोग ज्यादा है तभी यह धरती सदियों से यूँही है और इस पर बसे फरिश्तों और उनके ईमान और पाकीजगी के कारण ही सूरज और चाँद के साथ अरबों - खरबों सितारें इसे रोशन करते रहते है क्योकि पूरी आकाश गंगा में एक ही जगह है जहां हम रहते है जो भावनाएं समझते भी है और व्यक्त भी करते है
होली दीवाली हो, वाहे गुरु का जन्मदिन, रणजीतसिंह की शहादत हो या दशहरे की खुशियाँ, ईद हो या जीसस का जन्मदिन, पवित्र आग के अग्यारी घर का त्योहार हो या रामदेव ओटले वालों जी का जन्मदिन , गोगादेव की जयंती हो या बिरसा मुंडा का जन्मदिन, राम नवमी सा पवित्र दिन हो या मिलादुन्नबी , गुड फ्राइडे हो या फिर बुद्ध पूर्णिमा , महावीर का जन्मदिन हो या हमारे रग रग में बसे 15 अगस्त या 26 जनवरी - हमें सब प्यारे है और हमें चाहिए भी
इसलिए नही कि ये इसके - उसके त्योहार है और हम ये - वो है, बल्कि इसलिए कि त्योहार हमारे जीवन की भीगी हुई मुस्काती, सुगंधित और सुवास फैलाती मीठी सी सुबह है - जिसके होने से हम थोड़ा और मनुष्य होते है, थोड़ा और एक दूसरे के नज़दीक जाते है , समझते है, साझा करते है सुख और दुख, थोड़ा और लचीले होकर सबको अपने मे समाहित करने का प्रयास करते है और अपने अपने पितृ पुरुषों को याद करते हुए सजदे में सिर झुकाते है कि जो उन्होंने किया हम तो नही कर पाएंगे पर - है ईश्वर, है सर्वशक्तिमान, है खुदा हमें इतनी शक्ति तो दें कि हम जाने से पहले कुछ ऐसा कर लें कि कम से कम एक पीढ़ी हमें प्यार, सम्मान से याद कर मुस्कुरा लें
कुदरत के इस विशाल आंगन में हमने महीन से महीन जीव जंतुओं को देखा, बरगद के विशाल वट वृक्ष देखें, भयावह जानवर देखें पर जितना सामाजिक और स्नेहिल मनुष्य को पाया उतना किसी को नही बस इसी स्नेह और मुस्कुराहट को इस धरा पर गुणानुक्रम में बढाते रहे तो बहुत होगा
एक बार फिर उमस, गर्मी , हलाहल और शोले बरसाते आसमान को चीरकर मिट्टी में सौंधी सुगंध लेकर ईद आई है अपने साथ पीठ पर बादलों को लादे पानी की अमृत बूंदें लेकर आई है , पीछे - पीछे बरसात की बूंदों ने भी चलना शुरू कर दिया है , चातक चकोर से शुरू हो रही प्रणय की बेला इस धरा को आगामी दो तीन माह में तृप्त कर देगी और एक नया संसार हरीतिमा से लहक उठेगा
आइये ईद मनाएं , दिल के सारे दर्द शिकवा गिला और तनाव भूलकर ईद मनाए
सबको ईद मुबारक

