Thursday, November 26, 2015

Posts of 26 Nov 15







योगेन्द्र यादव को शायद महाराणा प्रताप को लेकर लिखी कविता याद आ गयी होगी इसलिए वे कह रहे है कि बुन्देलखण्ड में लोग घास की रोटी खा रहे है, हाँ गरीबी बहुत है पर लोगों ने उसका रास्ता निकाल लिया है पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, हरपालपुर, महोबा जैसे छोटे शहरों से रोज 10-15 बसे दिल्ली जा रही है और लोग देश के दूरस्थ इलाकों में पलायन पर जा रहे है काम की तलाश में और काम करने. 
रोजगार ग्यारंटी योजना बुरी तरह से फेल हो गयी है खासकरके आदिवासी इलाकों में..बुन्देलखण्ड के गाँवों में जितना मै घूमा हूँ उतना तो योगेन्द्र यादव नहीं घूमे होंगे, हाँ किसी एनजीओ ने अपनी दूकान चलाकर अतिश्योक्ति वाले सर्वे उन्हें दे दिए हो तो बात अलग है..


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आमिर खान और किरण राव के चलते महिलाओं को लेकर जेंडर को लेकर पूर्वाग्रह से रचे बसे अभद्र कमेन्ट जो लोग कर रहे है उनमे से सात-आठ को अभी चलता किया. बदतमीजी की हद है और बहुत ही घटिया तरीके से सन्नी लियोन और किरण राव को लेकर चुटकुले और कमेन्ट कर रहे है. इसमे कुछ बुजुर्ग भी है जिनके मरने में मुश्किल से दो साल भी बचे नहीं होंगे पर गंदा दिमाग और हवस टपकती देखी जा सकती थी, इनके बेटे बहु भी पचास साठ के आसपास होंगे जो यहाँ छोड़कर चले गए ये निकम्मे लोग, और तीन वो लोग थे जो पिछले तीस बरसों से विदेश में बैठे है और हिन्दुस्तान में असहिष्णुता का रोना रो रहे है, कमबख्त देश छोड़कर चले गए और वहाँ रहकर भी छेद कर रहे है और देश की महिलाओं को लेकर अश्लील कमेन्ट कर रहे है.दो तीन यहाँ के मूर्ख है जो स्थानीय महाविद्यालयों में पढ़कर और तीन चार अभ्यास वर्ग में रहकर बुद्धिजीवी बनकर ज्ञान बाँट रहे है.........कमाल है मूर्ख लोगों की मानसिकता पर..........

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वैसे प्रतिभा पाटील का भी रिकॉर्ड था बाहर घूमने का
फिर गुजरातियों का तो मिजाज ही रंगीला है और हर गुजराती चाहता है कि उसके बच्चे बाहर जाकर बस जाए......... इसलिए यह सब स्वाभाविक है
और बाकी सब तो छोडिये मै क्या आप भी दिल से चाहते है कि एक बार तो ससुर अमेरिका होकर आ जाए और इस समय अमेरिका में वहाँ के खांटी देसी लोग कम दुनिया भर के मजदूर से लेकर बुद्धिजीवी काम कर रहे है हमारे अपने आसपास के गली मोहल्ले के छोरे छोरियां काम कर रहे है और आते समय आई फोन के डिब्बे ले आते है और हम लालायित रहते है लपक लेने को...........
किसकी बीबी ने नहीं कहा कि बाहर जाने की इच्छा नहीं है..........जरा एक बार पूछ लो फिर से फिर बोलना ....

Wednesday, November 25, 2015

Posts of 25 Nov 15

Where Mind is with fear... lead me to the dark...


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भला हो इन सारे भक्तों का और बाकी समझदारों का जिन्होंने सहिष्णु और असहिष्णु जैसे मूश्किल शब्द और Tolerance & Intolerence जैसे कठिन शब्द आम लोगों को सिखा दिए.
काश कि फिर से शब्दों की सुनामी आये और हम गंवार मूर्ख लोग जाहिल और अनपढ़ों से ऐसे ही कुछ अच्छे शब्द सीख जाएँ कम से कम अच्छे दिन ना सही अच्छे शब्द तो सीख ही जायेंगे पांच साल में
अब भौंकते हुए मत आना वाकई पोजिटिव सेन्स में कह रहा हूँ मितरो


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किरण और आमिर के बहाने जो लोग घटिया जोक्स बना रहे है उनके अंदर पितृ सत्ता कितनी कूट कूटकर भरी है यह भी साफ़ समझ आ रहा है, विश्वास ना हो तो जरा वाट्स अप और फेसबुक पर इन शैतानों के घटिया जोक्स देख लें। महिलाओं को बराबरी का कब मानेंगे हम ? और इसमें जेंडर के नाम पर रोटी खाने वाले और महिला हिंसा पर दहाड़े मारकर रोने वाले भांड, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल है।

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आर्यावर्त का नाम चायवाला देश रख दो

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झाबुआ में कैलाश विजयवर्गीय ने भाजपा को जीत (:P) दिलाई.......और व्यापमं में शिवराज के बाद मुख्यमंत्री ना बन पाने का बदला लिया .
याद है जब कांग्रेस हारी थी झाबुआ में तो दिग्विजय ने कहा था कि "जब कांग्रेस झाबुआ में हार गयी है तो मैंने हार मान ली है और वे भोपाल से चले गए थे"
अब माननीय शिवराज जी को क्या कहना है वैसे देवास में मिला सामंतवादी तोहफा उन्हें खुश कर सकता है, क्योकि गायत्री पवार निर्दलीय भी चुनाव लड़ती तो गुलाम मानसिकता के चलते जीत जाती, और देवास सीट तो भाजपा को थाली में रखे लड्डू की तरह मिली है और बगैर किसी प्रयास के पर झाबुआ में जहां सारे मंत्री और अफसरशाही ने जोर लगा दिया था वहाँ क्या हुआ मितरो ?
राजेन्द्र कास्वा को अभी भी छुपाकर रखो और शरण दो संघ की भाजपा की ताकि आने वाले समय में झाबुआ के पड़ोसी जिलों और समूचे मालवा में शिवराज जी का झांकी निकल सकें.
हालांकि ना देवास से फर्क पडेगा ना झाबुआ से, लोकसभा में मोदी जी का एक हाथ जरुर कट गया है, बिहार के बाद मप्र में राजनीती की चाल देखिये कि मोदी का जादू खत्म हो रहा है. याद रखिये देवास चुनाव में भाजपा की जीत कोई मायने नहीं रखती - जिस तरह से जय प्रकाश शास्त्री ने गायत्री पवार को मात्र तीस हजार से जीतने दिया वह आने वाले समय की पदचाप है कि सिंहासन खाली करो कि जनता आती है. कांग्रेस ने भी जीतकर क्या कर लिया होता साठ साल का इतिहास हमारे सामने है ही पर देवास को अपनी उपलब्धि बताना चुनाव की रणनीती वालों और सियासी पैरोकारों की निहायत ही मूर्खता भरी मानसिकता होगी.
ये चुनाव मप्र में बदलाव की बयार है और अब शिवराज जी को और उनकी भ्रष्ट ब्यूरोक्रेसी को सावधान हो जाना चाहिए कि क्या करना है और क्या किये जाने की जरुरत है. क़ानून व्यवस्था से लेकर मुआवजा, आत्महत्या, कुपोषण, महिला हिंसा और अपराध, सूखा, राहत और बाकी दीगर मुद्दों पर बचे हुए समय में ध्यान नहीं दिया तो अबकि बार ......कौनसी सरकार ?

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देवास का क्या हुआ विधायक कितने वोटों से जीती....? मुबारक देवासियों........सामंतवाद मुबारक हो.

