Tuesday, November 13, 2018

Posts of 11 and 12 Nov 2018




Vihag Vaibhav ने अपनी इस कविता के माध्यम से बहुत वाजिब प्रश्न उठाये है
बहुत वाजिब सवाल है इस हिंदी के धूर्त संसार से
पिछले दिनों मैंने यही सब बहुत तार्किक ढंग से पूछा था तो एक वाट्स ग्रुप के तथाकथित तीन प्रशासकों ने ग्रुप में स्क्रीन शॉट लगाकर हटा दिया मानो वे गंवार कोई कलेक्टर हो
दो कौड़ी की बहस, ठिठोली और महिलाओं के बीच विशुद्ध ठिलवई करने वाले हिंदी के ये कवि कितने पतित है यह समझ आया और दिल्ली की एक घटिया औरत और चापलूस महिला कवि ने मुझे अनफ्रेंड भी कर दिया
दुख यही है कि हिंदी का कवि, कहानीकार सरकारी नौकरी करते हुए कम्युनिस्ट बनता है, इस समय जब बोलने की जरूरत है तो प्रेम कविताएं लिख रहा है , एक वरिष्ठ कवि फिल्मों और लाइक्स कमेंट्स मिलने वाली चलताऊ पोस्ट्स लिखता है और वही सम्भ्रान्त किस्म की औरतें जो कवि नही, बस हाई सोसाइटी की तितलियाँ है, कमेंट करती है और यह लाइक्स गिनता हैं, एक काला कलूटा और बदबूदार कवि अपने थोबड़े को सुंदर बनाकर बेवकूफ बनाता है ( रंग भेदी नही पर असली सूरत को गोरा चिकना बनाकर यहां चैंपने की जरूरत हिंदी के कवि को क्या और क्यों, कबसे है, इतने ब्यूटी कांशस हो तो सौंदर्य स्पर्धा में जा बाबू, कविता से क्रांति के पोस्टर क्यों बेच रहा है)
ये गलीज और लिजलिजे लोग है और इनकी प्रतिबद्धता पर अब शक होता है, अब सच कहूँ तो पीड़ा होती है, दो कौड़ी के लफ़्फ़ाज़ प्रकाशकों की गपोड़ बातों में आ जाने वाले ये असरकारी या सरकारी नौकरी करने वाले क्या साहित्य रचेंगें और कुछ करेंगें, अपनी नौकरी, कम्फर्ट जोन और सुविधाएं बचाकर जो साहित्य की सेवा करें उसे तो शैतान भी माफ ना करें
शर्म आती है कि हिंदी के बड़े और चुके हुए कवि काम करने के बजाय पुरस्कार बटोर रहें है , और इनके अंध भक्त आकर मुझसे पूछते है साफ बोलो कौन है, अबे तुम्हे नही समझती क्या भाषा और मेरे मुंह से क्यों सुनना चाहते हो, इतनी समझ नही तो जाओ ना पंसारी की दुकान खोल लो, वाट्स एप ग्रुप के फर्जी और कुंठित ज्ञानियों जब कुछ नही समझ सकते तो क्यों बने हो टैग लगाकर कवि , कहानीकार और आलोचक
निगेटिव कह लो मुझे पर इन अवसरवादियों की चुप्पी पर अफसोस होता है
अश्लील शांति से भरा है ये समय 
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लिजलिजे और अश्लील शांति से भरा है ये समय
शायर , लेखक , विचारक ,ज्ञानी-विज्ञानी
या तो चुप हैं या बघार रहे हैं 
सबसे विभत्स दुर्गंधयुक्त पीप भरा दर्शन

जिन मुसलमानों के लाल हत्या में गए 
वे बचे हुए परिवार को बचाने में 
ज़ुबान गिरा आये प्रशांत सागर

जिन अछूतों के आशियाने फूँक डाले गए
वे बुझी राख पर बैठकर 
किसी दिव्य सुबह का इंतजार कर रहे हैं

जिनकी फूल जैसी बच्चियों के गुप्तांगों में 
ठूँसा गया सृष्टि का प्राचीनतम पत्थर 
उनकी आवाजों की घिग्घियाँ अब तक नहीं खुली हैं

तनी हुई मुठ्ठियाँ टूटी हुई हैं 
खुले हुए जुबान सिले हुए हैं

तो क्या इतने भर ही हैं जिन्दा लोग?
कोई क्यों नहीं पूछता इस सरकार से 
इन हत्याकांडों में तुम कैसे शामिल हो?

कोई क्यों नहीं पूछता कि 
खून के सबसे ताजा और बड़े धब्बे 
देश के मुखिया के कुर्ते पर कैसे आये?

खेत में लहराता हुआ हल कहाँ गया
दरवाजे की खनकती हुई किलकारी क्या हुई
आदिल मियाँ की टोपी का रंग लाल क्योंकर है
टिर्कियों के पहाड़ किसने चुराए

हजार हजार सवाल हैं 
हजार हजार यातनाएँ 
और एक मैं हूँ कि चीखता जा रहा हूँ

मगर मेरे साथियों की बेशरम चुप्पी 
इस कदर कि 
इतने लिजलिजे और अश्लील शान्ति से भरा है ये समय ।

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Ravish Kumar की एक पोस्ट पर मेरा जवाब
रविश भाई
तस्लीम
कैंसर छोड़िए मलेरिया से लेकर कुत्ते काटने की दवा नही जिला अस्पतालों में
शुगर के मेरे जैसे गम्भीर रोगी को 3 से 4 हजार रुपये माह की दवाई गोली और इन्सुलिन बाजार से लेना पड़ता है
मेरे सगे छोटे भाई का डायलिसिस लगातार 13 साल हमने निजी अस्पतालों में करवाया और टूट गए बुरी तरह से
कैंसर की पहचान के उपकरण नही आप कीमो और रेडिएशन की बात कर रहें है
मप्र के झाबुआ, आलीराजपुर, पन्ना में सिलिकोसिस के मरीज रोज मरते है पूरे मप्र में इनकी जांच की मशीन नहीं सरकारी अस्पताल टीबी की दवा देकर अपनी इतिश्री कर लेते है
हमारे मप्र में डेंग्यू की जांच में महीनों गुजर जाते है, मस्तिष्क ज्वर के मरीज मर जाते है तब रिपोर्ट आती है, आंखों का ऑपरेशन जंग लगे उपकरणों से कर दिया जाता है और 50 , 100 लोग अँधे हो जाते है, डिलीवरी के लेबर रूम में होशंगाबाद के जिला अस्पताल में एक कुतिया बच्चों को जन्म दे देती है और डिलीवरी स्थगित करना पड़ती है, नवजात बच्चों को एम वहाय अस्पताल इंदौर में चूहे खा जाते है - ये हालत है
कुपोषण की कहानी पूछिये ही मत महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग का झगड़ा सास बहू का है यहां और कभी कन्वर्जेंस नही हो सकता
जब मैं नर्मदापुरम सम्भाग में था तो मुख्यमंत्रीजी के बुधनी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बी एम ओ साहब नशे में धुत्त रहते थे और संभागायुक्त भी कुछ नही कर पाते थे क्योंकि डाक साब एक दिन छोड़कर मुख्य मंत्री निवास पर हाजिरी बजा आते थे और पूरे अस्पताल में किसी को काम नही करने देते थे
देवास में 30 वर्षों से वही डाक्टर जमे है जो थे और पूरा तंत्र खोखला कर दिया और आप कैंसर जैसी बीमारी की बात कर रहें है, शिवराज सरकार ने पी पी पी योजना में व्यापमं के दोषी डाक्टर को ठेका देकर कैंसर से बड़ी बीमारी दे दी थी - उसका क्या, कौन भुगतेगा
जमीनी हालत बहुत खराब है राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन यूनिसेफ से लेकर भाड़े के कंसल्टेंट खा गए अरबों रुपया बर्बाद हो गया
मप्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की हालत यह है कि हम लोग जिस समिति में है उसकी बैठक जुलाई में हुई थी उसका यात्रा भत्ता जो मुश्किल से 1500 रुपये होगा आज तक नही मिला और आप बात कर रहें कि स्वास्थ्य मंत्री कुछ काम करें
ये सब जानते है कि इन्होंने क्या किया और क्या करना चाहते है
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सिकंदर दुनिया फतह के बाद किसी शहर से गुजर रहा था
वहां एक आदमी दुनिया से बे-खबर सो रहा था सिकंदर ने उसे लात मार के जगाया और कहा - "तू बे-खबर सो रहा है, मैंने इस शहर को फतेह कर लिया है"
उस आदमी ने सिकंदर की तरफ देखा और कहा - "शहर फतेह करना बादशाह का काम है और लात मारना गधे का, क्या कोई इंसान दुनिया में नही रहा कि बादशाहत एक गधे को मिल गई ?"
वोट देने से पहले सोचना ज़रूर , वरना बादशाहत किसी गधे को मिल गई तो पांच साल लातें खाओगे
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Saturday, November 10, 2018

