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Posts of 14 Nov 15

अरविन्द केजरीवाल का यमुना को साफ़ करने का अभियान अच्छा लगा, सात महीनों में बहुत ठोस काम किया और करके दिखाया बनिस्बन केंद्र में उमा भारती के गंगा अभियान के जिसकी सिर्फ बकलोल ही हो रही है और केन्द्रीय मंत्री पता नहीं कहाँ गायब हो गयी, ना गंगा साफ़ हुई ना - हिसाब मिला अरबों रुपयों का.

बस #अरविन्द ने यमुना आरती का निर्णय क्यों लिया यह समझ नहीं आया. अफसोस हुआ कि अरविन्द ने धर्म की अफीम चटाकर लोगों को यमुना को पवित्र रखने का बहाना खोजा है. यह वैज्ञानिक चेतना को फैलाने वाले संविधानिक कर्तव्य के खिलाफ है. 

#अरविंदकेजरीवाल  के इस कदम की मै निंदा करता हूँ इसलिए भी कि धर्म निरपेक्ष राज्य में कोई भी राज्य इस प्रकार के खर्च सरकार की एकाउंट्स बुक में कैसे दर्ज कर सकता है ? या वैसे ही जैसे दिग्विजय मप्र में बोहरों के सैयदना को राज्य का अतिथि बनाते थे या अभी शिवराज ने राज्य प्रायोजित धर्म संसद इंदौर में आयोजित की.


बेहद गंदा खेल, खतरनाक इरादे और गलत नींव अवाम को जाहिल और गंवार रखने का. 

पढ़े लिखे और केंद्र सरकार के उच्च पदों पर आसीन लोग जब आंतकवाद से मरे लोगों के बारे में ओछे कमेन्ट करते है और बेशर्मी से डिलीट करने के बाद भी बार बार वही चित्र और कमेन्ट करके मुझे चिढाने का प्रयास करते है तो उनकी अक्ल पर, पढाई पर, उनके केंद्र सरकार के जिम्मेदार पद पर होने, जिम्मेदार पति और बाप होने पर और सबसे ज्यादा क़ानून के ज्ञाता होने पर तरस आता है और मै सिर्फ यही कहता हूँ और दुआ करता हूँ कि Get Well Soon............
तुम गंभीर बीमार हो मित्र, भक्ति में, मोदी के प्यार में और नफ़रत में पागल हो गए हो, तुम्हे लगता है कि हिदू राष्ट्र में सब पांच साल में ठीक हो जाएगा और तुम सारे विश्व के जग सर मौर हो जाओगे......ज़रा अपनी पार्टी के लोगों से तो लड़ लो जो इन दिनों बिहार चुनाव से बौखलाए हुए है और उलजुलूल बयान दे रहे है मीडिया पर.

थोड़े दिन घर पर आराम करो या कही और जाकर इलाज करवाकर आओ............और बार बार कहा कि जाहिल गंवारों की तरह टेग मत करो तो भी समझ नहीं आता, लोकतांत्रिक मूल्यों में यकीन करता हूँ और मानवता शेष है, खुले रूप से आलोचना को स्वीकार करता हूँ साथ ही सबके मतों को सम्मान देता हूँ, सीखता रहता हूँ पर तुम इसका गलत फ़ायदा उठाते हो क्योकि तुम्हारे में और एक मूर्ख व्यक्ति में कोई फर्क नहीं है मित्र.

तुम्हे सच में मानसिक बीमारी है - मुझे तुम्हारी बीबी, प्यारी से बच्ची और परिजनों पर, दफ्तर के स्टाफ पर तरस आता है कि कैसे झेलते होंगे तुम्हारे जैसे "सायकिक" आदमी (?) को. अब शायद ब्लाक करना शेष है, क़ानून की धाराएं गिनाने से ज्ञान नहीं आ जाता ............सुन रहे हो ना मित्र बाज आ जाओ.........अपने पागलपन में तुम अपना नुकसान कर रहे हो...........

यहाँ नाम टेग करूँ क्या.........? रहने दो मै तुम्हारे जैसा मूर्ख तो नहीं हूँ कम से कम..(प्रकल्प शर्मा, वकील  के लिए) 

फ्रांस का हमला सिर्फ दुखद ही नहीं वरन विकसित समाज, मानवता और समूची सभ्यता पर एक आत्मघाती कदम है जो आखिर में हमे हजारों साल पीछे ले जाता है. इस समय जब दुनिया आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की कोशिश कर रही है वही इस्लामिक आतंकवाद, कट्टरपंथ चाहे वो हिन्दू धर्म का हो या इसाईयत का या किसी अन्य धर्म का वह शर्मनाक है. आखिर निर्दोष लोगों की ह्त्या करके हम क्या दर्शाना चाहते है.
दुनियाभर के नेता जो रोज शान्ति आपसी एकजुटता और व्यापार बढाने को मिलते है क्यों नहीं इस पर कार्यवाही करते और कम से कम मुंह में राम बगल में छुरी की नीति छोड़कर सच में शान्ति की बात क्यों नहीं करते ? 

यह समय बहुत विचित्र समय है जब हमें संयमित होकर इन सभी शक्तियों को परास्त करने की है .