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हिंदी में तथाकथित लेखक इतना आत्ममुग्ध क्यों है और एटीट्यूड क्यों दर्शाता है जबकि तमाम पुस्तक मेले और साहित्य उत्सव पीयूष मिश्रा जैसे भांड और मालिनी अवस्थी के ठुमको द्वारा ही भीड़ जुटाते है।

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सुरक्षित शहर की एक पहल कार्यक्रम के तहत इंदौर में 23 नवम्बर को Independent Commission For Aid Impact, London, UK, की टीम काम को देखने आई जिसमे कमिश्नर Tina Fahm, Gemma Daview, Peter Grant आये. इन लोगों की टीम के साथ DFID भारत की अरुंधती रॉय चौधरी और अनुवादिका अपराजिता भी थी.
पूरी टीम ने इंदौर में और प्रदेश के चार नगर निगमों के द्वारा महिला हिंसा रोकने के लिए किये जा रहे प्रयासों को देखा समझा और सराहा. इंदौर में महिलाओं के परपल समूह (छोटी कुम्हार खेडी ) के काम को गंभीरता से देखा जहां महिलाओं ने महिला हिंसा रोकने के साथ स्व सहायता समूह के कामों, आजीविका प्रशिक्षण और विभिन्न विभागों की योजनाओं के साथ तालमेल को होते देखा और कहा कि विश्व में यह अपनी तरह का कार्यक्रम है जो इतने बड़े स्तर पर एक साथ चार शहरों में नगरीय निकायों द्वारा किया जा रहा है. इस टीम ने स्थानीय गांधी हाल में युवाओं के लिए आयोजित युवा उत्सव में भी भाग लिया और युवाओं को सम्मानित किया. गांधी हाल में युवाओं ने रोटी बेलने, साड़ी पहनने जैसे काम करने की प्रतियोगिता हुई, और नाटक भी करके बताया. इस अवसर पर टीना ने महिला हिंसा से जुडी एक प्रदर्शनी का उदघाटन भी किया.
इस पूरे आयोजन में इंदौर की दो संस्थाओं -भारतीय ग्रामीण महिला संघ, पहल के कार्यकर्ताओं का बड़ा योगदान था. नगर निगम, इंदौर की ओर से रोहन सक्सेना (IAS), अतिरिक्त आयुक्त, देवेन्द्र सिंह चौहान (डिप्टी कमिश्नर) तकनीकी समूह की ओर से मनीषा शर्मा तेलंग, अस्मिता बासू, संदीप नाईक, वसीम इकबाल, हिमांशु शुक्ला उपस्थित थे. कार्यक्रम को सार्थक बनाने में उषा अग्रवाल, रीता मदान, तरुणा होलकर, आशय, प्रवीण गोखले, अनूपा, अंशुल, मेघा दुबे, लोकेन्द्र, अशोक, विनोद, आशीष, रजनी, सरिता, प्रीती, कीर्ति, रश्मि, राम, धर्मेन्द्र, आदि की भूमिका महत्वपूर्ण थी.
डेढ़ साल चले इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में गतिविधियाँ की गयी है और बेहद सीमित संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा लाभार्थियों को इसमे जोड़ा गया है. चार शहरों में महिला हिंसा को रोकने के प्रयासों को अब स्मार्ट सीटी परियोजना में भी समाहित किया जा रहा है साथ ही महिला सेफ्टी आडिट को स्थानीय शासन की इकाईयों में एक नियमित गतिविधि के रूप में जोड़ा जा रहा है, जो इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि है.









Monday, November 23, 2015

Posts of 23 Nov 15



आज किसी पानी की टँकी पर लिखा पढ़ा कि "हमारे नैतिक सिद्धांत ही हमारे धर्म है" बात कुछ कुछ सही लगी। ईमानदार, प्रतिबद्ध, सहयोग, सम्मान, स्नेह, सहिष्णु और अपने मूल्यों पर अडिग रहना इसमें जोड़ दे तो शायद धर्म की पूरी व्याख्या हो जायेगी और मेरे लिए जीवन दर्शन। 
आईये इस अधूरे क्रम को पूरा करने में मदद करें और मुझे धर्म सिखाये। कृपया किसी जाति सम्प्रदाय को थोपे नही बल्कि जो आप अपने वास्तविक जीवन में मानते हो और अपनाते हो उसी का जिक्र करें मैं खुले मन से स्वीकार करने को तैयार हूँ।

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ये फेस बुक के जनक मार्क भाई दो महीने छुट्टी पे जा रिये है और कारण बताया कि इन्हें बेटी होने वाली है और पूरी दुनिया उनके इस काम के लिए बधाई दे रही है......
अपुन को समझ नी आया कि अमेरिका में सेक्स डिटरमिनेशन का टेस्ट वैध है क्या, एने कि इनकूं कैसे मालूम पडा कि बेटी ही होगी दो माह बाद.......
क्या बराक चाचा ने सब जायज कर दिया है ?

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छी न्यूज ने अभी अश्वत्थामा के जीवित होने की कहानी बताई। यूँही यह चैनल सामने आ गया तो देखा कि क्या घटियापन है। रजत शर्मा से सीधा मुकाबला, अच्छा है आपस में लड़ भिड़कर खत्म हो जाएंगे। अब मक्का मदीना या अजमेर में मुहम्मद साहब के होने की कहानी का इंतज़ार है। 
कितने जाहिल है ये लोग और तुम इसी में काम कर रहे हो यार Vidya Nath Jha ???

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मने कि यूँही भक्तों को छेड़ने के लिए ये तस्वीरें मैंने घर पर फोटो शॉप से बना ली थी दस बरस पहले और क्या मालूम था कि एक दिन सच में ये हकीकत में बदल जायेगी.........
जय हो लेप टॉप बाबा की.........
भक्त जनों अब पलटवार मत करना देश प्रेम के सारे सबुत मौजूद है इसमे, और साबित हो गया कि जय हिन्दू राष्ट्र में देश के झंडे का नहीं भगवे का कितना महत्व है और अब क्या कहूं.......जब से साहेब को उलटा तांगा - कई संघियों ने भी व्यक्तिवाद से ऊपर उठकर, तो दिल को सुकून मिला.......
आओ..भडास निकालो और गलियाओ, आपको भडकाने को ही ये फिर से पोस्ट कर रहा हूँ यार जो एक लाख बार शेयर हो चुके है...

Saturday, November 21, 2015

Indore Literature Festival, Day - II Posts of 21 Nov 15


इंदौर साहित्य उत्सव - अवलोकन II - समय दोपहर 1.55
इंदौर साहित्य उत्सव से आज कई लेखक, साहित्यकार बगैर अन्दर घुसे लौटें .यह दुखद ही नहीं बल्कि क्षोभ का विषय है.

इंदौर साहित्य उत्सव - दिन दूसरा - अवलोकन पहला- समय सुबह 10.15 

बच्चे सबसे सॉफ्ट  टार्गेट होते है............

आज इंदौर साहित्य उत्सव में सुबह पीयूष मिश्रा की कल ना आ पाई और लोकार्पित किताब "कुछ इश्क किया कुछ काम किया" का शायद लोकार्पण ही हुआ और  लोग पहुंचे नहीं तो आयोजकों ने बच्चों को बुलाकर हाल आधा भर दिया और पीयूष मिश्रा पेलने लगे लम्बी लम्बी . 

बहुत ही विचित्र आदमी है और क्या आदमी है पता नहीं.  इंदौर में स्थानीय लोगों को नकार कर और आसपास देवास उजैन महू के लोगों को छोड़कर सीहोरे से पंकज सुबीर जैसे लोगों को कार्यक्रम के संचालन के लिए बुलाना आयोजको की समझ पर सवाल है. इंदौर में इतने लोग है, साहित्यकार है पर किसी का उपस्थित ना होना और घटिया किताबें वो भी रूपये लेकर छपने वाले अखबारों से हकाले गए लोगों का प्रकाशक बन जाने वाले लोगों का बोलबाला है. 

यह उत्सव एक बर्बादी के सिवा कुछ नहीं, बड़े बड़े टेंट और बड़ी व्यवस्थाएं मुंह चिढा रही है और उपस्थिति के नाम पर कुछ नहीं. और निमंत्रित भी ऐसे है जो हर जगह से खारिज है और आज उनकी कोई बखत  नहीं है.