Posts of Diwali, Sharwil and 8 to 10 Nov 2018

वोट क्या क्या नही करवाते है
दीवाली की मिठाई और देवास विधायक
देवास को सामंतवाद से अब मुक्ति नही मिली तो यह शहर गुलाम ही रहेगा और यहां के लोग गुलामी में ही मर जायेंगे
जो महल कभी जनता के बीच नही गया, जिसमे कोई आम आदमी अपनी समस्या के लिए जा नही सकता, जिसने ई एम फास्टर जैसे ख्यात साहित्यकार के सागर महल को संरक्षित करने के बजाय नेस्तनाबूद कर दिया वह जन की ओर अब उन्मुख है, मराठा आन बान की हेकड़ी ने 1992 से राज कर छुट भैया नेताओं, दलालों को पालकर जनता का जीना दूभर कर रहा हैं उस महल को अब इस मौसम में देवास की बस्तियों में दीवाली बनाम वोट नजर आ रहें है, कितने झोपड़ी वालों को मकान दिलवाया या महीने का राशन भी दिलवाया यह बता दें कोई
शहर के स्कूल, आंगनवाड़ी, अस्पताल से लेकर नगर निगम या जिला पंचायत को ही कोई देख लें , जिस प्रमिला राजे होस्टल में बच्चे रहकर पढ़ाई करते थे उसे भी होटल बना दिया - एक जगह नही - गंदगी, ट्राफिक और आधार भुत ढाँचे भी नही है, एक बड़ी पानी की टँकी या संस्कृति के नाम पर भवन भी नही, चोर उचक्कों ने शहर पर कब्जा किया हुआ है और ना बसें ना ट्रांसपोर्ट के साधन, रोते झिकते सीटी बस चालू हुई तो उसका कोई माँ बाप नही, उद्योग धन्धे बन्द पड़े और बेरोजगारी का आलम यह कि हर तीसरा आदमी ठुल्ला है शहर में
सारा शहर सीवेज के नाम पर खुदा पड़ा है और कोई जिम्मेदार नही बताने वाला कि कब ठीक होगा, सांसद भी विधायक बन रहे है अपने इलाके में जाकर इससे ज़्यादा भाजपा की दुर्गति क्या होगी यह समझना मुश्किल नही है , मजेदार यह है कि ठेकेदार, कमिश्नर और सीटी इंजीनियर भी अपना हिस्सा लेकर भाग गए और नगर निगम कुछ ना कर सका, नर्मदा के पानी के नाम पर बरसों से इंदौर से पानी खरीद रहा है जनता के रुपयों की बर्बादी ऊपर से शिवराज क्षिप्रा नर्मदा लिंक के नाम पर एक गढ्ढे में नर्मदा का पाइप छोड़ गए जिसे जनता ढो रही है, ऐसे पढ़े लिखें गंवार और गुलाम देखे हैं जो गढ्ढे में लाकर पाइप छोड़ने को नदी जोड़ो या लिंक परियोजना मानकर पूजा करें जन प्रतिनिधियों की
किसी को भी वोट दें पर सामंतवाद को परास्त करें , जनता को जनप्रतिनिधि चाहिए महलों में रहने वाले लोग नही जिन्हें दर्द का ना एहसास है ना सरोकार
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क्या उखाड़ लिया पुलिस, प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट ने
जब हमारे रोल मॉडल्स ही शबरीमाला के बहाने से जनता को कोर्ट को गाली देने, अवज्ञा के लिए उकसाएंगें तो जनता किसकी परवाह करेगी, हमारे जागरूक वकील यह कहेंगें कि रात 10 से 12 तक पटाखें हम छोड़ेंगे कर लें जिनको जो करना है तो फिर हम किससे उम्मीद करेंगें
मानें या ना मानें हम पिछले 4 सालों में जितने उज्जड, बदतमीज, निरंकुश और उद्दंड हुए है उतने इतिहास में कभी नही थे, इस सबमे सबसे ज़्यादा नुकसान और कानून का मखौल वकीलों ने उड़ाया है और मुझे शर्म आती है ऐसे वकीलों पर , सिवाय धिक्कार के कुछ कह नही सकता जो पंथ निरपेक्ष संविधान के दायरे में काम करने के लिए सनद लेते है
खेद है कि हमने राष्ट्रीय चरित्र खो दिया है और आज इस समय इस बात की पुष्टि हो गई कि हम ना न्याय में यकीन करते है , ना अनुशासन में और ना किसी बन्धन में और यह सुनियोजित षड्यंत्र है जिस तरह से ऐन चुनावों के बखत मन्दिर विवाद में नेता लोग घोषणा कर रहें है उसका पूरे देश मे कुछ बड़ा भयानक करने का यह पूर्वाभ्यास है
सनद रहे कि कल्याण सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को नरसिम्हाराव के साथ वादा किया था कि उनकी सरकार विवादित ढाँचे की रक्षा करेगी और वह टूट गया, योगी के साथ संघ और भाजपा के नेताओं ने कहा है कि दीवाली के बाद मन्दिर निर्माण चालू होगा और यदि ऐसे में सुप्रीम कोर्ट कुछ कहती है तो उसका उल्लंघन कैसे होगा इसकी बानगी मुझसे नही अपने आसपास देखिये, सुनिए और आते हुए ख़तरे की पदचाप को महसूस करिये जनाब
दीवाली इस समय सिर्फ अयोध्या में नही पूरे देश ने भव्य तरीकों से मनाई जा रही है
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दोस्ती की दीवानगी सच मे पागल बनाती है
और बरसों इसी पागलपन में निकल भी जाते है
यही वो पागलपन है जो रिश्तों के कोमल तंतुओं को जोड़े रखता है, हम जिंदा है तब भी और मरने के बाद भी
पवन, चेतना बहुत छोटे थे और हम युवा होते समझ बना रहे थे, खूब खेल, गतिविधियां और सीखना सिखाना बस 1987 से शुरू हुआ यह सिलसिला आज तक बना हुआ है जबकि दुनिया में इतना बदलाव आ गया है कि चेतना और पवन की शादी हो गई है और गंगा से लेकर टेम्स और दुनिया की नदियों से तमाम पानी बह चुका है, नियाग्रा फाल का और फाल हो गया है - इधर ट्रम्प और उधर भी ट्रम्प बिराज गए है
चेतना अपने पति मनीष के साथ केंद्रीय विद्यालय संगठन में क्रमशः विज्ञान और गणित के पीजीटी है इंदौर में और पवन अपनी वैज्ञानिक पत्नी फाल्गुनी के साथ नासा अमेरिका में वरिष्ठ वैज्ञानिक है
दोनो के दो - दो बड़े प्यारे बच्चें है , पवन और फाल्गुनी जब भारत आते है तो हम सब मिलते है और खूब गप्प करते है अबकी बार देवास नही आये तो हम लोग इंदौर में मिलें , बहुत कम समय मे बहुत ही कम समय मिला तो फिर क्या था - खूब गप्प और गप्प, निंदा -पुराण, शिक्षा, विज्ञान, स्वास्थ्य, राजनीति और अर्थ व्यवस्थाओं का विश्लेषण और लब्बो लुबाब यह कि दोनों देशों में जो शिक्षा , स्वास्थ्य, बेरोजगारी और मानव विकास सूचकांकों में तेजी से ह्रास हुआ है - वह चिन्तनीय है और घातक भी
छाया , जो अमेरिका में है, को सोते में से उठाया कि हम तेरी निंदा कर रहे तो उसका बुखार गायब हो गया फट से और वह भी ठेठ अमेरिकन लहज़ा छोड़कर मालवी तड़के पर आ गई और खूब हंसी , राहुल से बात की
आज भी मैं , रवि कांत मिश्रा, पवन, फाल्गुनी, चेतना और मनीष मिलें सुबह सुबह इंदौर में और दो तीन घँटे साथ गुजारें
एक पागल सी बेताब सुबह ने हमें पच्चीस साल पीछे से खींचना शुरू किया और जब लौटे तो याद आया कि आज भाई दूज भी है और हमारे घर परिवार भी बस दुखी मन से पुनः मिलने की उम्मीद में लौट आएं है कि वो सुबह फिर आएगी, कल से सब अपने कामों में व्यस्त होंगे, पवन फाल्गुनी उड़ जाएंगे
इस बीच छाया से वीडियो पर बात की, चुन्नी को मिस किया पर एक बार मन है सबके साथ मिल बैठकर दो तीन दिन तसल्ली से गुजारे , दोस्त है तो जीवन वरना शहर में गालिब की आबरू ही क्या है
आमीन


