कन्हैया का भाषण सुनकर याद आया कि कल ही संसद में परम पूज्य दुनिया के सबसे बड़े सर्वमान्य नेता, लोकतन्त्र के उपासक , काला धन के प्रणेता, भारतीय संस्कृति को जगसिरमौर बनाने वाले श्रीश्री 1008 नरेंद्र मोदी, माननीय प्रधान मंत्री, भारत सरकार, ने कहा था - कुछ लोगों की उम्र तो बढ़ती है, लेकिन समझ नही। स्वमूल्यांकन तो नही कर रहे थे - क्या कहते है अँग्रेजी में Introspection !!!! इति !!! ***** कन्हैया जो कह रहा है उस पर तार्किक बात करो उजबक, मूर्ख और संघी doctored रटी रटाई बातों पर कोसो मत मित्रों। और वो नेतागिरी कर रहा है तो यह ध्यान रहें कि सारा ठेका गली मोहल्ले में पड़े और कुंठित हो रहे टुच्चे लोगों ने नही ले रखा है, तुममे से कोई एक भी इस तरह का तार्किक भाषण दे दें, विस्मृति से लेकर महामात्य भी तो मान जाऊंगा। असल में सत्यमेव जयते को तुम लोगों ने अपनी "फादर प्रॉपर्टी" समझ लिया इसलिए कन्हैया का एक एक शब्द नश्तर की भाँती चुभ रहा है। मुझे द्रोपदी के शब्द याद आते है जो भीष्म के लिए थे कि नमक उनका खाया है ना तो सत्य के समर्थन में न्याय कैसे करोगे , तुम लोग तो कर्ण बन गए ...
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