खिसियानी बिल्ली प्रशासनिक अधिकारी को भड़काए
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दिल्ली की जंग में केंद्र सरकार को शर्म आना चाहिए कि वे एक चुनी हुई सरकार को काम नही करने दे रही है
इस घटिया और ओछी हरकत का क्या अर्थ है , दूसरा प्रशासनिक सेवा के अफसरों को यह नही भूलना चाहिए कि वे संविधान के लिए प्रतिबद्ध है , जनता के लिए प्रतिबद्ध है ना कि नरेंद्र मोदी के लिए या सरकार के लिए
यह बदला लेने की घातक प्रवृत्ति है जब तमाम तरह के हथकंडे नही चलें और हर बार औंधे मुंह गिरें तो यह घटिया तरीका अपनाया
क्या दिल्ली देश नही है, विपक्ष को खत्म करने का इतना सस्ता और सड़कछाप तरीका ये लोग अपनाएंगे सोचा नही था , प्रशासनिक सेवा के उन अफसरों को जूते मारकर घर बैठा देना चाहिए जो अपने मूल कर्तव्य भूलकर एक राजनैतिक विद्वैष रखने वाली मानसिकता के व्यक्ति और सरकार के कहने में आकर अपनी हेकड़ी में जनता को भूल रहे है
और अब समय आ गया है कि दिल्ली की जनता इन्हें चेम्बर से निकालकर सड़क पर लाएं, चौराहों पर खड़ा कर लाल मिर्च की धूनी दें उल्टा लटकाकर , साले जिस जनता के इनकम टैक्स की कमाई डकारते है और सुविधाएं भकोसते है आज कुत्तों की तरह से पूंछ उठाकर जीभ से चाट रहे है
देश की राजधानी जो किसी देश भी का चेहरा होता है, हजारों विदेशी लोग आते है, देश भर के लोग आते है वहां प्रशासन को पंगु बनाकर क्या दर्शाना चाहती है केंद्र सरकार , एक ओर प्रदूषण की स्थिति नियंत्रण के बाहर है, सुप्रीम कोर्ट की भी परवाह नही है - खैर वो तो वैसे भी बेच खाई है जब से सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था को भी तहस नहस कर दिया , पर लोकतंत्र में लोक का भी महत्व है या नही या इसे भी धता बताकर मूंग दलना चाहते है
इतने दुनिया मे घूमें, ट्रम्प से दोस्ती की , हाल ही की ट्रम्प किंग कांग की मुलाकात देखी फिर भी समझ नही आया कि लोकतंत्र में मतभेद होना अनिवार्य है , हो सकता है अरविंद ने जिस तरह से दो बार पटखनी दी - उससे आपका दर्प चीत्कार उठा हो, अरविंद नाकारा हो, स्कूल अस्पताल जैसे अच्छे कार्य करके आपके वजूद और दृष्टि को चुनौती दी हो और आपके बड़बोलेपन के खिलाफ ठोस और महत्वपूर्ण कार्य जमीन पर सरकारी ढांचे में रहकर समय सीमा में करके दिखा दिया, निश्चित ही आपके गुजरात के हिंसात्मक मॉडल से हजार गुना श्रेष्ठ है और आपमे हिम्मत भी नही कि एक जगह करके दिखा दें , पर मनभेद रखकर इस तरह से प्रशासनिक अमले को इस्तेमाल कर रहे है - धिक्कार है सरकार बहादुर, यह 56 इंची सीना नही बल्कि कायरता पूर्ण कदम है जो दिल्ली सरकार नही, बल्कि लोकतंत्र के खिलाफ है
अनिल बैजल याद करो नजीब जंग का अंत उसको कन्फेशन कर कहना पड़ा था कि वो कठपुतली बन संविधान से खेल गया था और खुदा के दरबार मे उसने अपने गुनाह कुबूल किये , तुम भी अस्थाई हो जिस दिन जनता पागल हो जाएगी उस दिन यह तंत्र ही नही बचेगा और राज्यपाल जैसे पावन पद पर बैठकर तुम भी कठपुतली बन गये, यही योग्यता है तुम्हारी
संघ जो भाजपा का बौद्धिक टैंक है , को समझ नही आ रहा, प्रणब मुखर्जी के सामने तो बड़बोलापन दिखाते भागवत जी बोले थे हम सबको साथ लेकर सबका विकास चाहते है, क्या दिल्ली में स्वयंसेवक नही है या शाखाएं बन्द हो गई या दिल्ली को दिमाग़ से निकाल दिया है कि कभी दिल्ली जीत नही सकेंगे
चार पांच मुख्य मंत्री बैठे है समर्थन में, मुख्यमंत्री राज्यपाल से नही मिल पा रहा तो आम आदमी की क्या औकात है, तमाशा बनाकर रख दिया है - कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका का
आप कहेंगे मुझे क्यों तकलीफ , निवेटिव हूँ तो जनाब होश में आइये ये देश मेरा भी है सिर्फ इन नाटक कम्पनी चलाने वालों का नही
जो भी है - गलत है, और जिस तरह से केंद्र सरकार विभिन्न तरीकों से प्रहसन रचकर घातक और घटिया उदाहरण नसीहत देने के लिए रचती जा रही है वह इतिहास में दर्ज हो रहा है और कोई नही कहेगा फिर कभी कि " एक था मोदी"

रामाश्रय चौहान की जबलपुर में मौत - नही जागते हम 17 June 2018




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मप्र में सालों बाद कल सहायक प्राध्यापक पद के लिए परीक्षा है और नौकरी का तनाव युवाओ पर कितना भारी है इसकी बानगी आज देखने को मिली
आज जबलपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर हिंदी की परीक्षा देने आए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्रो० वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी के लोकप्रिय और मेघावी शोध छात्र रामाश्रय चौहान (गाजीपुर) का हृदयगति रुक जाने से निधन हो गया
यह युवा शोधार्थी मुश्किल से तीस बरस का होगा, बी एच यू में प्राध्यापक चन्द्रकला त्रिपाठी जी ने सूचना दी, इस छात्र के साथ आये मित्रों से बात की, पुलिस अभी पोस्टमार्टम कर रही है मेडिकल कॉलेज में , तीन मित्र उसके साथ है जो शोधार्थी है बी एच यू के ही
जबलपुर के मित्रों की सहायता से अभी शव को बनारस ले जाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था करवाई और उन तीन मित्रों को ढाढस बंधवा रहा हूँ, वे हैरान है कि सुबह तो आये थे और ये क्या हो गया , कितना अवसाद और तनाव है जीवन मे
कुल मिलाकर यह लग रहा है कि हमारे युवा इस समय नौकरी ना मिल पाने के इतने तनाव में है कि सीधे मर ही रहे है, इस कमसिन उम्र में मृत्यु कितनी भयावह है एक बार कल्पना करके देखिए आप सो नही पाएंगे
Ravish Kumar आपने इतनी लड़ाई लड़ी पर देखिये ये क्या होते जा रहा है
युवा प्रतिभा रामाश्रय को हार्दिक श्रद्धाजंलि और नमन पर यह मृत्यु नही - हत्या है , हत्या और हम सब लोग जो चुप है - इसकी मौत के दोषी है , ख़ुदा ना करें हममे से किसी के परिवार पर या हमारे परिचित पर मौत का साया मंडराए पर हममें से किसे फर्क पड़ता है , हम तो विजयी भाव मे मद मस्त है और असली मुद्दों से मुंह छुपाकर बैठे है , हिन्दू मुस्लिम दंगों और राष्ट्र प्रेम में व्यस्त है फिर चाहे कश्मीर में युवा जवान मरे या देश के भीतर तनाव से युवा शोधार्थी
किससे दुख व्यक्त कहूँ, इस अनजान भाई के लिए यहां बैठकर जो हो सकता है कर रहा हूँ पर मुझे चिंता लाखों करोड़ों युवाओं की है जो नैराश्य में है और उनके आगे कोई भविष्य नही है , सत्ता और राजनैतिक दल उन्हें सिर्फ भीड़ बनाकर इस्तेमाल कर रहे है