मित्र सत्या पटेल ने अपनी वाल पर बड़े ही व्यंग्यात्मक स्वरुप में "पधारो सा" लिखा है जिसमे उन्होंने आयोजको की धज्जियां उडाई है और इसकी आयोजना में शामिल स्थानीय लोगों की समझ पर गजब के सवाल किया है.

बच्चों को जबरन मुर्गा बनाकर पीयूष मिश्रा जैसे आदमी के कार्यक्रम में बिठाने की सजा देना बेहद कष्टप्रद है. बच्चों को कम से माफ़ कर दें और उन्हें क्यों प्रेम - मोहब्बत और ब्रेक अप के किस्से  सुनाकर दिमाग में मवाद भर रहे है लोग. 

#इंदौरसाहित्यउत्सव

देशप्रेमी प्रधान सेवक..........मिलने और घूमने की जल्दी में झंडा उलटा है इसका ध्यान नहीं है.......
असल में संघ की प्राथमिकता राष्ट्रध्वज नहीं है ना इसलिए रंगों का क्रम ध्यान नहीं रहता बेचारे को........
और फिर इस देश के बाद अगले देश की योजना दिमाग में रहती है, हर बार हडबडाहट रहती है तो इन छोटी मोटी बातों पर कौन ध्यान दें. और फिर यह गलती तो साले हरामखोर अधिकारियों की है जो बदनाम करने पर लगे है इनकी छबि.......

जय हो जय हो......मै लाख ना चाहूँ कि बुरा ना बोलूँ, बुरा ना सोचूँ, बुरा ना कहूं, पर क्या करूँ रोज रोज ऐसी हरकतें बन्दा करता है कि भारतीय होने के नाते यह ध्यान आ ही जाता है और मुझे लिखना ही पड़ता है - सब कुछ सच में, खरी खरी..

मोदी फिर बाहर
ये देशप्रेमी है या पर्यटन के लिए प्रधान सेवक बना है
उफ़ बेशर्मी की हद है।

सन 1990 को विश्व साक्षरता वर्ष घोषित करने वालों को भारत में आकर देखना चाहिए कि यहां क्या असर हुआ सारे लोग फर्जी डिग्री लेकर पूरी बेशर्मी से भारत जैसे देश पर राज कर रहे है। जो देश नालन्दा से लेकर वेदों और ऋचाओं का जनक रहा वहाँ आज ठेठ अनपढ़ और XII भी पास नही लोग 80 प्रतिशत साक्षर आबादी को हांक रहे है और दुनियाभर में चिल्ला रहे है।
धिककार और बेशर्म नेतृत्व केंद्र से लेकर वार्ड और पंचायतों तक। 
इन्हें हकालो पढ़े लिखे लोगों आज इन्होंने छात्रवृत्ति बन्द की कल ये सांस लेना भी कर देंगे। जाहिल कही के !!!

बिहार में शपथ में नौ राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति क्या दर्शाती है कि अब सारे लोग लामबंद हो चले है और केंद्र के विरुद्ध बिगुल फूंक रहे है। आने वाले पांच चुनाव 2019 का भविष्य तय करेंगे। या ये सब अनपढ़ गंवार जाहिल सत्ता को समर्थन देने गए थे। स्मृति ईरानी से लेकर बिहार उप्र मप्र और देश के नेतृत्व से लेकर सरपंच तक सब अशिक्षित है। बन्द कर दो विवि और स्कूल कालेज। 
शर्म आती है कि हम लोग पढ़े लिखे है इर् स्मृति जैसे लोग और बिहार में पिल्लै हम पर राज करते है।

आज देवास को सामंतवाद से मुक्ति चाहिए यदि आज यह मुक्ति नहीं मिली तो देवास पुनः जातिवाद, सामंतवाद और काल के अंधेरी गुहा में समा जाएगा...........
देवास में विकल्प देखिये और सही व्यक्ति का चुनाव कीजिये....

भारत में विकास की रफ़्तार तेज है एक ओर दुनियाभर में हम भारत का डंका पीट रहे है, देश को विकास के सोपानों पर ले जा रहे है, देश की समस्याओं को हल करने की पुरजोर कोशिशें जारी है 125 करोड़ जनसंख्या को लेकर हमारी चिंताएं है पर दूसरी ओर हमारी व्यवस्था वही की वही है बल्कि हम सदियों पहले चले गए है. जिस देश में शिक्षा का स्तर बढ़ा है, आम लोग उच्च शिक्षित हो रहे है, वही हमारे नीतिकार, नेता और निर्णय करने वाले दिन पर दिन कम पढ़े लिखे और एकदम मूर्ख गंवार जैसे आ रहे है. यह प्रजातंत्र के घातक है और मै देख रहा हूँ कि एक अन्दर ही अन्दर क्रान्ति या व्यवस्था के विरुद्ध पढ़े लिखे लोगों का विरोधी स्वर बिगुल की भाँती बजने वाला है. केंद्र से लेकर राज्यों और जिले से लेकर पंचायतों में जो अनपढ़, मूर्ख गंवार और जाहिल प्रतिनिधि राज करने की मंशा से आ गए है वह सब कुछ बेहद अपमानजनक और शर्मनाक है. 

यह शिक्षा पर निरक्षरता की विजय है और शायद इसी दिन को देखने के लिए हमने मेहनत की, डिग्रियां हासिल की, बड़े बड़े शोध किये, बड़े बड़े संस्थान बनाए ताकि कम पढ़े लिखे और अपरिपक्व लोग केंद्र से लेकर स्थानीय वार्ड में हम पर शासन कर सकें और हम पढ़े लिखे लोगों को हांक सके. 

लगता है कि ना शिक्षा का महत्त्व है - ना ज्ञान का, बस एक मूर्खता की जिन्दगी जीना है और लठैत किस्म की जागरूकता चाहिए जो सारे काम प्रशासन से लेकर राजनीती में करवा पायें. 
हम मुश्किल दौर में फंसते जा रहे है मित्तरो................


Friday, November 20, 2015

इंदौर साहित्य उत्सव - प्रथम दिवस - Posts of 20 Nov 15


इंदौर साहित्य उत्सव को जयपुर साहित्य उत्सव बनाने की अनूठी जिद के कारण यह एक सफल प्रयास कहा तो जा सकता है परन्तु पहले दिन जो प्रतिसाद मिलना था वह नहीं मिला . सुबह उदघाटन के समय जब पहुंचा तो प्रभु जोशी के अलावा, हैलो हिन्दुस्तान के सम्पादक मालिक के अलावा बाउंसर और वालीन्टियर ही थे. वृष्ट प्रशासनिक अधिकारी और ख्यात लेखक मनोज श्रीवास्तव ठीक समय पर पहुंच गए थे फिर हमसे हाय हेलो करके कही चले गए. आबिद सूरती भी आ गए थोड़ी देर में संजय पटेल भी थे पर श्रोता नदारद थे. 

मै दिन में तो रुक नहीं पाया पर जब शाम ढले पहुंचा तो पाया कि लीलाधर मंडलोई जी कविता में रुपवाद पर व्याख्यान दे रहे थे, उत्पल बैनर्जी संचालन कर रहे थे और बाद में नरेश जी ने गिरना कविता पढी और फिर ताल ठोकते हुए दुःख सबको मांजता है जैसे कविता को पोडियम को तबले की तरह ठोककर कविता में शिल्प और सुर की बात की. बाद में महुआ माजी ने, निर्मला भुराडिया ने भी अपनी बात रखी. एक मराठी लेखिका और शरद पगारे जब बोल रहे थे तो उस पांडाल में चंद लोग ही बचे थे. यह बेहद शर्मनाक था. 


आबिद सूरती को पिछले हफ्ते ही लोगों ने स्टार प्लस पर अमिताभ के कार्यक्रम में सुना था इसलिए उनके पास भी भीड़ नजर नहीं आई सारा दिन वो यहाँ वहाँ घूमते नजर आये. मैंने बातचीत की तो वही पानी बचाने के टेप चालू थी, जो दर्जनों बार सुना चुके है जैसे अनुपम मिश्र एक स्लाईड शो सदियों से घिस रहे है. पर आबिद सूरती को देखकर कलागुरु स्व विष्णु चिंचालकर की याद आ गयी गुरूजी की काया भी ऐसी ही थी दुबली पतली और सहजपन लिए व्यक्तित्व. 