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और हमारे सबसे लाड़ले #Sharwil जी की पहली दीवाली अपने घर
जिनसे हमारी होली - दीवाली और सारे जहां की खुशियाँ है उन्हें इत्ता बड़ा होते देखकर मन प्रसन्न है और दिल से दुआएँ ही दुआएँ ही निकल रही हैं
अपने घर में सिद्धार्थ, अनिरुद्ध और अमेय के बाद बचपन सालों बाद लौटा है , किलकारियां, जोर से रोने और रूठने की अदाएं, नाजों - नख़रे, बच्चों के खिलौनें, खाने की बातें, सफाई और रंगों की विशेष सजावट
दीवाली का बड़ा दिन कल है पर कल देर रात जब से आये है - घर के सारे लोग सेवा चाकरी में लगें हैं कि एक मिनिट भी अकेला ना छोड़ें और जब सोते है तो सब बारी बारी से निहारतें रहतें हैं और जागने का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं
बच्चे हैं तो घर है, परिवार है, दुनिया है - बाकी सब बेकार है
आइये, दुनिया के सब बच्चों के लिए दुआएँ करें - एक दिया उनकी बेहतरी, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए लगाएं कि इस नन्हें दिए और पवित्र अग्नि के आलोक में वे हमारी ताकत बनें और राष्ट्र और समाज के लिए श्रेष्ठ करें
आपके आशीष की आकांक्षा में
- चिरंजीव शरविल स्नेहल सिद्धार्थ नाईक


Wednesday, November 7, 2018

Sharwil's First Diwali and Posts from 4 to 7 Nov 2018


और हमारे सबसे लाड़ले #Sharwil जी की पहली दीवाली अपने घर 6 to 10 Nov 2018 
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जिनसे हमारी होली - दीवाली और सारे जहां की खुशियाँ है उन्हें इत्ता बड़ा होते देखकर मन प्रसन्न है और दिल से दुआएँ ही दुआएँ ही निकल रही हैं
अपने घर में सिद्धार्थ, अनिरुद्ध और अमेय के बाद बचपन सालों बाद लौटा है , किलकारियां, जोर से रोने और रूठने की अदाएं, नाजों - नख़रे, बच्चों के खिलौनें, खाने की बातें, सफाई और रंगों की विशेष सजावट
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दीवाली का बड़ा दिन कल है पर कल देर रात जब से आये है - घर के सारे लोग सेवा चाकरी में लगें हैं कि एक मिनिट भी अकेला ना छोड़ें और जब सोते है तो सब बारी बारी से निहारतें रहतें हैं और जागने का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं
बच्चे हैं तो घर है, परिवार है, दुनिया है - बाकी सब बेकार है
आइये, दुनिया के सब बच्चों के लिए दुआएँ करें - एक दिया उनकी बेहतरी, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए लगाएं कि इस नन्हें दिए और पवित्र अग्नि के आलोक में वे हमारी ताकत बनें और राष्ट्र और समाज के लिए श्रेष्ठ करें
आपके आशीष की आकांक्षा में
- चिरंजीव शरविल स्नेहल सिद्धार्थ नाईक
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सुप्रभात
आप सबको शुभ दीपावली
आने वाला नया वर्ष सुख समृद्धि लाएं और हम सब शान्ति और प्यार से रहें , समाज मे भाईचारा और सौहार्द बना रहे
कोई भी ताकतें हमारे अमन चैन और आपसी सहयोग को छीन ना सकें और यदि कोई ऐसा करने की कोशिश करें भी तो प्रभु श्रीराम की तरह से उसका समूचा वंश नष्ट कर विभीषण जैसे के हाथ में उसका राज्य सौंपकर विजयी भाव से अपने वृहत्तर समाज मे लौट आएं जहां सब समान है और सबको लिखने पढ़ने और बोलने की इतनी आजादी हो कि एक धोबी भी जानकी माता पर भी प्रश्न उठा देता था ( हालांकि वह गलत था) और श्रीराम को सोचकर निर्णय लेना पड़ा था, उन्होंने धोबी को कुछ नही कहा ना ही 14 वर्ष वनवास काटकर आने के बाद मंथरा से बदला लेने या सजा का कोई जिक्र आता है - ऐसे अभिव्यक्ति के हिमायती श्रीराम प्रभु का राम राज्य स्थापित करने में सहभागी बनें ( उनका गर्भवती सीता को जंगल भेजने का निर्णय गलत था ) ख़ैर
दीवाली दीप पर्व है, रोशनी आबाद करिये और अपने चारों ओर कचरे की सफ़ाई करते हुए अँधेरों को भगाइये
सादर और स्नेह
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तुम सबसे ऊंची मूर्ति बनाओ विश्व की गुजरात मे चीन की बनी
तो
मैं सबसे ज्यादा तेल जलाकर दिए जलाऊँगा अपने गृह प्रदेश में कोरिया की प्रथम भद्र माताजी को बुलवाकर उदघाटन करवाऊंगा
जनता की मेहनत का रुपया बर्बाद कौन ढंग से और संविधानिक तरीके से करता है देखें जरा
2019 में देखें कौन बनता है राष्ट्र प्रमुख ?
[आपको क्या लगता है प्रतिस्पर्धा सिर्फ हम जैसे घटिया लोगों में ही होती है ]
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मप्र में भी साला बेगमगंज, शाहगंज, होशंगाबाद से लेकर ओबेदुल्लागंज और ना जाने कौन कौन से घटिया शहर है, काश कि शिवराज जी को भी सद्बुद्धि गत 13 वर्षों में आई होती तो आज उनका चेहरा ताज़े गुलाब नुमा ख़िला ख़िला होता
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अयोध्या तक जाने और आने का हवाई किराया नही लगेगा भिया
मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम एयरपोर्ट पर पुष्पक विमान उड़ेंगें तो एयर फ्यूल की जरूरत नही होगी, बस किराए में हार फूल, चना चिरौंजी, कपूर, गन्ध, अक्षद और थोड़ा सा गंगाजल लगेगा जो एयरपोर्ट पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा
आभारी हूँ श्रद्धेय आदित्यनाथ योगी उर्फ बदलू भोगी, प्रमुख महामात्य , धर्म प्रांत , जम्बू द्वीप का जिन्होंने आज यह घोषणा की
जानकारी के लिए बता दूं, कि मैं समर्थन में हूँ इस तरह के नामों का सभी जगहों का नाम भगवानों के नाम पर होना ही चाहिए, बदलाव के इस दौर में सबका नाम बदलना जरूरी है इससे सँस्कृति, सनातन धर्म, परम्परा और सभ्यता अक्षुण्ण बनी रहती है
मितरों, दिल्ली मुंबई से लेकर कालूखेड़ी और झुमरी तलैया तक के एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन , बस अड्डे और स्टॉप्स के नाम सुझाइए और सरकार से इनाम पाइए
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और मैं आदित्यनाथ योगी, भावी प्रधान लोकसेवक, भारत का नाम बदलकर जम्बू द्वीप करता हूँ और मेरी रियासत यानी जनपद - उत्तर प्रदेश का नाम आज से धर्म प्रांत होगा
मेरा नाम बदलू भोगी होगा, मुझे एतद नाम से जाना जाए
- आज्ञा से
प्रमुख महामात्य 
धर्म प्रांत , जम्बू द्वीप

नरक चतुर्दशी / आश्विन - कार्तिक
शके १९४०

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ठाठ की नौकरी की, मस्त मकान दुकान और रुपया बनाया, घूमे फिरे और क्या नही किया इतने बरस ऊपर से कविता अलग लिखी गरीबी की अमीरी ठाठ से और फिर आया बुढ़ापा तो लक्ष्मी बरसने लगी , अनुयायियों की भीड़ में एक नए ने कहा 'जनकवि'
हद है चापलूसी की - यही समझ पैदा की तूने भी इत्ते बरस कविता लिखकर, धन्य है वाग्देवी के वंशज, कुछ तो बारहों मास छत्तीस घड़ी इष्ट, आराध्य और कुलदेव मानकर छाती फुलाते नही अघाते थे, अब एक और फिदायीन बनने निकल पड़ा, ससुर पुरस्कार की माया ही निराली है
फक्कड़ लोग जिनके पैरों में चप्पल नही , यायावरी करते मर गए वे राजकवि क्योकि उनके नाम पर मठ बन गए और परम्पराएं चालू हो गई, फांका करते दिन गुजरे - चांपाकल का पानी पीकर दुर्गा दुर्गा, बम बम करते मरें और उनके मठ के पहरेदार दिल्ली के बहाने देश हांकने के अगुआ बन गए
पिछलग्गु और भांड - चारण लगे पड़े है आरतियां उतारने में, अरे ढपोर शंखियों तुम्हारे पूजा के थाल सजाने से तुम्हारे मन्दिर नहीं बनेंगें , तुम ढोते रहने को अभिशप्त थे और बने रहोगे, इसलिए बजाते रहो, मंगलाचरण गाओ - बस , यही औकात है तुम्हारी
हिंदी का संसार दोगलों से भरा पड़ा है, चार दरूये दोस्त हो तो आपका जीवन समझो संवर गया
अंधे बांटें रेवड़ी और अपन अपन को देय
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विजय माल्या, तमाम मोदियों, संदेसरियाओं, उर्जित पटेल, अपने मोई जी, जयेश शाह वल्द अमित शाह, रामदेव और इसके हमजाद बालकृष्ण, अम्बानी द्वय, अम्बानी भाभियों, अडानी और परमपूज्य जेटली की ओर से देश के भिखमंगों और मूर्खों को 15 लाख का पुनः वादा करते हुए धनतेरस की बधाई और मंगलकामनाएं
आशा है 2019 में जस्टिस काटजू के हिंदुस्तानी चरित्र पुनः इन सबको जितायेंगें और अगले 50 वर्ष के लिए शुभकामनाएं स्थाई हासिल करें
इस दीवाली पर आप और नंगे - भूखें रहें, कंगाल हो, आप सबने जो बैंक में ओपन हार्ट, किडनी फेल या कैंसर होने की संभावना को लेकर राशि रखी है, उसे निकालने में आपके बाप को भी पसीना आ जाएं , आपके बेटे बेटियों की शादी के समय आपकी बेइज्जती हो, आपके परिवार के लोग अपना रुपया निकालने में एटीएम की पंक्ति वाली भीड़ में ही "ऑन द स्पॉट" मर जाये , देश के किसान आत्महत्या करें ताकि हमारी जिम्मेदारियां कम हो - यह तमन्ना है और ठोस उम्मीद, हम कोशिश करेंगे कि चीन, जापान से लेकर दुनिया भर के ठगों को लाकर आपको जितना उल्लू, मूर्ख और चूतिया बनाया जा सकता है , बनाएं -शोषित कर खून चूस लें - यह और आने वाली लोकप्रिय असली राष्ट्र प्रेमी सरकार पूरी कोशिश ही नही बल्कि योजना और कानून बनाकर करेगी
याद है ना 8 नवम्बर, रात 8 बजे, टीवी पर दिया भाषण - स्वागत नही करोगे , वंदन द्वार नही सजाओगे, शहनाई नही बजाओगे मितरों
- भारत सरकार 
- देशभर के गुलाम मुख्यमंत्री 
- समस्त बैंकों के चेयरमैन 
- सभी गिरवी रखी संविधानिक संस्थाओं के प्रमुख