Friday, June 15, 2018

Fitness Challenge by N Modi 14 June 2018


Fitness Challenge by N Modi  
126 करोड़ हिंदुस्तानी इतना सब होने के बाद अपने दम पर मेहनत कर जी रहे है यह कम है क्या, दूसरी ओर देश का प्रधानसेवक सबका मजाक उड़ाते हुए अपनी ही आत्म मुग्धता में जीते हुए वीडियो डालकर प्रसिद्धि पाने के सस्ते तरीके अपनाकर इतिहास में अमर होने की कोशिश कर रहा है
इंतज़ार है अमित शाह, रमणसिंह, नितिन गडकरी से लेकर तमाम और लोगों का जो दस से बीस लोगों का पोषण हड़प रहे है
2019 आने तक पता नही क्या क्या और देखना पड़ेगा भगवान जाने पर एक बात तो तय है कि इतना छिछोरापन नेहरू , शास्त्री, मोरारजी, जगजीवन राम, चन्द्रशेखर, गुजराल, इंदिरा, राजीव, देवेगौड़ा, नरसिम्हाराव या मनमोहन ने नही किया और ये इस तरह की हरकतें करके भरे पेट लोगों को चैलेंज कर अमर होना चाहते है - नेहरू की जगह लेना चाहते है
जिस देश मे बच्चे जन्म से पहले मर जाते हो, कुपोषण से या ऑक्सीजन से मर रहे हो, अस्पतालों में मलेरिया की दवाई ना हो या भूख से आदिवासी मर रहे हो वहां यह बात दिमाग मे लाकर क्रियान्वित करने वाले संविधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की समझ पर आपको भरोसा और यकीन है तो आपकी बुद्धि पर तरस भी नही आता बल्कि शर्म आती है कि आपके जैसे कम अक्ल और अपढ़ लोगों की वजह से आज देश रसातल में डूब गया है और अब इससे ज्यादा कबाड़ा तो भगवान भी नही कर सकते
अभी 2024 तक इन्हें ही जिताये ताकि आपकी औलादें ये सब देखकर आपको ऐसा सबक सीखाएं कि आप कही चुल्लू भर पानी मे डूबने लायक भी ना रहें
जिस देश ने दुनिया को योग सिखाया, और इन्ही के प्रयासों से योग को मान्यता मिली और 21 जून योग दिवस स्वीकारा गया वहां का प्रमुख योग के नाम पर ऐसी हरकतें कर रहा है
धन्य है देश और यह नेतृत्व , फिर कहता हूँ कभी नही कहूँगा - एक था मोदी