खैर दिल्ली से आये कमल प्रिथी ने भीष्म साहनी की कहानी "अभी तो मै जवान हूँ" पर आधारित एकल अभिनय "चकला"  प्रस्तुत किया जो बेहद खराब हो गया  आवाज ठीक ना होने के कारण.और कमल की प्रस्तुति भी कमजोर  थी. डेढ़ घंटे तक एक आदमी को अपरिपक्व अभिनय की स्थिति में झेल पाना मुश्किल है. 


अंत में पीयूष मिश्रा ने गुलाल के गाने "हे री दुनिया" से अपने कार्यक्रम की शुरुवात की. पीयूष ने अपने बेहद लोकप्रिय गाने जैसे सन्नाटा, एक बगल में चाँद होगा, घर और हुस्ना गाये. मुश्किल से दो सौ युवा और इंदौर के बुद्धिजीवियों के बीच हुए इस कार्यक्रम में पीयूष के तुकबंदी वाले और बेहद सरल - सहज गीतों ने थोड़ा आश्वस्त किया परन्तु  यह जरुर कहूंगा कि पीयूष एक रचनात्मक व्यक्ति है और  बहुत भटके हुए है उन्होंने मंच पर कहा कि वे सूडो सेक्युलर नहीं है, शराब ने उन्हें बर्बाद किया था और दूसरा बर्बाद उन्हें कम्युनिस्टों ने किया. पर आज वे सच्चे सेक्युलर है. समझ यह आया कि चंद घटिया शब्दों, प्यार मोहब्बत, ब्रेक अप और गालियों का इस्तेमाल करके आप लोकप्रिय बन सकते है खासकरके युवा पीढी के बीच - जो ना साहित्य जानती है, ना भाषा बस एक दिल के करीब जुमलों की भाषा को समझती है और पीयूष जैसे लोग इन्हें यह बेचकर अपनी निजी इमेज बनाते है. इतना कहूंगा कि इस आदमी से असहमत हुआ जा सकता है विचार, कविता, गीत - संगीत और राजनीती के स्तर पर इसे खारिज नहीं किया जा सकता.  


कार्यक्रम में लोगों के ना आने का कारण आमंत्रण पत्र का डर भी था, अब आज आयोजकों ने घोषणा की है कि कल चूँकि जावेद  अख्तर और शबाना आजमी का कार्यक्रम है इसलिए लोग ना आये तो थू थू होगी इसलिए आमंत्रण का डंडा हटा दिया है. दूसरा नईदुनिया, भास्कर जैसे बड़े अखबारों ने इसे कवरेज ही नहीं दिया क्योकि ऊपर हैलो हिन्दुस्तान का नाम लिखा था. 

#इंदौरसाहित्यउत्सव 

Thursday, November 19, 2015


265 साल पुरानी आत्माओं को छेड़ना घातक है भागवत जी।
जरा समझाइये अपने दंगा दक्ष सिपाहियों को।
आपको वल्लभ भाई पटेल मिल गए ना सबके जवाब में फिर अब क्यों इतिहास से मुर्दे उखाड़ रहे है। इससे क्या होगा।
गाय के मांस और गोबर का परिणाम देखा नही क्या 8 को।
दीवाली मनाओ, देश का दीवाला मत निकालो।

गाय, मांस, सम्प्रदाय और विकास के खोखले नारों के बाद पेश है नई विषाक्त करने वाली डिश
टीपू सुलतान
अरे ए बुड़बक, जरा देख और बता तो कहाँ है अब चुनाव !!!!

कम से कम भाजपा से तो ज्यादा वफादार है कुत्ता.

जब संस्कारित, वसुधैव कुटुम्बकम और जग सरमौर बनाने वाले लोग अपने पार्टी के लोगों को कुत्ता कहते है तो लगता है कि वे कुत्ता ना कहकर श्वान कह रहे है, और पूजे जाने के लिए तैयारी कर रहे है .........बस दिक्कत यह है कि शत्रुघ्न जी, जों राम के भाई है पुराणों में, इन महाशय को शुकर नहीं कहा.......
बहरहाल, बड़े सदमे के बाद कैलाश जी का दिमाग दुरुस्त नहीं रहता , हम मालवे वाले इसके गवाह है. कोई अमित शाह को बोलो कि इनके बाल बढ़वाकर इन्हें भजन गाने और जगराते करने और नाचने को कहें, जयकारे लगाने वाले मंच दे दें, क्या है ना नंदा नगर में इन्हें बचपन से देखा है मेरे एक सगे रिश्तेदार के मकान की दीवार और इनकी दीवार एक ही है, काकीजी की दूकान से बहुत चोकलेट लेकर खाई है नौ नंबर रोड से तो जानता हूँ कैलाश भिया को, या शिवराज जी फिर बुलाकर एक इन्वेस्टर्स मीट करवाने का ठेका दे दें ताकि "पूरी भरपाई" कर लें हार जीत की.......फिर कुत्ता, श्वान और शुकर सब भूल जायेंगे..

Happy Diwali to All of You, Your Family and Friends.
आप सभी को, परिजनों और मित्रों को दीपावली की शुभकामनाएं.
दिल से सभी गुबार मिटाकर और रंजो गम भूलकर सबकी तरक्की और विकास के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं.
बहुत स्नेह और दुआओं के साथ.


Posts of 19 Nov 15



"...अचानक मुझमें असंभव के लिए आकांक्षा जागी। अपना यह संसार काफी असहनीय है, इसलिए मुझे चंद्रमा, या खुशी चाहिए-कुछ ऐसा, जो वस्तुतः पागलपन-सा जान पड़े। मैं असंभव का संधान कर रहा हूँ...देखो, तर्क कहाँ ले जाता है-शक्ति अपनी सर्वोच्च सीमा तक, इच्छाशक्ति अपने अंतर छोर तक ! शक्ति तब तक संपूर्ण नहीं होती, जब तक अपनी काली नियति के सामने आत्मसमर्पण न कर दिया जाये। नहीं, अब वापसी नहीं हो सकती। मुझे आगे बढ़ते ही जाना है"

ना जाने क्यों मुझे कालिगुला, हर्ष और वे तमाम चरित्र याद आने लगे है जो "मुझे चाँद चाहिए" में वर्णित है..........

हर्ष की याद आना इस समय स्वाभाविक है और उसका अंत..........उफ़...........

Wednesday, November 18, 2015

Posts of 18 Nov 15



सलमान खुर्शीद और मणि शंकर अय्यर जो देश के खिलाफ और यहाँ के लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार के खिलाफ बाहर जाकर बोल रहे है वह गलत है. मोदीजी का वैचारिक विरोध अपनी जगह है, हम उनसे सहमत असहमत हो सकते है परन्तु इन दोनों को कोई हक नहीं बनता कि मूर्खों की तरह से पाकिस्तान जाकर देश विरोधी और प्रधानमंत्री के खिलाफ बयानबाजी करें वो भी बेहद आपत्तिजनक बयान देना. पकिस्तान में जो गरीबी, भूखमरी और अव्यवस्था है वह पहले सुधार लें फिर भारत से बेहतर रिश्तों की बात करें.
मणि शंकर अय्यर तो वैसे भी विदेश सेवा के अधिकारी रहे है, और उनकी इस नासमझी पर तरस आता है कि कैसे उजबकों की तरह से वे बात कर रहे है एक टीवी शो में, क्या वे कानूनों के बारे में, देश द्रोह के बारे में जानते नहीं है ???
इस तरह से कोई भी नेता देश से बाहर देश के खिलाफ और देश की चुनी हुई सरकार के खिलाफ बयानबाजी करता है तो उस पर कार्यवाही करके उसका पासपोर्ट जब्त कर लेना ही चाहिए और दिमाग ठीक होने तक नजरबन्द कर देना चाहिए.