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Interestingly in both the parties tickets have been distributed to certain persons who have no "Connect with People," with their own town or constituency but they used social media for last two years, fought like warriors of world war - won & defeated and finally with this Eye wash technique they gathered lacs of virtual followers and Today they are On the Ground in the incarnation of Supporters of Democracy. Victory is different issue but they got the tickets.
Who said FB, Twitter and all is useless, bring them here and show case these jokers , I wanna give them a kick at / on their bump
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अब मन्दिर बन ही जाने दिया जाये, इनके मुगालते भी दूर होंगे और वोटों की फसल भी खत्म, साधुओं को कोई काम है नही तो क्या करेंगे, अरे अयोध्या जाओ तुम्हारे योगी ने गजब के रोजगार खोल रखे है 100 राम सीता की जोड़ी बनाई है, पुष्पक विमान आएगा जाओ बैठो उसमे साधु महाराज , मेहनत करो मिट्टी के दिये तो बना सकते हो या वो भी नही, सिर्फ फूंको मत
इतनी अधीरता 4 साल में दिखाते तो मोदी जी अपने मिसरा जी से अभी तक बनवा लेते , कुछ भी नही किया - अरे इतनी अधीरता अपने कश्मीरी पंडितों के लिए दिखाओ, धारा 370 हटाने के लिए दिखाओ, समान आचार संहिता के लिए दिखाओ, पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने के लिए दिखाओ, चीनी घुसपैठ के लिए दिखाओ - लाओ ना प्राईवेट बिल - लाओ राकेश सिन्हा महाराज - कछू करो ना , मेरे 15 लाख दिला दो मेरे वचन बद्ध मोदी जी से , ससुर चार साल से बेरोजगार हूँ अभी तक ब्याज ही कितना हो जाता
संबित पात्रा कछू बोलो ना , कब तक चुप रहोगे और उस बापडे प्रवीण तोगड़िया को भी सामाजिक विकलांग पेंशन शुरू कर दो, विक्षप्त हो गया है बेचारा और अब मलेरिया का इलाज भी नही कर सकता, और वो रामदेव देखो तुम्हारे राम लला का नाम लेकर व्यवसाय के फ़लक पर छा गया और गुरु पूर्णिमा पर दान देने वाले तुम्हारे हमदर्दों को भिखमंगा कर गया - यह भी भागेगा देखना जल्दी ही
भाजपा कार्यालय, पटेल की मूर्ति, अम्बानी का पेट , विजय माल्या से लेकर तमाम मोदियों, सन्देशरियाओं को इतना अकूत धन दौलत और नगदी रुपया कहां से उपलब्ध होता कि बोरों में भरकर जेटली की सहमति से भाग जाते, तुम्हारे ऊर्जित पटेल की आत्मा भी जाग गई जब उसकी औलादों ने पूछा कि पप्पा देश क्या होता है और देश प्रेम क्या होता है - अब जयंत शाह तो हर कोई नही होता ना जो नैतिक शिक्षा के पेपर में नकल करके पास हुआ
बकवास के सिवा कुछ नही अब इन्हें 5 राज्यों में डूबती नैया को सम्हालने में एक ही केवट नजर आ रहें हैं प्रभु श्रीराम ☺️ 12 दिसम्बर के बाद सारा ज्वार भाटा उतर जाएगा और फिर देव आयेंगें मार्च में
क्या कहते थे परसाई - हम एक उम्र से वाकिफ है
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Friday, November 2, 2018

Posts of 31 Oct and 1 Nov 2018


सुन रहे हो ना...... कहां हो तुम ........ तुम्हारे लिए.......
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चरागों को आँखों में महफूज रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी

~ बशीर बद्र साहब

कांग्रेसी इंदिरा गांधी को नही पर देश की मजबूत , पहली महिला प्रधान मंत्री को भी इतनी देर की बकर में याद कर श्रद्धांजलि दे दी होती तो महान हो जाते
भूलो मत तुमसे पहले यहां जो तख्तनशी था ....
इतने बड़े पद पर होकर इतना ओछा होना शोभा नही देता
हम लोग तो है ही टुच्चे और तुम्हारे नही, तुम्हारी नीतियों के विरोधी पर सम्मान करते है, देश की बात आने पर तुम्हे सम्मान देते है , तुम्हारी नोटबन्दी से लेकर बाकी सारे निर्णयों को भी स्वीकार करते है और संविधानिक सीमाओं में रहकर अपना पक्ष दर्ज करते है
पर तुम तो रोल मॉडल हो और जिस पद पर आसीन हो वहां देश का गौरव बनाएं रखना सबसे पहला काम है फिर तुमने तो देखा है उस महिला को , किस तरह से उसने देश मे काम किया है , आज यह भूल रहे हो कि कल कोई और इस पद पर आएगा और तुम्हे भी भूल जाएगा
स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के अनावरण पर "यूनिटी" का शाब्दिक अर्थ नही समझ पाए मोदी जी- आपसे क्या अपेक्षा करें कि आप दलित, वंचित, आदिवासियों और बाकी सबको इस भारत मे एक कर पाएंगें , दुनिया को एक कर पाएंगे, ऊंची प्रतिमा के नीचे इतना ओछापन दिखाना मनुष्य होने और आदमियत ना होने की राष्ट्रीय शर्म है
हम सब भारतवासी होने के नाते शर्मिंदा है आपकी इस तरह से एक महिला प्रधानमंत्री की जानबूझकर की गई उपेक्षा के लिए
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सबसे ऊँचा फेंकने वाला आज सबसे ऊँची प्रतिमा का अनावरण करेगा , जिन्दगी भर पटेल के बारे में ऊँच नीच करते रहें और अब उसी में अपनी अस्मिता नजर आ रही है........
दो ऊँची चीज आज विश्व रिकॉर्ड बन रही है, भारतवासियों, देश भक्तों बधाई..........
पांच साल की उपलब्धि है मोदी जी की, इस बात पर एक कार्यकाल तो और बनता है ताकि अगली बार अम्बानी अडानी माल्या से लेकर उर्जित पटेल तक की मूर्ति लग जाएं देश भर में 
क्यों मितरों
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इज़ ऑफ डूइंग बिजिनेस में भारत की रैंक सुधरी
जेटली ने ख़ुश होकर सूचित किया
बिल्कुल सही है जनाब
लोन लो , कमाओ खूब, NPA बैंक का करो और फिर देश छोड़कर भाग जाओ
This is what real Ease of Doing Business, I had a word with some senior economists they categorically said "go and ask any Banker , this is just an eye wash and an attempt to lift the face"
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मन्दिर का हल्ला 5 राज्यों के चुनाव तक ही होगा और राकेश सिन्हा प्राईवेट बिल लाएँगे, इनको समझाओ कोई कि गुरु 1947 से अभी तक मात्र 15 प्राईवेट बिल पास हुए है और अधिकांशतः इस तरह के बिल्स पर चर्चा नही हुई है, 95 % बिल कचरे के ढेर में पड़े सड़ गए
सिन्हा जी इतने दिनों से दलितों और महिलाओं पर ऊना से लेकर तमाम देशभर में अत्याचार हो रहे है , 3 या 4 माह की बच्चियों से बलात्कार कर हत्या कर दी जा रही है, देशभर की अदालतों में 4 करोड़ केस पेंडिंग है, बेरोजगारी अब देश का पर्याय है, आपके मित्र रुपया लेकर हम सबको कंगाल कर भाग गए - आपको प्राईवेट बिल लाने का ख्याल नही आया, आपकी संवेदनाएं मानवीय है या वायवीय
अल्लामा इकबाल ने लिखा था
"सच कह दूं ए बरहमकन, गर तू बुरा न माने 
तेरे सनमकदों के बुत हो गए पुराने , 
अपनों से बैर रखना तुने बुतों से सीखा 
जंगो जगल सिखाया वाईज़ को भी ख़ुदा ने"