Monday, June 11, 2018

एक था मोदी 11 June 2018



एक था मोदी
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भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को अब यह मुगालते नही होना चाहिए कि वे जन्म से क्रीम है और IAS, IPS are born, they are not made. They are being MAD now onwards
मोदी सरकार ने बगैर परीक्षा या प्रक्रिया के दस लोगों को चुनने का मौका देकर एक और बड़े संविधानिक ढांचे को खत्म करने का विज्ञापन दिया है
निश्चित ही राष्ट्रभक्तों और चाटुकारों को मलाई वाली पकी पकाई खीर मिल रही है और अगर यही हाल रहा तो आने वाले 2024 तक यू पी एस सी पर ताले पड़ जाएंगे और सफाई कर्मचारी से लेकर केबिनेट सेक्रेटरी तक राष्ट्र भक्त हर जगह नजर आएंगे
यह सरकार नही बल्कि देश को खोखला करने वाली सबसे बड़ी संस्था है जब कुछ ब्यूरोक्रेट्स अभी भी सुन नही रहे तो यह तरीका निकाला है घुसपैठ का और अब आगे देखिए कि नौकरशाही , अफसरशाही को किस तरह से कौड़े लगाकर देश हित का काम किया जाएगा या ये चुने हुए देशभक्त स्वफूर्त भावना से जनकल्याण करेंगे
उत्तर प्रदेश में डाक्टर कफील के भाई को गोली मार हो दी है कल - पुलिस कुछ करेगी - इसका शक है और बाकी छग मप्र राज में ब्यूरोक्रेट्स कैसे थिंक टैंक बनकर चाटुकारिता की हद पार कर रहे है यह हम देख ही रहे है और जो सच मे काम करना चाह रहे है या सवर्ण फ्रेम में फिट नही बैठते उन्हें मंत्रालयों में बाबू बनाकर रख दिया है
कुल मिलाकर देश को , देश के संघीय ढांचे को तोड़ने की जबरजस्त शुरुवात है - चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, विभिन्न आयोग, मीडिया, बैंक , रिज़र्व बैंक, प्रक्रियाओं को तोड़मरोडने के बाद अब पेश है दस चाटुकारों की सीधे उच्च पदों पर भर्ती वो भी आरक्षण और नियम कायदों को धता बताकर
जियो लल्ला , जियो - उर्जित पटेल से अर्थ शास्त्री से लेकर दीपक मिश्रा से न्यायविद जैसे लोगों की कमी है क्या - जिनकी ना रीढ़ की हड्डी है - ना नैतिकता और जाहिर है ये दस कौन होंगे उनके नाम, खून, जात , संपर्क - सम्बन्ध, तेल पानी पिये डंडे और राष्ट्रहित से कौन वाकिफ ना होगा
दूसरा मौजूदा ब्यूरोक्रेसी को भी सोचना होगा कि यदि वे अपने अपेक्षित कार्य ना करके इन आवाजाही वाले नेताओं के कहने में आकर जन भावनाओं को कुचलकर काम करेंगे - नियमों के विपरीत, तो एक दिन नही - बल्कि बहुत जल्दी हकाल दिए जाएंगे और उनके नाम मिट जाएंगे इस धरा से और उनकी औलादें क्या करेंगी, विदेश में कैसे पढ़ेंगी और फिर वंशवाद की बेल भी सूख जाएगी, दिल्ली - इलाहाबाद के धंधे खत्म हो जाएंगे और सब फुस्स
लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशिक्षण संस्थान का नाम बदले - आप सुझाइए कोई धांसू सा - उसे भी कम्बख़्त उत्तर भारत का नागपुर बना ही दें - वक्त की मांग है और इसका बहुत शानदार इंफ्रा स्ट्रक्चर है भाई - आओ कब्जा करें, नष्ट करें और भ्रष्ट करें
आइये हम करें राष्ट्र आराधन

Laurels and Pride Moments - Aniruddha , Radhika and Prateek Tarani 10 June 2018

Laurels and Pride Moments 


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Finally our Aniruddha Naik is also post graduate now, after BE from Indore he was selected for MBA course in Mumbai. Yesterday he got his degree in a convocation .
In addition, he is placed in some company working in the field of organic food and he is exploring new horizons of Sales and Marketing .

All the best betu, wish you grand success and rewarding Future ahead.
Stay Blessed.
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My Niece Radhika has completed her BE from SGSITS, Indore. She has been a serious and studious student from child hood and had keen interests in Astronomy. During her graduation, she would go to attend workshops in IIA, Banglore and many a places.
She wanted to observe the Sky and learn about it rigorously and finally today she has brought laurels to the family, today she is selected for "M Tech followed by Ph D" at Indian Institute of Astrophysics, Banglore.
This is the only institute of its own and getting admission here is a matter of Pride and Joy. The course is resuming from July 2018, in the first year she will be placed at Kolkata and then Banglore for remaining 5 years.
Entire credit goes to my brother Sunil and his wife Leena and off course her grand parents and we all..... but in the ways she has done toil, its really creditable.
Lets wish her a grand success and compliments for the rewarding and dazzling Future ahead. As I used to tell this girl sky and sea is the limit.
Go ahead and cross all the boundaries and achieve pinnacles of success, Live your Life .........World is at your door step grab it........
I personally feel girls are performing better than boys and doing hard to change the scenario for a positive change.
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You will be starting a new life, new lifestyle and new work culture after leaving IIM, Udaipur.
It's indeed a matter of pride to get quality education from one of the best institutes of country but now challange is to reflect in life of one self and masses which was imbibed in blood in entire span of educational journey.
Tomorrow you are joining one of the prestigious financial company of the country. All the very best Prateek and my wishes with you to reach pinnacle of success