News Concept 18 Nov 15 

Monday, November 16, 2015

Posts of 16 Nov 15



मुझे आप निगेटिव कहें या कुछ और, फर्क नहीं पड़ता पर मेरे सवाल है कोई ज्ञानी जवाब दे दें तो आभारी रहूंगा.......... सिर्फ थोड़े से सवाल है.....

1) गाय उर्फ़ बीफ उर्फ़ मांस के मुद्दे कहाँ गए और अब सब शांत क्यों है.? 

2) जम्मू कश्मीर से लेकर छग तक में आतंकवादी उर्फ़ नक्सलवादी उर्फ़ मिलिटेंट चुप क्यों है?

3) वो पंजाब हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा से लेकर तमाम बाबाओं के डेरों का क्या हुआ और जिन लोगों ने कई दिनों तक रोड जाम करके रखे और अपने परम आराध्य को गिरफ्तार नहीं होने दिया उस पर क्या कार्यवाही हुई? 

4) श्रीराम मंदिर का निर्माण कब होगा मै स्वयं जाकर कारसेवा भी करना चाहता हूँ और चन्दा देना चाहता हूँ पर निर्माण शुरू होने के बाद और दरवाजों की ऊँचाई होने के बाद .

5) धारा 370 का खात्मा कब होगी, क्या है शुगर और ब्लड प्रेशर की वजह से गर्मी बहुत होती है चाहता हूँ कि बुढापे में कश्मीर में एक छोटा सा मालिकाना प्लाट खरीदकर एक आशियाना बना लूं ताकि शान्ति से ठन्डे प्रदेश में रह सकूं. 

6) मप्र में व्यापमं में अब कोई आत्महत्या उर्फ़ मौत उर्फ़ ह्त्या क्यों नहीं हो रही, सी बी आई क्या कर रही है? 

7) मप्र के पेटलावद में हुए भयानक विस्फोट का मुख्य आरोपी राजेन्द्र कास्वा क्यों और किसकी शह पर गायब है और अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ और अभी के चुनावों में सभी बड़े नेता पेटलावद और आसपास रात्री निवास क्यों कर रहे है? 

8) माँ गंगा की सफाई का क्या हुआ, चाहता हूँ कि काशी नाथ सिंह की किताब असी का काशी को दुत्कारते हुए बनारस के घाटों पर जाकर एक बार गंगा में डूबकी लगाना चाहता हूँ ताकि मोदी जी और बाकी सबको दिए गए उलाहनों का पाप धुल जाएँ. 

ज़रा शांत होकर जवाब दें और जो लोग अपना दिमागी मवाद खाली करना चाहते है वे कृपया सुलभ का सहारा लें, यहाँ उल्टी ना करें.........

“अमित शाह की बात मान लें और राजनीती में उम्र निश्चित कर दें” Post of 16 Nov 15


भाजपा  के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने चित्रकूट में कल कहा कि राजनीती में साठ साल के बाद नेताओं को संन्यास लेकर समाज सेवा करना चाहिए, यह बात उन्होंने स्व नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित चित्रकूट में समाजसेवा के विभिन्न प्रकल्पों को देखकर कहा. स्व नानाजी देशमुख ने अपने आख़िरी दिनों में सक्रीय राजनीती छोड़कर चित्रकूट में बसकर आस पास के गाँवों में दीनदयाल सेवा प्रकोष्ठ के माध्यम से जन सेवा के कई काम आरम्भ किये, बाद में उनकी दत्तक पुत्री नंदिता पाठक और भरत पाठक ने उन कामों को आगे बढाया और आज चित्रकूट में लोगों के संगठित समूह है जो खेती में बदलाव से लेकर ग्रामीण रोजगार और कुटीर उद्योगों से आजीविका चलाने का बेहतरीन काम कर रहे है. यह नानाजी की ही सूझबूझ थी कि जीते जी उन्होंने चित्रकूट ग्रामोदय विश्व विद्यालय की स्थापना की और विभिन्न प्रकार के ग्राम विकास के खेती के, और आजीविका के विभिन्न प्रकल्प आरम्भ किये जिसके नतीजे आज सार्थक रूप से सामने दिख रहे है. इस स्थान को और उनके द्वारा स्थापित इन प्रकल्पों को निश्चित रूप से एक बार देखा जाना चाहिए खासकरके नेताओं को जो विधायक निधि और सांसद निधि का भी उपयोग सही नहीं कर पाते और अपने कार्यकाल में बदनाम होकर खत्म हो जाते है. अमित शाह की इस बात में सच में दम है कि भारत जैसे देश में जहां इस समय 55% युवा है विश्व में सबसे ज्यादा युवा आबादी वाला मुल्क है. जमीनी धरातल पर देखें तो हमारे युवा कई अवसरों से वे दूर है, खासकरके राजनीती से और निर्णयों से, तो इन युवाओं को मुख्य धारा में लाने और व्यापक स्तर पर इनकी भागीदारी बढाने के लिए बुजुर्ग राजनेताओं से देश को सच में मुक्ति लेना होगी. इस समय अगरचे हम देखे तो पायेंगे कि हर जगह पर हर पार्टी में और हर विचारधारा में बुजुर्गों का वर्चस्व है और वे इस कदर आसन जमाकर बैठे है कि पाँव कब्र में लटक गए पर ना पद का मोह छुट रहा ना काम कर पा रहे है. कांग्रेस से लेकर भाजपा, वामपंथी, जनता दल, समाजवादी, तृणमूल, बसपा, दक्षिण भारत की लगभग सभी पार्टियों में इस समय बुजुर्गों की सत्ता है. अकेली भाजपा में अटल बिहारी जी से लेकर मुरली मनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवानी से लेकर खुद नरेंद्र मोदी साठ के ऊपर है. 

कांग्रेस  में सोनिया भी साठ के ऊपर है. रामविलास पासवान से लेकर लालू, नितीश, प्रकाश करात और तमाम नेता जैसे जयललिता भी साठ के ऊपर ही है. अगर तरुणाई की बात करें तो हमारे सामने सचिन पायलट, राहुल गांधी, नवोदित लालू के सुपुत्रद्वय, अखिलेश, ममता, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे चंद नाम ही जेहन में उभरते है. निश्चित ही युवाओं के पास ताकत, जोश और हिम्मत है, वे रिस्क लेकर कडा संघर्ष करना भी जानते है और मेहनत भी कर सकते है, ये युवा इन बुजुर्गों से ज्यादा पढ़े लिखे है, ये युवा विभिन्न प्रकार की सूचना प्रौद्योगिकी में दक्ष एवं कुशल है जो आज चुनाव जीतने से लेकर बाजार में बेचने खरीदने काम आ रही है, और हाथों में अत्याधुनिक गजट घुमाते हुए हर काम इंटरनेट से करते है. मुझे लगता है कि आज की युवा पीढी के पास जो दुनियावी अनुभव है और संघर्ष करने का माद्दा है वह पहले की पीढी की तुलना में अधिक है और इनके पास एक्सपोजर भी ज्यादा है. अपने समय की समस्याओं को जानते है, समझते है और हल करने का जज्बा भी रखते है. ऐसे में वाकई यह समय की आवश्यकता है कि युवाओं को ज्यादा मौके दिए जाए.

हमारे  यहाँ लम्बे अवधि यह मांग समय समय पर उठती रही है कि जब नौकरी में रिटायर्डमेंट की समय सीमा निर्धारित है तो राजनीती में क्यों नहीं? गाहे बगाहे इस पर चर्चा भी हुई है परन्तु आज तक इस पर किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया क्योकि सरकार में ऐसे लोग थे जो खुद पदों पर आसीन थे लिहाजा वे अपने पैरों पर कुल्हाड़ी क्यों मारते. पूर्व प्रधान मंत्री स्व. राजीव गांधी से सहमति या असहमति हो सकती है परन्तु जिस तरह से उनके युवा नेतृत्व ने देश को नई शिक्षा नीती (1986), भूमंडलीकरण और वैश्विककरण, कम्प्युटरीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी, फाईबर ऑप्टिक्स के सहारे देश भर को एक संजाल से जोड़ने में सफलता दी, वह अदभुत थी. आज भी जहां भी युवा नेतृत्व है वहाँ तस्वीर दूसरी है. ठीक दूसरी ओर देश के अधिकाँश राज्यों में बुजुर्ग नेतृत्व वाले राज्य कुछ कर नहीं पा रहे है. भूख, भय, भ्रष्टाचार, कुपोषण और अपराध की स्थिति भयानक है और सरकारें यथास्थिति वाद में यकीन करके कुछ भी करने में अपने आपको अक्षम पा रही है.