और ये बिल लाएँगे तो भाजपा के पुराने चावल इसको क्रेडिट देँगे क्या , अरे महाराज जरा राजनीति समझो ना, हम लोग तो समझ गए है कि तुम सब चुनाव सामने देखते ही मन्दिर मन्दिर करते हो बाकी पांच साल तो घर में नवरात्रि के उपवास नही करते और अयोध्या झाँकने नही जाते
बन्द करो बे लोगों को बेवकूफ़ समझना, सारी अक्ल का ठेका तुमने ही ले रखा है क्या प्रभु , मतलब भगवान श्रीराम से ज़्यादा पापुलर होना चाहते हो क्या
दूसरा योगी जी अयोध्या में जनता का रुपया उजाड़कर सबसे बड़ी दीवाली का उत्सव 3 दिनों तक मनाएंगे, आक्सीजन दे दी क्या बच्चो की और सैफई उत्सव करने वालों और तुममे फर्क क्या है योगी जी, बस तुम मुलम्मा प्रभु श्रीराम के नाम का चढ़ा रहे हो, उतना तेल आंगनवाड़ी के बच्चों के लिए सहेज कर इस्तेमाल कर लेने दो तो उप्र का कुपोषण कुछ कम होगा
खैर, हे हे है , मालवा में कहते है कि मुगालते की भैंस पाड़ा जनती है समझे राकेश बाबू
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राहुल से आज फारुख , चन्द्र बाबू मिलें और अब यह नौटँकी चलेगी 2019 तक
कुछ होगा नही बस बकलौली चलती रहेगी , मुझे गम्भीरता से लगता है कि क्षेत्रीय पार्टियों को बजाय इस तरह की मूर्खता करने के अपने इलाकों में काम करना चाहिए और हवाई किले बनाने के काम जमीन पुख्ता होने के बाद करें ये शेख़चिल्लीगण
यह निहायत ही मूर्खता भरा कदम है और इतने विविध लोग एक साथ काम नही कर सकते और मोदी एंड पार्टी कम है क्या - जैसे मायावती को दबाकर रख दिया ठंडे बस्ते में , उस तरह से किसी का भी पुराना केस निकालकर ये दबाएंगे
अपने क्षेत्र में काम करना ज्यादा जरूरी है
बजाय ये एकता जैसे चमकीले नारे के और बकवास के और ये सब कांग्रेस के बैनर तले क्यों आ रहें है - इनमे से कोई संयोजन और समन्वय के लायक नही क्या

थोड़ा गम्भीरता से सोचिए दुश्मन का दुश्मन अब हमेंशा दोस्त नही होता, दोस्त से बड़े दुश्मन भी नही होते

Wednesday, October 31, 2018

Matured Rahul Gandhi, Tips of World Book fair 2019 and Karwachauth 30 Oct 2018

राहुल गांधी की आज की पत्रकार वार्ता जो इंदौर के सबसे महंगे होटल रेडिसन में हुई थी और सिर्फ चुने हुए पत्रकारों को जाने की और नाश्ते की इजाजत थी , अभी क्विंट पर सुनी
राहुल सिर्फ परिपक्व ही नही बल्कि तार्किक भी हो गए है और उन्होंने अकेले ने भाजपा के मोदी शाह कम्पनी से लेकर संघ को सोचने पर मजबूर कर दिया है फलस्वरुप मोदी से लेकर शाह और छूट भैये गली मोहल्ले के टॉमी, कालू , शेरू, अनिता या सुनीता रूपी भक्त बौखला गए है और पढ़े लिखे जाहिल भी समझ नही पा रहे कि इस पप्पू को क्या जवाब दें
मोदी से लेकर संघ का जमीनी कार्यकर्ता इसलिए अब ख़ौफ़ में है कि वो जवाब देने लगे है और इनके पप्पू कहने से बिदकते नही बल्कि पूरी दिलेरी से सूट बूट की सरकार से लेकर चौकीदार ही चोर है कहने का साहस रखते है
मोदी ने इतिहास मरोड़कर नेहरू से लेकर पटेल और सुभाष से लेकर गांधी तक को अपने गलत इरादों और बुरी नीयत से बदनाम करके थूकने की कोशिश की वह उन सबके मुंह पर गिर रहा है यह लोग जान गए है , राहुल के जवाब देने के बजाय नेहरु को गाली देना कहां की बुद्धिमानी है
महिलाओं के प्रति तीन तलाक से लेकर शबरीमाला के मंदिर में प्रवेश पर इनकी दो मुंही नीति सामने आ गई गई, शबरीमाला के केस में अमित शाह की सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बयानबाजी 5 राज्यों में चुनावों के दौरान हिन्दू कार्ड खेलने की है बाकी कोई बात में दम नही है और इस बात को पढ़े लिखे लोग ही नही समझते बल्कि एक अनपढ़ भी समझता है कि खीज कहां तक है
असली बात यह है कि ये 5 साल में कुछ नही कर पाएं और अब विदाई के समय देश को पुनः 1947 की तरह हिन्दू मुस्लिम की आग में झोंककर कंगाल खजाने के साथ भाग जाना चाहते है - सारी संविधानिक संस्थानों को बर्बाद कर अब उजबक किस्म की बातें कर रहें है , एक कैमरामैन की रक्षा नही कर सकते जो आज मारा गया छग में तो देश की रक्षा क्या खाक करेंगे
ये करोड़ो रूपये की मूर्ति बनवा सकते है एकता के नाम पर , अपनी पार्टी संघ और अपने अनुषांगिक संगठनों की एकता ही बना लें तो बहुत है - शिवराज जी, वसुंधरा, रमणसिंह जी, कैलाश भाई, उमा जी, तोगड़िया जी, गोविंदाचार्य जी, भागवत जी, आडवाणी जी, जोशी जी या सुषमा स्वराज जैसों को एकसाथ मोदी जी अपने हाथ से साथ बिठाकर चाय पिला दें वही बहुत है
राहुल की परिपक्वता आश्वस्त करती है कम से कम वो बगैर डर के बोल रहे है काम कर रहें है, बाकी का विपक्ष तो नपुंसक बन गया है और कामरेडी लोग शहनाई लेकर बैठे है कि कुछ हो और वो ज्ञान बांटें , राहुल को कांग्रेस के भीतरी लोगों से भी सतर्क रहने की जरूरत है खासकरके शशि थरूर,मणिशंकर और दिग्विजय सिंह जैसे जो बनते महल पर मठ्ठा डालने में पारंगत है और माहिर है चाल बदलने में साथ ही उन अवसरवादियों से जो टिकिट के बहाने दूसरे दलों की मदद कर रहें है अंदरूनी जानकारियां फ़ैलाकर और यहां वहां बेचकर कांग्रेस के गड्ढे खोद रहे है
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कुछ हिंदी के लड़के लड़कियां पकड़ो और 2- 4 पुरुष और महिलाएं जो कुछ लिखते पढ़ते हो, कॉलेज में हो तो ज्यादा बेहतर, फेसबुक पर हो तो और बेहतर और देशभर में घूमते- फिरते निठल्ले हो प्राध्यापकी के नाम पर तो सबसे श्रेष्ठ और दिल्ली के हो तो आपने बाजी मार ली गुरु
या फिर आपके गोडाउन में एक बड़ा टेबल, 20- 25 लोगों के बैठने की जगह, चाय के झूठे ग्लास फेंकने के लिए डस्टबिन - अगर यह सब हो तो विश्व पुस्तक मेला 2019 में आपका स्वागत है
अब पूछे क्यों - अपनी नई पुरानी, ना बिकी किताबों को इन नए लौंडो को पकड़ा दो - वे पढ़ेंगे, खूब खरा खर्रा लिखेंगे और आप इन पर छोटा सा पैराग्राफ लिख कर फोटो सहित फेसबुक पर चेंप दो , इन्हें उभरता आलोचक बनाकर खूब दूहो इतना कि वो भाग ना जाये तब तक या उसकी पी एच डी ना हो जाये तब तक या उसे 500 - 700 का कोई नत्थूलाल पुरस्कार भी दे दो
अपनी इस पोस्ट में दिल्ली के किसी लेखक या लेखिका की कहानी की किताब वाला फोटो डालो उस दुहित का पढ़ते हुए, ताकि आप का प्रचार प्रसार फोकट में हो जाए, हर बार एक नया लौंडा ढूंढो - जो कन्याकुमारी से लद्दाख का हो या सिक्किम से सोमनाथ का, बनारस या अलीगढ़ का हो बस बात बन गई - क्योंकि असली आलोचक जो घाघ है वह आपको घास नहीं डालेगा
या फिर आप भोपाल, लखनऊ, इलाहाबाद, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता, भोपाल, जयपुर, उदयपुर या किसी सुमरा खेड़ी में रहते हो - प्रकाशक हो तो जाहिर है कचरा डंप करने के लिए बड़ा गोडाउन तो होगा ही - उसमे अक्टूबर से कवि गोष्ठी,कहानी पाठ, वैचारिक बहस , सम्मान, साहित्यिक श्राद्ध आयोजित करें - किसी बुढऊ का या मरे खपे साहित्यकार का, दिल्ली से किसी लल्लू को बुला लें और धे कर धे पोस्ट पे पोस्ट डालें तो पुस्तक मेले में आपके अटल स्टाल पर भीड़ बनी रहेगी
या फिर हर किसी को भी फेसबुक, इंस्टा या ट्वीटर पर एड कर लें और अपनी गीता प्रेस के प्रकाशन की जानकारी मय अकाउंट नम्बर और आय एफ सी कोड के भेजते रहें रोज जब तक बन्दा 2000 का आर्डर ना दे दें
विश्व पुस्तक मैले में बिक्री के ये नुख्स सॉरी नुस्खें है
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कुछ मज़ेदार अवलोकन एवं खुलासे - करवा चौथ के बहाने
* करवा चौथ पर बहुत लोगों की पोल खुली जब मित्रों की बीबियों ने पति परमेश्वरों को चलनी में से ताकते हुए फोटू टैग करके डाल दी
बेचारे फेसबुक पर अभी तक "सिंगल" के स्टेटस पर चल रहे थे
* इन्ही फोटुओं से मालूम पड़ा कि बेचारों के चेहरे कितने गौर वर्ण है और स्वच्छ सपाट चेहरे है
बेचारे किसी एप से किशोरावस्था और जवानी के दिनों के अपने चांद सितारे वाले कृष्ण पक्ष के सबसे काले चेहरे को गोरा और सारे दाग मिटाकर फोटू चैंपते थे ताकि सिंगल के साथ गोरा चिट्टा चिकना चेहरा लुभावना बना रहे और महिलाएं आकर्षित होती रहें
* प्रगतिशीलों की कलई खुल गई जब बीबियाँ उनके चरण रज लेती फोटू लगा गई
सारी प्रगतिशीलता धरी की धरी रह गई जब कहानी -कविता और अपने बकवास लेखों में महिला बराबरी का गुणगान करते थे और रसोई में खुद खाना बनाने के फोटू डालते रहते थे कि बड़ी समानता के चस्के है इन्हें और बीबी के कामों में हाथ बंटाते है
* जितना फेसबुक और सोशल मीडिया को गाली देते थे बीबी से वीडियो कॉल करते फोटू पड़ोसन ने खींच लिए और बीबी ने चेंप दिए
बेचारे खुद भी व्यस्त रहने का बहाना नही बनायेंगें और फेसबुकिया लेखक कहने की जुर्रत नही करेंगे अब किसी को , साले खुद 24X7 वाट्सएप पर महिलाओं से ठिठोली करते रहते है , किसी भी महिला की वाट्सएप समूह में हर सड़ी गली पोस्ट पर लम्बा आख्यान पेल देते है और दर्शाते ऐसे है कि ससुर ट्रम्प से ज्यादा व्यस्त है
नोट - कम से कम दो दर्जन कुख्यात लोगों के गोरे काले, काने टेढ़े -मेढ़े और चेचक से लेकर स्कार और चक्कू छुरी के दागों से भरे चेहरों वाले परमेश्वरों के असली फोटो मय बीबी से पूजा करवाते मैंने डाउन लोड करके रख लिए है ,अब आओ बेटा अपनी प्रगतिशीलता और नारीवाद, रंगभेद और रेसिज़्म पर बहस करने , फिर चैंपता हूँ मय सबूत और तारीख के , कुछ बोल भी नही सकोगे - बीबी से बड़ा सबूत कोई नही तुम्हारी असली औकात का
[ यह पोस्ट ना रंगभेद का समर्थन है, ना संस्कृति परम्परा या स्त्री समर्पण पर टिप्प्णी पर उन तथाकथित लोगों को उघाड़कर सामने लाने का एक प्रयास है जो सिंगल, गोरे, चिकने और प्रगतिवादी होने का ढोंग करते है, साला जो सही है असली है उसे छुपाने में दिक्कत क्या है गुरु ]