Friday, June 1, 2018

हम लज्जित है - मगर पराजित नही - 29 May to 1 June 2018




किसी को फेसबुक में जोड़िए तो ;-----
# आपको बिना बताए ग्रुप में जोड़ लेगा
# अपना पेज लाइक करने को बुला लेगा
# टैग करना शुरू कर देगा
# इनबॉक्स में आकर धे वीडियो पेलेगा
# पोस्ट पर कमेंट लाइक करने के लिए आग्रह करेगा
# अपनी किताब खरीदने के अमेज़ॉन लिंक देने लगेगा
# रहेगा साला झुमरी तलैया में और इवेंट में बुलायेगा न्यूयार्क के
# अपनी दुकान से लेकर बीबी बच्चो को लाइक करने का आग्रह करेगा
# अपनी शादी, बर्बादी के जश्नों, वर्षगाँठों में आपकी टिप्पणी की मांग करेगा
किसी को मोबाइल नम्बर दिया तो ;----
# वाट्स एप पर सुबह शाम गुड़ मॉर्निंग से लेकर तमाम रँग बिरंगे ज्ञान के कॉपी पेस्ट मेसेज शुरू कर देगा
# सदियों पुराने सन्देश, खबरें और चित्र भेजेगा
# तमाम तरह के वीडियो भेजेगा जो प्रकृति में अनूठे है भले खुद ना देखें हो पर आपको ठेल देगा
# साहित्य, संस्कृति, धर्म कर्म से लेकर पोर्नोग्राफी वाले समूह में जोड़ कर आपके जीवन का सत्यानाश कर देगा
# वीडियो कॉल करके भी आपकी नींद गाहे बगाहे हराम करेगा
# घटिया कविताएं प्रेमचन्द से लेकर गुलजार और बच्चन तक की पिलाता रहेगा
# टट्टी दस्त से लेकर एड्स कैन्सर की दवाएं आपको परोसता रहेगा
# समूहों में फुर्सत में बैठे बुड्ढे ठुड्ढे , महिलाएं दिन भर जुगाली करती रहेंगी कविता कहानी और फिल्मों से लेकर पापड़ बड़ी अचार तक
साला क्या नौटन्की है - आदमी करें तो क्या करें
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बात गौर करने लायक है कि प्रणव मुखर्जी संघियों को दीक्षांत समारोह में बौद्धिक देंगे
मोहन भागवत जी विद्वान है और मौका नही चूकेंगे, देश और जमीनी हालत से संघ ज़्यादा वाकिफ है बजाय भक्तों के
राज काज में अपनों को भी कई बार निपटाना ही पड़ता है और फिर हम तो है ही महाभारत रामायण जैसे छलकपट से राज्य हथियाने की सीख देने वाले महान राष्ट्र

संघ भी मोदी से पीछा छुड़वा लेगा, अमित शाह से भी और बाकी सारे काले कारनामों से
संविधान में कही लिखा नही कि पूर्व राष्ट्रपति प्रधान सेवक नही बन सकता और फिर इस बहाने बंगाल भी सधेगा बहुत इच्छा है कि लाल हटाकर केसरिया भगवा रंग कोलकाता पर हो
इस बहाने नार्थ ईस्ट, रोहिंग्या मुसलमान और बंगलादेशी शरणार्थी भी निपटाए जा सकेंगे
प्रणब दा की भी हसरत पूरी हो जाएगी जो मनमोहन के अनायास बीच मे आने से रह गई थी
बस आडवाणी जी का खून और खत्म होगा, मोदी जी तो चल ही देंगे झोला उठाकर चाय और पकौड़ा बेचने और अमित शाह के लिए दीपक मिश्रा के रिटायर्ड मेन्ट के बाद कही रिसोर्ट बन ही रहा है
संघम शरणम गच्छामि
[ मैं भी अच्छा बौद्धिक देता हूँ भागवत जी एक नजर इधर भी मार लीजिये बन्दा सूचना प्रसारण मंत्री तो बन ही सकता है , मानव संसाधन मंत्री भी बन सकता हूँ क्योकि सशिम में आचार्य रहा हूँ 3 साल और विद्या भारती , देवपुत्र में बहुत काम किया था कसम से ]
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आज भीड़ भरे बाजार में बैंगन, सड़े आलू , सूखी भिंडी और खूब मोटी लौकी जैसी सब्जियों के लिए जितने रुपये देकर आया और सब्जी वालों की घटिया बदतमीजी और तुनकमिजाजी सहकर आया हूँ - वह बहुत ही दुखद था
घर आकर झोला पलटा और बटुए का हिसाब किया तो लगा कि यदि यही हाल बारहों मास बना रहे तो ऐसी हड़ताल की जरूरत पड़ेगी - इतना खर्च करके भी किसान को वास्तव में मिल जाएं तो हड़ताल की जरूरत ही नही पड़ेगी और इन सब्जी वाले दल्लों को भी ठीक करने की जरूरत है बल्कि ठोकने की जो ग्राहक और किसान के बीच इतना मार्जिन रख लेते है कि समझ नही आता कि इनका गणित क्या है

ख़ैर , क्यों आखिर - देख रहा हूँ पूरा देश हड़ताल पर है बैंक से लेकर शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी और अब किसान भी
करो भाई , करो - सबका संविधानिक हक है पर जो मांगें है सबकी वो अगर कोई भी सरकार पूरी करने लग जायेगी तो दुनिया के खजाने कम पड़ जाएंगे
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सही समय है जब अमित शाह और योगी से इस्तीफा ले लिया जाए
मोहन भागवत जी समझ रहे है आप, 2022 के सपनों और 2024 में संघ के सौ बरस पूरे होने का जश्न नही मनेगा और हिन्दू राष्ट्र भी घोषित नही होगा
2019 के लिए मोदी के बदले सुषमा जी को प्लांट करिये अन्यथा कुछ नही हाथ आएगा