अमित  शाह का यह सही सुझाव सही समय पर आया है, नरेद्र मोदी जी देश में बदलावों की बयार ला रहे है देश विदेश में लोकप्रिय हो रहे है तो अब उन्हें कम से कम अपने घर से यानी भाजपा से शुरू करना ही चाहिए जैसा कि शपथ लेते ही बुजुर्गों को मंत्री पदों से दूर कर दिया था , अब और बचा खुचा साफ़ करके एक आदर्श स्थापित करें ताकि बाकी सब भी अनुसरण करके युवाओं को मौका देंगे और देश में शायद इसी बहाने एक सौ पच्चीस करोड़ लोगों की अपेक्षाएं पूरी हो सके. 

Sunday, November 15, 2015

Posts of 15 Nov 15



कुछ पढ़े लिखें गंवार जबरन मेरी वाल पर चले आते है और नैतिकता की बात करते है । जो व्यक्तिगत जिंदगी में ईमानदार नही अपनी नोकरी में बेईमानी करके यहां वहाँ लोगों को मूर्ख बनाकर और घटिया किस्म के व्यंग्य लिखकर नाम और यश कमाने के लिए चापलूसी और बिछने को तैयार हो जाते हो और सच बोलने पर और आईना दिखाने पर बदतमीजी पर उत्तर आते है। घटिया को घटिया कहने पर सहन नही होता और अंत में अन्फ्रेंड करके कायरों की तरह से भाग जाते है, ऐसे लोगों से सावधान रहिये। ये इंसानियत के भेष में मूर्ख और कलंक है। जो लोग अपने काम की जगह पर सिवाय मक्कारी के सिवा कुछ नही करते और हमेशा रूपये कमाने की हवस में लगे रहते है और बेहद मूर्खतापूर्ण रवैया लोगों के प्रति रखते है और भाषा के नाम पर कुछ नही आता ना हिंदी ना अँग्रेजी , ऐसे निरक्षर लोगों से दूर रहें। ये वही लोग है जो ऊपर से नैतिक और अंदर व्याभिचार से भरें है। ये समाजवादी होने की रोटी खाते है पर है सब भयानक कट्टरपंथी और घोर जातिवादी संकीर्ण मानसिकता के टुच्चे लोग जो समय आने पर आपके चरण धोकर पी लेंगे। 

बचिए इन नाकारा लोगों से

(मनोज लिमये के लिए) 

Saturday, November 14, 2015

नर्मदा किनारे से बेचैनी की कथाओं पर अनुपम पाठक की टिप्पणी. 14 Nov 15


Anurag Pathak​, युवा कहानीकार और पाठक. 

आजकल संदीप नाईक का कहानी संग्रह “नर्मदा किनारे से बेचैनी की कथाएं” पढ़ रहा हूँ. चार कहानिया पढ़ ली है.  कहानिया जीवन का लेख है.  संदीप जी की यात्राओं और उन यात्राओं की त्रासदियों की अभिव्यक्ति हैं, ये सर्वथा अलग तरह की कहानियां है जो बहुत गहरे में उतरती है. इनका कहानी कहने का तरीका अत्यंत आत्मीय है एकदम अपना सा लगता है. पढ़ने पर जैसे हमारी अपनी ही कहानी है, मानो  हमारी अपनी यात्रा है हमारी अपनी ही व्यथा है. सतना, उत्कल एक्सप्रेस, हंसती हुई माधुरी दीक्षित पढी है  बहुत अच्छी है. दरअसल ये सब आत्मकथ्य हैं पर शायद जीवन घटनाओं और विचारो की दृष्टी से इतना व्यापक और संश्लिष्ट है कि संदीप जी का आत्मकथ्य "शेखर - एक जीवनी" जैसा महत् लेख बन जाता है. पता नहीं क्यों ये सारी कहानिया पढ़कर मुझे शेखर याद आ गया, वह भी इसी तरह अपने विचारों और कर्मों में इसी तरह भटकता रहा था और यह भटकना किसी सार्थक की खोज में था, आपका भटकना भी किसी सार्थक की खोज के लिए इन कहानियों में दिखता है. आपकी यात्रायें वस्तुतः अपने भीतर की यात्राएं ही है, शेखर भी तो अपने भय को जीतता है आपकी कहानियां - लगभग सभी, किसी भय को जीतने की कोशिश ही तो हैं. शुरु में मुझे भी कुछ ऐसा ही लगा था पर मैंने कुछ और कहानिया पढी तो उनकी वास्तविकता समझ आई. ये कहानिया एक ऐसे व्यक्ति के जीवन अनुभव है जिसने जीवन सामान्य न जीकर अलग तरह से जिया है, जो किसी खोज में निरन्तर है इसी खोज के रास्ते में माधुरी जैसी  बेचैन करने वाली कहानी मिलती है. मैं एक बात और कहना चाहता हूँ. आपकी सारी कहानियां एक करके एक उपन्यास बन सकता था - एक बेहतरीन उपन्यास, जिन्हें पूरा करने की अभी भी संभावना है. 
ये मेरे निजी विचार है, लोग असहमत हो सकते है, दूसरा मैं कोई मान्य आलोचक नहीं हूँ मेरी समझ सीमित हो सकती है, फिर ऐसा करते हैं कि मैं पूरी कहानियाँ पढ़ लूं फिर लिखूंगा. वो कहीं लगाना ठीक रहेगा. 

Posts of 14 Nov 15

अरविन्द केजरीवाल का यमुना को साफ़ करने का अभियान अच्छा लगा, सात महीनों में बहुत ठोस काम किया और करके दिखाया बनिस्बन केंद्र में उमा भारती के गंगा अभियान के जिसकी सिर्फ बकलोल ही हो रही है और केन्द्रीय मंत्री पता नहीं कहाँ गायब हो गयी, ना गंगा साफ़ हुई ना - हिसाब मिला अरबों रुपयों का.

बस #अरविन्द ने यमुना आरती का निर्णय क्यों लिया यह समझ नहीं आया. अफसोस हुआ कि अरविन्द ने धर्म की अफीम चटाकर लोगों को यमुना को पवित्र रखने का बहाना खोजा है. यह वैज्ञानिक चेतना को फैलाने वाले संविधानिक कर्तव्य के खिलाफ है. 

#अरविंदकेजरीवाल  के इस कदम की मै निंदा करता हूँ इसलिए भी कि धर्म निरपेक्ष राज्य में कोई भी राज्य इस प्रकार के खर्च सरकार की एकाउंट्स बुक में कैसे दर्ज कर सकता है ? या वैसे ही जैसे दिग्विजय मप्र में बोहरों के सैयदना को राज्य का अतिथि बनाते थे या अभी शिवराज ने राज्य प्रायोजित धर्म संसद इंदौर में आयोजित की.


बेहद गंदा खेल, खतरनाक इरादे और गलत नींव अवाम को जाहिल और गंवार रखने का. 

पढ़े लिखे और केंद्र सरकार के उच्च पदों पर आसीन लोग जब आंतकवाद से मरे लोगों के बारे में ओछे कमेन्ट करते है और बेशर्मी से डिलीट करने के बाद भी बार बार वही चित्र और कमेन्ट करके मुझे चिढाने का प्रयास करते है तो उनकी अक्ल पर, पढाई पर, उनके केंद्र सरकार के जिम्मेदार पद पर होने, जिम्मेदार पति और बाप होने पर और सबसे ज्यादा क़ानून के ज्ञाता होने पर तरस आता है और मै सिर्फ यही कहता हूँ और दुआ करता हूँ कि Get Well Soon............
तुम गंभीर बीमार हो मित्र, भक्ति में, मोदी के प्यार में और नफ़रत में पागल हो गए हो, तुम्हे लगता है कि हिदू राष्ट्र में सब पांच साल में ठीक हो जाएगा और तुम सारे विश्व के जग सर मौर हो जाओगे......ज़रा अपनी पार्टी के लोगों से तो लड़ लो जो इन दिनों बिहार चुनाव से बौखलाए हुए है और उलजुलूल बयान दे रहे है मीडिया पर.