Monday, October 29, 2018

Posts of 28 Oct 2018

कांग्रेस तो देश से खत्म हो गई भिया
अब भाजपा को ही सम्हालना हेगा अपना महान देश
और फिर आज के नेताओं - पंचों, पार्षदों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के बच्चे आगे आकर चुनाव नी लड़ेंगे तो क्या सड़क छाप कार्यकर्ता लड़ेंगे - साले एक वार्ड में रहते हुए अपने घर का शौचालय बनवाने की औकात नही और चुनाव लड़ेंगे
हमारे मोई जी के मकान में रे रिये है, मोई जी के संडास में निपट रिये हेंगे और शिवराज मामा का एक रुपये वाला चावल खाके हमकू ई च डरा रिये साले हरामखोर
और मीडिया वालों सुन लो हरामखोरों , जे वंशवाद नी हेगा - वो तो कांग्रेस में था , हम तो इसे परंपरा, संस्कृति वाहक और देश के लिए हिन्दू नायकों का राजधर्म कहते हेंगे
समझे कि नी समझें , ज्यादा चूँ - चपड़ की तो वो जज का नाम क्या था रे घनश्याम, नागपुर वाला जो खत्म ईच हो गिया
ठांय .....ठांय......ठांय......
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कल मेरे पड़ोस में किसी का देहांत हो गया तो मैंने अपने कुछ मित्रों को फोन लगाया कि आ जाओ क्रिया कर्म कर लें इसका भी
2 - 3 प्रकाशक मित्र थे - बोले - यार अभी क्रिया कर्म में तीन चार घंटे तो होंगे और फिर अब मामला 14 दिन तक चलेगा, आने वाले तो सवा महीने तक भी आते हैं एक काम करता हूं एक स्टॉल तुम्हारे घर के पास में लगा देता हूं जो आएंगे वह देख लेंगे , कुछ खरीद भी लेंगे, पत्रिकाएं रख दूंगा - निशुल्क पढ़ने के लिए - ताकि जो बैठकर बोर होते हैं - वे पत्रिकाएं पढ़ें और कुछ किताबें ही खरीद ले, श्मशान के लिए भी कपाल क्रिया होने तक एक झोले में कुछ ताजा माल रख लूंगा - अपन तो गुरु ऐसा है कि "जिधर भीड़ - उधर हम" - "कोई बुलाये या ना बुलाये"
दूसरा प्रकाशक मित्र बोला - मेरा गोडाउन हिंदी कविता और कहानी से बुरी तरह से भर गया है, लोग दीर्घ शंका से कम और लघु शंका से ज्यादा लिख रहे है और बीस - पच्चीस हजार नगदी देकर छपवा भी ले रहे हैं, अब ये कचरा कौन खरीदेगा, अपुन को बैठे बिठाये पुण्य मिल रहा है - किताबें आम लोगों तक पहुंचाने का ; हो सकता है कल पद्मश्री भी मिल जाएं गुरु, और फिर विश्व पुस्तक मेला आ रहा है - अभी नई आवक भी अच्छी है लोग जोरदार पैसा देकर छपवा रहे हैं और मुझे भी छापने में कोई दिक्कत नहीं - क्योंकि दिल्ली में 10 दिन का खर्च बहुत हो जाता है और इस बहाने कुछ इनकम हो जाएगी, चार - पांच हजार में सौ का बंडल बंधवा लेता हूँ, 15 दिन में 20 बंडल भी निकल गए तो एक लाख किसके बाप के ; बीस हजार किताबें साली खप जाएंगी - वो अलग
दो - तीन कवियों को फोन किया तो बोले कुछ कविताएं ले आते हैं, लोग आएंगे वे नीरस बैठेंगे - इससे अच्छा है कि वे सब वाग्देवी की शरण में आएं और कुछ रचनाएं सुने , देश में इस समय जो माहौल है उसके मद्देनजर कविता का होना बहुत जरूरी है और कविता ही आदमी को जीवन देगी - मौत से दूर रखेगी
कहानीकार मित्र बोले - ज्यादा नहीं 30 - 40 पेज की 2, 3 कहानियां हैं - ले आएंगे - जिसमें जीवन एवं मौत के पश्चात के समाज, अर्थ और राजनीति के अक्स है मौत का दारुण चित्रण है, करुण दृश्य हैं और इन्हें हम सबको सुनना ही चाहिए , समाज को भी इन पर बहस करना चाहिए - ताकि हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सके
यह सब सुनकर मेरे पड़ोस में जो 95 साल का मुर्दा बांस की खपच्चियों पर लेटा था अचानक जाग गया और बोला
अभी जिंदा हूँ तो जी लेने दो ....
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Saturday, October 27, 2018