अपनी आई टी सेल को बोलो पप्पू से लेकर मायावती तक का मजाक उड़ाना बन्द करें, सीबीआई नामक तोते को फ्री हेंड दें वरना लालू के सफलता के रथ को पकड़ना मुश्किल होगा क्योकि अब उसके बेटे भी राजनीति में पारंगत है नीतीश चचा को आज धूल चटा दी है और नीतीश जैसे आस्तीन के सांपों से दूर रहें भाजपा
यदि ये सब अभी नही किया तो 5 माह बाद मप्र, राज और छग में घण्टी बजाना पडेगी और चायवाला फकीर आप सबको पकौड़े की दुकान के लिए कंगाल हो चुके बैंकों से ऋण भी नही दिलवा पायेगा
परिणाम सामने है, कुतर्कों का कोई अर्थ नही है अब और बकर के माहिर लोगों से हुज्जत नही करता मैं
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हम लज्जित है - मगर पराजित नही
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नैतिक कौन है - जो बात नैतिकता की करें और जीवन के काम अनैतिकता से करें चाहे बात आजीविका की हो या जीवन यापन की या कर्म वाचा या लेखन की

आजकल समाज से लेकर आर्थिक और राजनीति में नैतिकता के मायने ही बदल गए है अपने को जिंदा रखने की खातिर, अपना ही यश , गुणगान और कीर्ति पताकाएं चहूँ ओर पहुंचाने की खातिर बड़े बड़े नैतिकता के ढोल लेकर लोग पीट रहे है
हर कही से, किसी भी तरह से कुछ भी आ जाये बस ताकि मैं बना रहूं और अजर अमर रहूं यह बात सिद्ध ही नही करनी बल्कि इसके लिए तमाम अनैतिक हथकंडे अपनाना है और भले ही फिर झूठ, फरेब या छल का सहारा लिया जाये
पत्रकारिता, समाज सेवा, संस्कृति और साहित्य में ऐसे बहुतेरे मिल जाएंगे जो नैतिक दिखने और बनने के लिए तमाम तरह की अघोरी संकल्पनाओं को अपनाकर दुनिया भर के खट करम करके नैतिक होने के भरम भी पाल लेते है और समाज मे बन भी जाते है पर एक दिन ऐसी हवा निकलती है कि अपयश को भी शर्म आती है और वह इन्हें दुलत्ती मारकर निकल जाता है
जब इंसान मूल्य खो दें और सारी शर्मो हया छोड़कर नीचता पर उतर आता है तो फिर कुछ कहना मुश्किल हो जाता है और अंत मे सिर्फ यही बचता है कि उघाड़ने की प्रक्रिया आरम्भ की जाए ताकि समाज मे नसीहत देने को उदाहरण बने रहें
आज के हालात में ये दिक्कत शिक्षितों और अनुभवी लोगों के साथ ज़्यादा है जिन्होंने सब छोड़कर , ईमान और लाज गिरवी रखकर अपने को स्थापित करने के लिए ये धत करम किये है ; राजनीति, उद्योग में यह स्पष्ट रूप से दिखता है - समाज , संस्कृति, संगीत या साहित्य में देखने के लिए आपको उस गहराई तक उतरना होगा - जितने अंधे कुएं में ये उतर गए है या यूं कहूँ कि उस पतन बिंदु पर जाना होगा जहां तक इनके क्षुद्र स्वार्थ धँसे हुए है
बहरहाल , नैतिकता के मायने अब अलग है - सारे पाप, झूठ , व्याभिचार और अपना मूल काम ना करके भी आप श्रेष्ठ बनें रहना चाहते है और इसी गन्द और गोबर में लिपटे हुए सदाचार के ताबीज बेचकर सारे पुरस्कार हासिल करना चाहते है - तो बनें रहिये इस पायदान , पर मुक्तिबोध को याद करते हुए हम तो दुनिया को बेहतर बनाने के लिए मेहतर बनने को तैयार है और तुम्हारे सारे अपयश और पाप के किस्से फैलाकर समाज मे ज्योत जलाते रहेंगे - क्योकि हमने ना चापलूसी सीखी, ना व्यसन है और ना अजर अमर होने की भूख , और ना हरि नाम को भजने के लिए भौंथरे हथियार रखे है , अंदर से काले और ऊपर से धवल नही और ना ही नवनीत जो पिघलते रहे माया महाठगिनियों को देखकर ही
अफसोस यह होता है कि इन नैतिकता वादी आतताईयों के बीच जीवन का लंबा सफर निकल गया जो गरीबी, मुफलिसी, अज्ञानता और श्रेष्ठता का बोध छाती पर बाँधे बींधते रहें , कीलें ठोकते रहें और पीढियां गुजर गई पता नही चला और जब तक पता चला तब गाना पड़ा प्रभुजी राखो म्हारी लाज, क्योकि इन्हें तो शर्म नही थी देश, समाज और अर्थ की हालत रसातल में थी और ये नरपुंग ढीटता से अपने जहर भरे पाँव जमा चुके थे, फिर भी बकौल दुष्यंत - "हम लज्जित है मगर पराजित नही" मैं एक नही दसियों सांपनाथों और नागनाथों को जानता हूँ जिन्हें दूध पिलाने से उनका जहर ही बढ़ा है और अब समय आ गया है कि वक्त वक्त पर इन्हें इनके असली विराट स्वरूप में लाया जाये इसलिए कि समाज, राजनीति, संस्कृति, संगीत और साहित्य की दुनिया वाकिफ तो हो इनके आचरण, दुराचार और हवस की प्रवृत्ति से
फिर भी जय हो, जय हो, जय हो नैतिकता और शुचितावादियों की