थोड़े दिन घर पर आराम करो या कही और जाकर इलाज करवाकर आओ............और बार बार कहा कि जाहिल गंवारों की तरह टेग मत करो तो भी समझ नहीं आता, लोकतांत्रिक मूल्यों में यकीन करता हूँ और मानवता शेष है, खुले रूप से आलोचना को स्वीकार करता हूँ साथ ही सबके मतों को सम्मान देता हूँ, सीखता रहता हूँ पर तुम इसका गलत फ़ायदा उठाते हो क्योकि तुम्हारे में और एक मूर्ख व्यक्ति में कोई फर्क नहीं है मित्र.

तुम्हे सच में मानसिक बीमारी है - मुझे तुम्हारी बीबी, प्यारी से बच्ची और परिजनों पर, दफ्तर के स्टाफ पर तरस आता है कि कैसे झेलते होंगे तुम्हारे जैसे "सायकिक" आदमी (?) को. अब शायद ब्लाक करना शेष है, क़ानून की धाराएं गिनाने से ज्ञान नहीं आ जाता ............सुन रहे हो ना मित्र बाज आ जाओ.........अपने पागलपन में तुम अपना नुकसान कर रहे हो...........

यहाँ नाम टेग करूँ क्या.........? रहने दो मै तुम्हारे जैसा मूर्ख तो नहीं हूँ कम से कम..(प्रकल्प शर्मा, वकील  के लिए) 

फ्रांस का हमला सिर्फ दुखद ही नहीं वरन विकसित समाज, मानवता और समूची सभ्यता पर एक आत्मघाती कदम है जो आखिर में हमे हजारों साल पीछे ले जाता है. इस समय जब दुनिया आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की कोशिश कर रही है वही इस्लामिक आतंकवाद, कट्टरपंथ चाहे वो हिन्दू धर्म का हो या इसाईयत का या किसी अन्य धर्म का वह शर्मनाक है. आखिर निर्दोष लोगों की ह्त्या करके हम क्या दर्शाना चाहते है.
दुनियाभर के नेता जो रोज शान्ति आपसी एकजुटता और व्यापार बढाने को मिलते है क्यों नहीं इस पर कार्यवाही करते और कम से कम मुंह में राम बगल में छुरी की नीति छोड़कर सच में शान्ति की बात क्यों नहीं करते ? 

यह समय बहुत विचित्र समय है जब हमें संयमित होकर इन सभी शक्तियों को परास्त करने की है .

हमले में मारे गए सभी लोगों को नमन और इसकी पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए शान्ति की अपील.
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ओह ये क्या हो गया विनय । उफ़ जीवन इतना निष्ठुर है , विश्वास नही हो रहा।
ये वही बच्चा है जिसके लिए Binay Saurabh और गीता और सारे लोग संघर्ष कर रहे थे।
ये दीवाली नही है और अगर ईश्वर है तो क्या वह इतना निष्ठुर है कि चौदह साल के बच्चे को छीन लिया।
दुखी हूँ और निशब्द। हम सब साथ है विनय तुम्हारे और तुम्हारे लम्बे संघर्ष को सलाम करते है । निखिल हमेशा हमारे दिल में साथ है।

Red carpet is being prepared for Britishers. Once they came without permission, now Govt of India inviting them to exploit and open loot.
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जब जब आपने सहिष्णुता और स्वतंत्रता की बात की है तब तब कलबर्गी, दाभोलकर और पानसरे मरे है।
आज आप हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में जब भारत में बुद्ध और गांधी की बात कर रहे थे तब गिरीश कर्नाड को मारने की धमकी मिली है।
अर्थात शान्ति मतलब मौत ।
यही है नीति निर्देशक तत्व नई सरकार के ।
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भक्त कह रहे है कि किसी को आज तक हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में बोलने को नही मिला जबकि डा मन मोहन सिंह ने इसी हाउस में अंग्रेज़ों को गालियां दी थी इतनी हिम्मत थी उस पढ़े लिखें में । पर आज तो महामना अंग्रेजों की तारीफ़ ऐसे कर रहे थे मानो सात पुश्तों का कर्जा चुकाना हो और पूरे अंग्रेजी साहित्य को पढ़ा हो टी एस इलियट की दो रचनाएँ बता दें या जार्ज आरवेल की या स्ट्रीम ऑफ़ कांशसनेस के दो रचनाकार बता दें या वेस्ट मिनिस्टर ब्रिज किसने लिखी बता दें।
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देखिये गांधी, अम्बेडकर और नेहरू के तड़के से ही नैया पार होगी इंदिरा का नाम लेना भी मजबूरी है। 

गोलवलकर, हेडगेवार और दीन दयाल का नाम दुनिया नही जानती।

पहले तीन को घर में आप भले ही गाली दें और आख़िरी तीन को पूजे , पर बाहर तो भैया पहले तीन ही बिकेंगे क्योकि देश की स्वतन्त्रता से लेकर दृष्टि विकसित करने और अकादमिक काम करने जैसे संविधान बनाने में ये ही तीन थे ।
पहले तीन ने अंग्रेज़ों से लड़ाई भी लड़ी और बाँध बनाने से लेकर देश को शिक्षा से लेकर सब दिया जबकि आख़िरी तीन ने मुफ़्त की स्वतन्त्रता ली और विजन को नुकसान भी पहुंचाया और उनके इनके आपके भक्त आज भी टीपू और दादरी के नाम पर लड़ भिड़ रहे है और भले ही एक के बदले दस सर लाने की बात करें और जब अब आप बोलते हो तो टी वी पर सब हँसते है और कहते है चलो पांच साल कर लेने दो इसे भी। इसे सहिष्णुता कहते है समझ रहे है वह आपकी पालतू किरण के अनुपम की सहिष्णुता नही है यह।
आप तो तुअर दाल के भाव और प्याज की महंगाई के लिए जाने जाते हो देश में, बाबरी मस्जिद, गोधरा, गाय, दादरी, पुरस्कार वापसी, पूर्व सैनिकों के मेडल वापसी, लड़कियों की जासूसी करवाना, नेपाल के पतन और बिहारी हार के महाखलनायक है , तो क्यों आपको विश्व याद रखें मोदी जी ???
और फिर जहां पहले तीन भयानक विद्वान् है शोधार्थी है विश्व स्तर पर लिखी अनमोल किताबें खाते में है, विश्व की अंग्रेजी भाषा के प्रकांड पण्डित वही आपके और बाकी बचे तीनों के खाते में विश्व स्तरीय एक भी प्रकाशन नही, सब हिटलर मुसोलिनी और यहां वहाँ से कॉपी पेस्ट और भारत निर्मित नकली छाप है और आपके उच्चारण सुनकर छोटे बच्चे भी दांत निकालते है और आपका बिकाऊ मीडिया टेली प्रॉम्पटर पर पढ़ा कहता ही है और तमाम अंग्रेजी विदुषियों मुस्काती ही है।
छोडो ना देश है और अब विश्व बाजार में क्या शर्मो हया बस बेचना खरीदना और आप ताली बजाने और बजवाने में माहिर हो यह दो साल में सबने देख ही किया है तो बेचो, खाओ, और निवेश में छूट दो ताकि व्यापमं जैसे लोग देश में फले फूलें। आप जैसा कमजोर व्यक्ति शिवराज, निहालचंद्र या बद्तमीज सांसदों को करने बोलने से नही रोक सका तो देश का क्या भला होगा !!!
गंगा की सफाई और बुलेट ट्रेन के लिए थोड़ा रुपया मांग लेना कल, क्या ना देश भर के लोग अमेरिका और आस्ट्रेलिया से आये रुपयों में संडास बनवा लिए है और धड़ल्ले से उपयोग कर रहे है।
बस ये और बता दो कि वो मुंडे , हाँ हाँ - आपकी महाराष्ट्र की नेता और भष्ट मंत्री पंकजा मुंडे के पिता की मृत्यु की जांच का क्या हुआ??? आपने कहा था एक माह में रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगे दो साल हो गए शायद अब !!!
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साला मैं तो साहब बन गया !!!!