Posts of 26 and 27 Oct 2018 Karwa Chauth etc


बाज़ार से लौटा हूँ
अभी 5 -7 साल पहले ट्राफिक की इतनी समस्या नही थी, भीड़ नही थी, रँग बिरँगे करवें नही थे, चलनियाँ नही थी, सिंदूर के इतने आकर्षक पैकिंग नही थे , साड़ियों - चूड़ियों की दुकानों पर ऑफर नही थे
देवास जैसे कस्बे में दस पुलिस के जवान चार पहिया रोकें ट्रैफिक कंट्रोल कर रहें थे, बाजार में रौनक भयानक किस्म की थी , तमाम गरीबी और भुखमरी का रोना रोने वाले निम्न और मध्यम वर्ग से लेकर उच्च वर्ग की महिलाएं बाजार में चक्कर घिन्नी बनी हुई है - यह कहाँ आ गए है हम , क्या दलित क्या सवर्ण सब इस खेल के शिकार हो गए है सड़क छाप गाने और श्रृंगार की सामग्री और चोंचलें यही पहचान है तभी विश्व सुंदरी भी बनेगी, ब्लेड और जॉकी के विज्ञापन में बाजार इस्तेमाल करता है तो हो भी जाती है और प्रगतिशील कामरेड से लेकर पति परमेश्वर भी त्याग समर्पण की देवी बनी पत्नी को रात अपना मुंह चलनी में से दिखाते है, इन महिलाओं को यह धूर्तता समझ नही आई 2018 में भी, तो बन्द कर दो बराबरी और जेंडर की बहस
कुल मिलाकर अभी पांच साल पहले बाज़ार नही था और पति पहले भी सात जन्मों तक पत्नियों के थे और आज भी उन्हीं के रहेंगें - बस मख़ौल कैसे बनाना चाहिए पवित्रता और संस्कृति का यह सीखना चाहिए
करवा चौथ भी मनाना है, जेंडर बराबरी भी करना है, मी टू भी करना है, स्त्री आरक्षण भी चाहिए, इमोशनल भी रहना है, ममता की मूर्ति भी रहना है , बॉस को ख़ुश भी करना है, मेट्रो में सीट भी अलग रखना है, अलग लाईन भी लगाना है और पति परमेश्वर भी मानना है - भारतीय स्त्री कुल मिलाकर बाजार के हाथों में एक कठपुतली है जो फिल्मों से लेकर आज की भीड़ में करवा चौथ के नाम पर गोल गोल घूमती रहती है और समय आने पर बकवास भी करती है , उपवास भी और स्वतंत्रता भी - लगता है पूरी जेंडर की बहस और समझ आज से कल रात बारह बजे तक कही चूल्हे में चली जाती है
फालतू की बहस वाले लोग यहां विष वमन ना करें
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जस्टिस रंजन गोगोई के लिए आज का दिन बड़ा है
देखें उनकी अगुवाई में क्या फैसला लिया जाता है, आज यह भी समझ आएगा कि कानून की किताबों में पढ़ाये जाने वाले सदोष लाभ और हानि या आशय को वो सरकार और आलोक वर्मा के बरक्स किस तरह लेते है
यह एक आधार भी सुनिश्चित करेगा कि आखिर आने वाले दो वर्षों में न्याय की दिशा और दशा क्या है, जस्टिस लोया की हत्या /मौत से अपेक्स कोर्ट कितना अभी तक सहमा हुआ है या सब भूलकर पूरी आजादी और निष्पक्षता से न्याय के पक्ष में खड़ा होता है कोर्ट
यह सिर्फ एक व्यक्ति, एक प्रधानमंत्री की नीयत, रात को एक बजे दफ़्तरों में घुसकर दस्तावेज खंगालने , नष्ट करने या भ्र्ष्टाचार की बात नही वरन दुनिया के दूसरे नम्बर के लोकतंत्र में एक व्यक्ति के भ्रष्टाचार में डूबे होने, महज चार साल में देश को गुमराह करके निज स्वार्थ वश अपने आका को देश बेचने की भी बात है
यह अम्बानी के राफेल डील को बचाने के लिए आधी रात की खब्त में एक संविधानिक व्यक्ति के दफ्तर में घुसकर सारे कागज़ ले जाने,मनमाने तरीकों से काबिल लोगों के स्थानांतर कर अपना उल्लू सीधा करते हुए खुद को बचाने की भी जिद है
आज यदि सुप्रीम कोर्ट आलोक वर्मा को पुनः चार्ज दिलवा देता है तो नरेंद्र मोदी सरकार सहित 22 राज्यों के मुख्य मंत्रियों को कोई नैतिक अधिकार नही कि वे शासन प्रशासन में बनें रहें
और यदि फैसला नही भी आता है आलोक वर्मा के पक्ष में तो भाजपा और संघ को मोदी के गुजरात कार्यकाल, हीरेन पंड्या, माया कोडनानी, एक भद्र महिला के पीछा करने से लेकर गोधरा और केंद्र में आने तक के पूरे कार्यकाल , आनंदी बेन के कामों में दखल और ततपश्चात केंद्र में नोटबन्दी से लेकर इस सीबीआई कांड में जो पार्टी एवं संघ की छबि लोगों में बर्बाद हुई उसको 2019 के व्यापक सन्दर्भ में देखकर विश्लेषण करना चाहिए और भाजपा के अन्य मंत्रियों से लेकर वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स तक से राय मशविरा कर नई लीडरशिप के बारे में सोचना चाहिये
कुल मिलाकर अगला एक घण्टा भारतीय लोकतंत्र का बड़ा इतिहास बनने जा रहा है और इसकी पूरी गरिमा और बड़प्पन आज जस्टिस गोगोई के हाथ मे है
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Thursday, October 25, 2018

Posts of CBI and Cent Govt 23 to 25 Oct 2018

स्वच्छ भारत के नाम पर देश को उल्लू बनाते रहें, शौचालयों से पूरे देश को पाट दिया जहां अर्ध निर्मित पानी के अभाव में गंदगी और बदबू के बीच प्रशासनिक भ्रष्टाचार बजबजा रहा है बुरी तरह और नोटबन्दी से लेकर राफेल डील कर डाली, संविधानिक संस्थाओं - राष्ट्रपति भवन, सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, रिजर्व बैंक, सभी बैंकिंग संस्थान, अजा/अजजा आयोग, लबासना मसूरी, सीवीसी, आई बी, सेना से लेकर सीबीआई तक को साफ कर डाला
सही है गाना
स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने


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देश हित मे मोदी का इस्तीफ़ा आवश्यक
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2019 में भाजपा को जीतना है तो भाजपा मोदी से तुरन्त इस्तीफ़ा लें, शाह को पार्टी पद से हटाये और नए नेता का चयन करें, वरना यह टालमटोल की नीति बहुत महंगी पड़ेगी भाजपा और संघ को - इतनी बदनामी और बेइज्जती दुनिया मे किसी प्रधान मंत्री की नही हुई होगी
गम्भीरता से सोचिए कि सेना से सीबीआई तक में प्रधान मंत्री कार्यालय का स्पष्ट दखल और राफेल से बैंक के कामकाज में भी दखल - कितना बर्दाश्त करेगा कोई, आखिर क्यों रात एक बजे पुलिस को ले जाकर सीबीआई का दफ्तर खंगालना पड़ा और सील करना पड़ा , एक अयोग्य अफसर को चार्ज देना पड़ा
अब लग रहा है कि सीबीआई के आपसी झगड़ों में एक दो दिन में किसी अफसर की जान जा सकती है या हत्या की भी आशंका मुझे लग रही है क्या कहते है Intuition
अखिल भारतीय स्तर पर चयनित होकर आये इन मूर्ख अफसरों को यह नही समझता कि सत्ताएं तो आती जाती रहती है पर नौकरी स्थाई है और नेताओं की बखत कुछ नही है और रिश्वत का इतने बड़े पद पर जाने का क्या अर्थ है, क्या अपने नियोक्ता या आका को पोस्टिंग में देना मूल शर्त है
आजकल में देखियेगा और क्या क्या होता है क्योंकि रात एक बजे सरकार ने दफ्तर सील करवाकर सबूत ले जाने की या मिटाने की कोशिश की है
कितने शर्म की बात है कि दो व्यक्ति, सिर्फ दो व्यक्तियों ने देश की सारी संविधानिक संस्थाओं को चौपट कर दिया और एक महान देश के परखच्चें उड़ गए
पूरा विपक्ष भी निकम्मा और अकर्मण्य है अन्यथा ये दो लोग इतने आगे नही बढ़ते, दूसरा भाजपा और संघ के भीतर के लोगों की क्या मज़बूरी है जो इतना सब होने के बाद भी पूरी पार्टी, मार्गदर्शक मंडल, संघ के बौद्धिक और अंतर अनुशासिक संगठन और सरकार के दोनों सदनों में सहयोग कर रहें दल क्यों चुप है
राफेल से लेकर कई बड़ी हत्याओं की जांच में शामिल सी बी आई की निष्पक्षता पर कैसे और क्यों भरोसा करें
अब महामहिम राष्ट्रपति की कोई भूमिका है या नही - पूछ रहा हूँ
यह आपातकाल से बुरी स्थिति है
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तोते ने तोते से कहा कि तोतों की जात पारदर्शी होती है और अब यह फरमान तोतों के सरदार ने तोतादालत के पूर्व के निर्णयों के मद्देनजर रखकर तोतातन्त्र में कही
और दूर गगन की छाँह में तोते उड़कर बैठ गए और चार साल में फ़ल देने वाले अमरूद के पेड़ के अमरूद कुतरने लगें
सुना है तोतों के कुतरे फ़ल बहुत मीठे होते हैं - जाहिर है हर कोई इन्हें चखना चाहेगा ही
जय हो
इति तोता पुराण संक्षिप्ताध्याय समाप्त
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सोशल मीडिया के पत्रकार, समाजसेवी, चिंतक, बौद्धिक और भयानक संवेदनशील युवा ज़्यादा है - जो ना यूपीएससी निकाल पाएं ना अपने जिले के पटवारी की परीक्षा - खजूरी बाज़ार, इंदौर से दरियागंज, दिल्ली और सिविल लाइन्स, प्रयागराज की फोर्थ फिफ्थ हैंड पढ़ी किताबों से पाया एवं रटा हुआ थोथा अर्थात घटिया ज्ञान यहां वमन कर कुंठित हो रहें है - ये इंजीनियर से लेकर समाजसेवी और आलतू फालतू विषयों एवं भाषाओं के पी एच डी भी है
इनका विश्लेषण और निष्कर्ष पढ़ गली का कुत्ता ना मरे और मुहल्ले के सूअर मल खाना नाछोड़े, बरसों से बाप - माँ को बेवकूफ बनाकर अपनी माशूकाओं के घर की गैस रिफिल भरते ये पढ़े लिखें अंडा बेचने लायक भी नहीं रहें और यहां बुद्ध से लेकर बार्सिलोना तक का ज्ञान पेल देंगे भांग का अन्टा फंसाकर
बाकी बचें बुड्ढे ठुड्ढे तो बेचारे करें क्या - बहू बेटों ने जियो की फोकट सिम दिलाकर आठ दस हजार का फोन दिला दिया है, सेवानिवृत्ति के बाद ज्ञानी बनें ये जागरूक पहरुए जोत जलाए रहतें हैं और सुबह मोहल्ले का चक्कर लगाकर विश्व भ्रमण दिखाएंगें
कुछ घोर ईमानदार सरकारी और अ-सरकारी जनता दफ्तर में बैठकर बघार तड़का पेलती रहती है विद्वता का जो आता ना जाता भारत माता टाइप लिखते है, इनमे मास्टर, डॉक्टर, वकील, बाबू, नर्स से लेकर एनजीओ कर्मी और दो कौड़ी के पत्रकार भी है जो है तो खबर लिखने वाले पर अलां फलां मीडिया या वेब का सम्पादक बताकर अपनी और अपने शोषक की औकात यहां भौंडे ढंग से दर्शा देते है
कुछ बापडे वीडियो से लेकर मनचलों के किस्से तक शेयर कर नेहरू मोदी बनते रहते हैं और कुछ फोटो, साड़ी, सूट, दारू के नए ब्रांड से लेकर सविता भाभी पुराण में व्यस्त है, इनकी कुंठा पूछिये ही मत
एक चौथाई राजनीति के दांव पेंच से लेकर भिंडी बाजार के जुए सट्टे में व्यस्त है, कुछ साधु ढोंगियों के प्रवचन और उनकी कारगुजारियों के कारनामों को यहाँ चैंपकर खुश है कि बस सतयुग पोस्ट लिखते ही टपक पड़ेगा
हम जैसे निन्दा पुराण और खरी खरी लिखकर प्यार मुहब्बत खरीदते रहते है इस आभासी संसार मे यारी कम दुश्मनी ज़्यादा पाल रखी हैं , अघोरी लोग है अपुन तो - हमन है इश्क मस्ताना ; हमन को होशियारी से क्या
यही गीता, कुरान , बाइबिल और गुरुबाणी का सार है और सोशल मीडिया का असली सत्व - ले लो फ्री में - मोक्ष मिलेगा
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चलो शुरू हो जाओ देशप्रेमियों, मैं तो हो गया - लो देखो ....
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि
"पटाखे रात सिर्फ आठ से दस बजे तक" यह स्थाई फ़ैसला है
(क्रिसमस और एक अन्य त्योहार जिसका नाम भूल रहा हूँ, शायद न्यू ईयर, की रात में रात्रि ग्यारह से साढ़े बारह तक की छूट)
गम्भीर कार्यवाही की जाएगी और एसएचओ व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा - गर ज्यादा देर या पहले जलें तो
ये क्या हो गया ☺️☺️☺️
जस्टिस सीकरी वही है जिन्होंने 2017 में दिल्ली में पटाखों पर बैन लगा दिया था
चलो ट्रोल करो
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कई मित्रों को जानता हूँ जो झूठे आरोपों पर विश्वास कर विश्वासपात्र करीबी मित्रों को रास्ते से हटा देते है और ऐसे लोगों को गले लगा लेते है जो गले -गले तक घोषित रूप से पाप में डूबे है और बहुत स्पष्ट रूप से स्त्रियों के दोषी है, बल्कि ये दोषी उनके ही घर - परिवार या वृहत्तर समाज की स्त्रियों को सताते हुए पूरी बेशर्मी से छाती ठोंककर समाज मे ज़िंदा है और बड़ी शान , सम्मान और 'इज्जत' से जिंदा है
अफसोस कि हम ना इन्हें कुछ कह पाते है और ना उन्हें समझा पाते है - खैर
जो घर जाले आपना चलें हमारे साथ - एकला चलो रे - अपुन ने तो यह ठान ही लिया है
जब तक धकेगा तब धकायेंगें वरना वो कहते है ना हमें मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
हम तो निर्णय लेने के लिए खुल्ले और स्वतंत्र ही है जो मर्जी होगा करेंगें और अपना निर्णय भी ले ही लेंगें समय आने पर
दुख नही होता, अफसोस भी नही, कबीर याद आते है - कबीरा इस संसार में भांति भांति के लोग
बहुत मुश्किल है रे बाबा इस समाज को समझना और लोगों, मित्रों के बीच ज़िंदा रहना और क्या कहते है एडजस्ट करना
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जिस देश में सी बी आई भ्रष्ट होकर सड़क पर आ जाये उसका कुछ हो सकता है
पिछले 71 वर्षों में ना सेना ने अनुशासन तोड़ा , किसी जवान ने शिकायत नही की थी खाने की दाल में दाल नही, कफ़न खरीदी से लेकर भर्ती में शिकायतें नही आई, नियुक्ति में शिकायत नही, राफेल जैसा कांड नही, सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भक्तों का दोहरा चरित्र सामने आया
चलो कांग्रेस तो भ्रष्ट थी ही, पर अब सी बी आई में जो कुत्ता बिल्ली की लड़ाई हो रही है वैसा कमीशन का बंटवारा तो हमारे गांव के कोटवार और सरपंच के बीच नही होता, मतलब दो करोड़ की राशि कोई अकेला हड़प लें यह दो आय पी एस अफसरों को बर्दाश्त नही हो रहा - भला बताईये क्या पूरे कुएँ में भांग नही और गुजरात कैडर से आये ये अफसर अपनी पोस्टिंग की पॉटी किसके माथे मलना चाहते है
क्या हो रहा है, राष्ट्रपति को बोलना और उम्मीद करना बेवकूफी होगी मेरी - जो देश प्रमुख है वह राफेल पर नही बोला , जो दलित होकर दलित अत्याचार पर नहीं बोला तो अब इस कमीशनबाजी के खेल में अपने आकाओं को बोल दें - ये मजाल और फिर रबर स्टाम्प हमने ही तो बना और मान रखा हैं ना
आइये चार साल के सामने आ रहें हिसाब किताब और 2019 के मुहाने पर खड़े होकर जाती हुई सरकार की बन्दर बांट के मजे लें , अब यदि आंख के अंधें यहां आकर बचाव करें तो मान लीजिए कि इस सरकार की फेंकी हुई हड्डी को चूसकर बलिष्ठ हो रहें है ये भक्तगण
अभी तो सेना, पुलिस, पैरा फोर्सेस, ईडी , आई बी, रॉ, एन एस जी से लेकर गांव के कोटवारों की लड़ाई इस बहाने से सामने आना बाकी है मित्रों और जिस दिन निज सुरक्षा में लगें जेड सुरक्षा के जवान की गई डील्स की बात खोलेंगे तब देखियेगा कि कुत्ता लड़ाई कितनी नीच (मणिशंकर अय्यर से मुआफी सहित )हो जाएगी
शर्म मगर इनको आती नही हैं
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