Thursday, May 31, 2018

देश के प्रधानमंत्री को एक गरीब,मेहनतकश नागरिक का पत्र - 30 May 2018



देश के प्रधानमंत्री को एक गरीब,मेहनतकश नागरिक का पत्र 
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मेरे प्रिय प्रधान मंत्री जी
नमस्कार
आपके भक्त अक्सर मुझे अपनी चुनी हुई सरकार से और आपसे सवाल पूछने पर धमकाते रहते है और अक्सर नीचता पर उतर आते है अस्तु आपको पत्र लिख रहा हूँ कृपया शांत दिमाग से पढ़ सकें तो पढ़े - जवाब देना आपकी शान के खिलाफ है इसलिए उम्मीद भी नही है
मैं बार - बार और आज फिर कह रहा हूँ मेरी इस नरेंद्र दामोदर दास मोदी नामक व्यक्ति से दुश्मनी नही वरन मोदी नामक कारपोरेट की कठपुतली से मतभेद है - जिसे ना अनुभव है - ना ज्ञान और जो सरेआम जनता की पसीने की कमाई को धता बताकर देश को एक ऐसे मोड़ पर ले आया है जहां गहन अंधेरे , निरंकुश पश्चाताप और डिप्रेशन के कुछ नही है - मैं बोलता हूँ और बोलूंगा क्योकि भुगत रहा हूँ, जनता के बीच काम करता हूँ, मेहनत से दो जून की रोटी का जुगाड़ करता हूँ। कल यदि एंजियोग्राफी भी करवाना पड़े तो मेरे पास संचित धन नही है और ना ही कुछ चल अचल संपत्ति है
बोलना इसलिए जरूरी है कि वह इस देश का प्रधान मंत्री है जिसका मैं नागरिक हूँ और पचास पैसे की भी कोई चीज खरीदता हूँ तो टैक्स देता हूँ, सड़क से गुजरता हूँ तो टोल का पेमेंट करता हूँ, कमाता हूँ तो टी डी एस कटवाता हूँ, मनोरंजन करता हूँ तो टैक्स देता हूँ, बीमार होता हूँ तो टैक्स देता हूँ , किसी को खून देता हूँ तो जांच के लिए जी एस टी भरता हूँ, कोई परिजन मर जाता है तो लकड़ी कंडे का भी टैक्स नगर निगम को देता हूँ
बड़ी बेशर्मी से रोजगार खत्म करके, देश की संपत्ति बर्बाद करके, भ्रम फैलाकर, साम्प्रदायिकता का विष घोलकर , विपक्ष को ठिकाने लगाकर, सत्ता हासिल करने के लिए सभी प्रकार के घृणित कार्य करके, संविधानिक संस्थाओं को बर्बाद करके , न्याय जैसे पवित्र मूल्यवान संस्कार को दूषित कर क्या नही किया
कांग्रेस ने तो देश का विनाश सत्तर में से लगभग 55 वर्ष सत्ता में रहकर किया ही था आपको लाये ही इसलिए थे कि जिस बड़बोलेपन और अलंकृत भाषा से गली मोहल्लों में चुनावी सभाएं कर यश हासिल किया था और एक गरीब भूखमरी से जूझ रही अवाम में सपने जगाए थे वे सब कहां गए मोदी जी
आप व्यक्ति नही संस्था है, पार्टी के आदमी नही देश के सेवक है, तानाशाह नही लोकतंत्र के रखवाले है , अमीरों के गुलाम नही गरीब गुर्गों के हिमायती है, दलगत नही दलों से ऊपर है, आप लोगों की आवाज दबाने को नही उभारने के लिए है, जवाब ना देना नही आपको सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना होगा, विपक्ष को खत्म करना नही विपक्ष को मजबूत करना होगा, सत्ता हथियाने का नही लोकतंत्र के उच्च मूल्य स्थापित करना होंगे , आम लोगों में हंसी का पात्र नही बल्कि आदर्श व्यक्ति बनकर जगह छोड़ना होगी - यदि ये मूल समझ और सिद्धांत आपको पल्ले नही पड़ते तो आपको कोई हक नही है 126 करोड़ जनता जनार्दन को त्रस्त करने का और सिर्फ नालायक अम्बानी और अडानी को तरजीह देने का
एक बार सूट बूट छोड़कर और अपने चापलूसों की बिरादरी से निकल कर लोगों के बीच जाईये, सब छोड़ दीजिए - विदेश भ्रमण, भाषणबाजी, गुटबाजी, बैठकें, झूले, अभद्रता से ताड़ना , षड्यंत्र और कुटिल कार्य , सिर्फ लोगों को जाकर देखिये, सुनिए और समझने का प्रयास करिये , अपनी ही पार्टी के बड़े बूढ़ों के साथ शांति से बैठकर सुनिए कि आपकी चार साल की उपलब्धि उनकी नजर में क्या है, संघ के लोगों से पूछिए कि जमीन पर क्या हालात है, आपके प्रचारक जब लोगों के घर रोज सुबह शाम खाना खाने जाते है ( आम और गरीब लोगों के यहां - पेट भरे मध्यमवर्गियों या चित पावन मराठी ब्राह्मणों के घर नही ) तो वे बताएं कि सब्जी और दाल में पानी कितना है और रोटी परोसते हुए गृहणी की आंखें शर्म से झुकती है और वो रोटियां गिनती है क्या
अपनी असफलताओं और अमर्यादित व्यवहार के अभेद्य किलों से बाहर निकलने का जमीन पर दोनों पैर जमाकर रखने का समय आ गया है और यह भी कि जिस तरह से इतिहास का मखौल उड़ा रहे हो - अपने जीते जी इससे बड़ा मजाक देखोगे हमारे सामने ही आडवाणी से लेकर राहुल, सोनिया, मनमोहन सिंह, येचुरी, ममता, मुलायम, अखिलेश , मायावती, लालू , सिद्धारमैया से लेकर कई उदाहरण है नेहरू और इंदिरा को तो छोड़ ही दो
कितने अफसोस की बात है कि चैनल्स की भीड़ में नौकरी करने वालों में बाजार की मांग को पूरा कर अपने को तयशुदा ढांचों में सहलाने वाले या ढालने वाले पत्रकारों को रुपया देकर अपनी कीर्ति पताकाएं फहराना पड़ रही है वो भी अरबों रुपया खर्च करके वो भी तब जब तुम्हारे भाई और माँ बहुत ही साधारण जिंदगी गरीबी में जी रहे हो और पत्नी पेंशन पर और तिस पर भी एक Ravish Kumar से इतने हैदस में आ गए कि उसके पीछे पड़ गए या राणा अय्यूब जैसी देश की बहादुर बेटी की जान लेने पर उतारू हो गए , अगले पांच साल में क्या सबको मार दोगे ?
देश के प्रधानमंत्री आज जो एक पैसा पेट्रोल पर कम हुआ है उसका कितना मखौल उड़ाया गया है यह सुन लेते या समझ पाते तो कोई भी नैतिकता से भरा आदमी चुल्लू भर पानी मे ......