हमले में मारे गए सभी लोगों को नमन और इसकी पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए शान्ति की अपील.
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ओह ये क्या हो गया विनय । उफ़ जीवन इतना निष्ठुर है , विश्वास नही हो रहा।
ये वही बच्चा है जिसके लिए Binay Saurabh और गीता और सारे लोग संघर्ष कर रहे थे।
ये दीवाली नही है और अगर ईश्वर है तो क्या वह इतना निष्ठुर है कि चौदह साल के बच्चे को छीन लिया।
दुखी हूँ और निशब्द। हम सब साथ है विनय तुम्हारे और तुम्हारे लम्बे संघर्ष को सलाम करते है । निखिल हमेशा हमारे दिल में साथ है।

Red carpet is being prepared for Britishers. Once they came without permission, now Govt of India inviting them to exploit and open loot.
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जब जब आपने सहिष्णुता और स्वतंत्रता की बात की है तब तब कलबर्गी, दाभोलकर और पानसरे मरे है।
आज आप हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में जब भारत में बुद्ध और गांधी की बात कर रहे थे तब गिरीश कर्नाड को मारने की धमकी मिली है।
अर्थात शान्ति मतलब मौत ।
यही है नीति निर्देशक तत्व नई सरकार के ।
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भक्त कह रहे है कि किसी को आज तक हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में बोलने को नही मिला जबकि डा मन मोहन सिंह ने इसी हाउस में अंग्रेज़ों को गालियां दी थी इतनी हिम्मत थी उस पढ़े लिखें में । पर आज तो महामना अंग्रेजों की तारीफ़ ऐसे कर रहे थे मानो सात पुश्तों का कर्जा चुकाना हो और पूरे अंग्रेजी साहित्य को पढ़ा हो टी एस इलियट की दो रचनाएँ बता दें या जार्ज आरवेल की या स्ट्रीम ऑफ़ कांशसनेस के दो रचनाकार बता दें या वेस्ट मिनिस्टर ब्रिज किसने लिखी बता दें।
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देखिये गांधी, अम्बेडकर और नेहरू के तड़के से ही नैया पार होगी इंदिरा का नाम लेना भी मजबूरी है। 

गोलवलकर, हेडगेवार और दीन दयाल का नाम दुनिया नही जानती।

पहले तीन को घर में आप भले ही गाली दें और आख़िरी तीन को पूजे , पर बाहर तो भैया पहले तीन ही बिकेंगे क्योकि देश की स्वतन्त्रता से लेकर दृष्टि विकसित करने और अकादमिक काम करने जैसे संविधान बनाने में ये ही तीन थे ।
पहले तीन ने अंग्रेज़ों से लड़ाई भी लड़ी और बाँध बनाने से लेकर देश को शिक्षा से लेकर सब दिया जबकि आख़िरी तीन ने मुफ़्त की स्वतन्त्रता ली और विजन को नुकसान भी पहुंचाया और उनके इनके आपके भक्त आज भी टीपू और दादरी के नाम पर लड़ भिड़ रहे है और भले ही एक के बदले दस सर लाने की बात करें और जब अब आप बोलते हो तो टी वी पर सब हँसते है और कहते है चलो पांच साल कर लेने दो इसे भी। इसे सहिष्णुता कहते है समझ रहे है वह आपकी पालतू किरण के अनुपम की सहिष्णुता नही है यह।
आप तो तुअर दाल के भाव और प्याज की महंगाई के लिए जाने जाते हो देश में, बाबरी मस्जिद, गोधरा, गाय, दादरी, पुरस्कार वापसी, पूर्व सैनिकों के मेडल वापसी, लड़कियों की जासूसी करवाना, नेपाल के पतन और बिहारी हार के महाखलनायक है , तो क्यों आपको विश्व याद रखें मोदी जी ???
और फिर जहां पहले तीन भयानक विद्वान् है शोधार्थी है विश्व स्तर पर लिखी अनमोल किताबें खाते में है, विश्व की अंग्रेजी भाषा के प्रकांड पण्डित वही आपके और बाकी बचे तीनों के खाते में विश्व स्तरीय एक भी प्रकाशन नही, सब हिटलर मुसोलिनी और यहां वहाँ से कॉपी पेस्ट और भारत निर्मित नकली छाप है और आपके उच्चारण सुनकर छोटे बच्चे भी दांत निकालते है और आपका बिकाऊ मीडिया टेली प्रॉम्पटर पर पढ़ा कहता ही है और तमाम अंग्रेजी विदुषियों मुस्काती ही है।
छोडो ना देश है और अब विश्व बाजार में क्या शर्मो हया बस बेचना खरीदना और आप ताली बजाने और बजवाने में माहिर हो यह दो साल में सबने देख ही किया है तो बेचो, खाओ, और निवेश में छूट दो ताकि व्यापमं जैसे लोग देश में फले फूलें। आप जैसा कमजोर व्यक्ति शिवराज, निहालचंद्र या बद्तमीज सांसदों को करने बोलने से नही रोक सका तो देश का क्या भला होगा !!!
गंगा की सफाई और बुलेट ट्रेन के लिए थोड़ा रुपया मांग लेना कल, क्या ना देश भर के लोग अमेरिका और आस्ट्रेलिया से आये रुपयों में संडास बनवा लिए है और धड़ल्ले से उपयोग कर रहे है।
बस ये और बता दो कि वो मुंडे , हाँ हाँ - आपकी महाराष्ट्र की नेता और भष्ट मंत्री पंकजा मुंडे के पिता की मृत्यु की जांच का क्या हुआ??? आपने कहा था एक माह में रिपोर्ट सार्वजनिक करेंगे दो साल हो गए शायद अब !!!
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साला मैं तो साहब बन गया !!!!

न्यूज लाइन 14 Nov 15 




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