न्यूज लाइन 14 Nov 15 




Thursday, November 12, 2015

Posts of 12 Nov 15



संसार में सबको दुःख होता है 
और 
अपना दुःख सबसे बड़ा लगता है.

- रांगेय राघव
संज्ञा ने आज यह खूबसूरत चित्र भेंट किया............एक पोस्ट के बाद, तो सच में सुकून मिला. शुक्रिया Sangya Upadhyaya


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और वो तीन लोग जिन्हें कल मिस किया और अब जीवन भर करता रहूंगा शायद अब कोई त्यौहार मना ना पाऊं कभी भी इस जीवन में, मेरे लिए वैसे भी त्यौहार कभी त्यौहार रहे ही नहीं, पर अब तो सब ख़त्म हो गया है मानो और एक गहरा नाता अंधेरों और बियाबानों से जुड़ गया है. 
माँ, पिताजी और छोटा भाई, जिन्हें तिल- तिल मरते और अंत में खत्म होते देखा और अपने तई बचाने की भरसक कोशिश की पर बचा नही पाया और सारा जीवन एक अफ़सोस बनकर रह गया है....


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हमारे तीन दिए जिनसे रोशन है हमारा जहां और दो वो दिए जो तिमिर, तम, ताप और तृप्ति के प्रतीक है..........
सीखा यही और बच्चों के भी यही सिखाया कि जीवन में सुख मिले तो उसे खूब बांटो और फैलाओ और दुःख मिलें तो अपने अन्दर धंसा लो, अपनी जड़ों में डालो ताकि अपना अस्तित्व मजबूत हो ताकि जब जड़ें मजबूत होंगी तो सुख आयेगा और उसे फ़ैलाने से चहूँ ओर समृद्धि आयेगी.




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एक दूसरे से करते है प्यार हम, एक दूसरे के लिए बेकरार हम...................




Tuesday, November 10, 2015

Posts of 10 Nov 15


265 साल पुरानी आत्माओं को छेड़ना घातक है भागवत जी।
जरा समझाइये अपने दंगा दक्ष सिपाहियों को।
आपको वल्लभ भाई पटेल मिल गए ना सबके जवाब में फिर अब क्यों इतिहास से मुर्दे उखाड़ रहे है। इससे क्या होगा।

गाय के मांस और गोबर का परिणाम देखा नही क्या 8 को।
दीवाली मनाओ, देश का दीवाला मत निकालो।

गाय, मांस, सम्प्रदाय और विकास के खोखले नारों के बाद पेश है नई विषाक्त करने वाली डिश
टीपू सुलतान
अरे ए बुड़बक, जरा देख और बता तो कहाँ है अब चुनाव !!!!

कम से कम भाजपा से तो ज्यादा वफादार है कुत्ता.


जब संस्कारित, वसुधैव कुटुम्बकम और जग सरमौर बनाने वाले लोग अपने पार्टी के लोगों को कुत्ता कहते है तो लगता है कि वे कुत्ता ना कहकर श्वान कह रहे है, और पूजे जाने के लिए तैयारी कर रहे है .........बस दिक्कत यह है कि शत्रुघ्न जी, जों राम के भाई है पुराणों में, इन महाशय को शुकर नहीं कहा.......
बहरहाल, बड़े सदमे के बाद कैलाश जी का दिमाग दुरुस्त नहीं रहता , हम मालवे वाले इसके गवाह है. कोई अमित शाह को बोलो कि इनके बाल बढ़वाकर इन्हें भजन गाने और जगराते करने और नाचने को कहें, जयकारे लगाने वाले मंच दे दें, क्या है ना नंदा नगर में इन्हें बचपन से देखा है मेरे एक सगे रिश्तेदार के मकान की दीवार और इनकी दीवार एक ही है, काकीजी की दूकान से बहुत चोकलेट लेकर खाई है नौ नंबर रोड से तो जानता हूँ कैलाश भिया को, या शिवराज जी फिर बुलाकर एक इन्वेस्टर्स मीट करवाने का ठेका दे दें ताकि "पूरी भरपाई" कर लें हार जीत की.......फिर कुत्ता, श्वान और शुकर सब भूल जायेंगे..


Happy Diwali to All of You, Your Family and Friends.
आप सभी को, परिजनों और मित्रों को दीपावली की शुभकामनाएं.
दिल से सभी गुबार मिटाकर और रंजो गम भूलकर सबकी तरक्की और विकास के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं.
बहुत स्नेह और दुआओं के साथ.

शायद शत्रुघ्न सिन्हा नितीश लालू की जोड़ी में दत्तात्रेय की तीसरी मूर्ती बनने जा रहे है , क्या कहते है मितरो ????

News Compact 9 Nov 15 Umair Hashmi 

Posts of 10 Nov 15


265 साल पुरानी आत्माओं को छेड़ना घातक है भागवत जी।
जरा समझाइये अपने दंगा दक्ष सिपाहियों को।
आपको वल्लभ भाई पटेल मिल गए ना सबके जवाब में फिर अब क्यों इतिहास से मुर्दे उखाड़ रहे है। इससे क्या होगा।
गाय के मांस और गोबर का परिणाम देखा नही क्या 8 को।
दीवाली मनाओ, देश का दीवाला मत निकालो।

गाय, मांस, सम्प्रदाय और विकास के खोखले नारों के बाद पेश है नई विषाक्त करने वाली डिश
टीपू सुलतान
अरे ए बुड़बक, जरा देख और बता तो कहाँ है अब चुनाव !!!!

कम से कम भाजपा से तो ज्यादा वफादार है कुत्ता.

जब संस्कारित, वसुधैव कुटुम्बकम और जग सरमौर बनाने वाले लोग अपने पार्टी के लोगों को कुत्ता कहते है तो लगता है कि वे कुत्ता ना कहकर श्वान कह रहे है, और पूजे जाने के लिए तैयारी कर रहे है .........बस दिक्कत यह है कि शत्रुघ्न जी, जों राम के भाई है पुराणों में, इन महाशय को शुकर नहीं कहा.......
बहरहाल, बड़े सदमे के बाद कैलाश जी का दिमाग दुरुस्त नहीं रहता , हम मालवे वाले इसके गवाह है. कोई अमित शाह को बोलो कि इनके बाल बढ़वाकर इन्हें भजन गाने और जगराते करने और नाचने को कहें, जयकारे लगाने वाले मंच दे दें, क्या है ना नंदा नगर में इन्हें बचपन से देखा है मेरे एक सगे रिश्तेदार के मकान की दीवार और इनकी दीवार एक ही है, काकीजी की दूकान से बहुत चोकलेट लेकर खाई है नौ नंबर रोड से तो जानता हूँ कैलाश भिया को, या शिवराज जी फिर बुलाकर एक इन्वेस्टर्स मीट करवाने का ठेका दे दें ताकि "पूरी भरपाई" कर लें हार जीत की.......फिर कुत्ता, श्वान और शुकर सब भूल जायेंगे..

Happy Diwali to All of You, Your Family and Friends.
आप सभी को, परिजनों और मित्रों को दीपावली की शुभकामनाएं.
दिल से सभी गुबार मिटाकर और रंजो गम भूलकर सबकी तरक्की और विकास के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं.
बहुत स्नेह और दुआओं के साथ.

शायद शत्रुघ्न सिन्हा नितीश लालू की जोड़ी में दत्तात्रेय की तीसरी मूर्ती बनने जा रहे है , क्या कहते है मितरो ????