Friday, May 25, 2018

Challenge by a Cabinet Minister 24 May 2018



बहुत दिक्कत है आजकल अपने हिन्दू राष्ट्र में -
एक केंद्रीय मंत्री दंड लगाकर बेशर्मी और अश्लीलता से देश को चैलेंज करता है - जिस देश मे रोजी रोटी नही, कुपोषित शरीर लिए लोग भूखों मार दिए जा रहे हो वहां बेशर्मी से सरकार का नुमाईंदा नंगे भूखों को चैलेंज करता है - क्या समझ है, क्या दिमाग़ है, क्या चयन है और क्या दृष्टि है विकास की
एक रामदेव था जिसने फू फां करके अरबों खरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया
लोगों को मारो स्नाइपर से, किसानों को आत्महत्या करने दो , महिलाओं को असुरक्षित रखो, बच्चों को कुपोषण से ही मुक्त मत करो ना आक्सीजन दो - मार डालो
एनकाउंटर में लोगों को मारो , फ्रिज को टटोलकर मारो और मोब लीनचिंग में मारो
अपढ़ , कुपढ़ , अहम , गुस्से और घमंड से भरे लोग और क्या कर सकते है
रोजी रोटी तो दे नही सकते , लोगों की मेहनत की कमाई को हड़प जाना जिनकी नीयत हो उनसे क्या बहस
देते रहिये चैलेंज - हिम्मत हो तो जनता के बीच बगैर जेड सुरक्षा के आकर बताओ , हिम्मत है तो एक कुएं में उतरकर सफ़ाई करके बताओ, एक तालाब की मिट्टी खोदकर बताओ, हिम्मत है तो इस तेज गर्मी में तेंदू पत्ते की सौ गड्डियां इकठ्ठी कर बताओ, एक खेत मानसून के पहले तैयार करके बता दो, एक कुपोषित बच्चे को स्वस्थ कर बता दो, एक सुरक्षित प्रसव के लिए काँधे पर किसी बेटी को अस्पताल पहुंचाकर बता दो - बात करते हो
और अगर नही तो मूर्खो और गंवारों की तरह से बात करके देश का नाम दुनिया मे मत डूबाओ , एक ट्रम्प काफी नही क्या मनोरंजन को