Wednesday, March 27, 2019

Posts of 25 and 26 March 2019 Election Realities

अभी एक प्रतिष्ठित मित्र और जिम्मेदार कानूनविद को बाहर किया क्योकि वे कह रहे थे कि "आपको मराठी ब्राह्मण होने पर यह सब लिखते हुए शर्म आना चाहिए"
मैंने कहा कि मैं भारतवासी हूँ ना कि महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण, दूसरा तुम्हे किसने ठेका दिया कि प्रमाणपत्र बाँटो, तीसरा मोदी और उसकी आर्थिक नीतियों का विरोध करना और अम्बानी को देश सौंपकर आम लोगों को बर्बाद करने की निंदा करना कबसे शर्मनाक हो गया और अंत में ये होते कौन है मुझे सही गलत ठहराकर मेरी शर्म हया बताने वाले और सच तो यह है कि जितना नुकसान इस देश का ब्राह्मणवादियों ने किया मनुवाद की आड़ में उतना किसी ने नही किया
मोदी सरकार ने सबसे बड़ा नुकसान यह किया कि पढ़े लिखें लोगों को पंगु बना दिया , इन्हें नोटबन्दी, सेना का राजनैतिक और बेजा इस्तेमाल, जवानों से लेकर किसानों की हत्या / आत्महत्या, कश्मीरी पंडितों का दर्द, देश का अरबों रुपया लेकर भागे माल्या और मोदी गैंग, संविधानिक संस्थाओं का नाश, अदालतों का गिरता स्तर, बुलेट ट्रेन के हसीन सपने, बेरोजगारी और देशभर में मचा हाहाकार सुनाई नही देता - ये बकैतों का देश बन गया जहां एक आदमी विदेशी दौरों, सूट बूट और शूटिंग की नौटंकी में 5 साल बर्बाद कर क्या देकर जा रहा है सिर्फ संडास जिसने पानी भी नही है, अटल जी की सड़क योजना ठीक थी जो आज भी यादगार है
समझदार वकील, शिक्षक, डॉक्टर, प्राध्यापक, इंजीनियर से लेकर निष्पक्ष माने जाने वाले पत्रकार तक अपढ़, कुपढ़ और गंवारों जैसी बातें कर रहे हैं
यह देश का दुर्भाग्य ही है कि इन जाहिलों को पढ़ाने का खर्च सरकारों ने यानी जनता ने अपने रुपयों से दिया और ये लोग आज जहां भी है वहां भी जनता का हाथ है आम लोगों की कुर्बानियां है
जितना उच्च शिक्षित या समझदार हम जिसे मानते है वह इन चार सालों में ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत या विशुद्ध दलित बन गया और फायदे उठा रहा है बल्कि कुछ पढ़े लिखे गंवार प्रमाणपत्र बांट रहें हैं जबकि ये स्वयं लोगों के हक दिलवाने का धंधा करते है और चारसौ बीसी करके पेट भरते है अपना
मोदी सरकार का यह काम देश को बर्बादी के रास्ते पर ले जाने वाले और जिम्मेदारों को असंविधानिक कृत्यों को करने के उकसाने और मजबूत जातिवाद बनाने में खासकरके घटिया मनुवादी व्यवस्था की पुनरावृत्ति करने के लिए भी याद रखा जाएगा
कांग्रेस ने जिस जातिवाद को जिंदा रखकर भुनाया और कालांतर में सांप्रदायिक बनाकर जनमानस को मारने का सुलभ रास्ता फ़ासिस्ट वादियों के लिए खोला उसे मोदी सरकार ने और पुख्ता किया क्योकि मूर्खों और बौद्धिक जुगाली करने वाले भरे पेट लोगों का बड़ा वर्ग तैयार हो गया है बल्कि गए 5 वर्षों में ये निष्णात और पारंगत हो गए है
यह दुर्भाग्य ही है कि सभी महत्वपूर्ण जगहों पर सवर्ण मानसिकता के लोग है और उच्च जातियों के भी - जहां दलित है भी तो वे सांस्कृतिक संक्रमण में सरनेम सवर्ण लगाकर वही बोली बोल रहे है जो कौव्वे बोल रहे है
यह चुनाव ही नही एक लड़ाई है जो शिक्षितो की जाहिल और कुरुप मानसिकता के खिलाफ लड़ी जाना है और इसमें उन्हें पछाड़ना है जो दल बदल कर पाप धोने गटर में शामिल हुए जा रहें है - यह जया प्रदा जैसे लोगों को धिक्कारने का समय है जो सारे पाप करके अवसरवादी बन गई या जो कांग्रेस या अन्य दलों में शामिल हो रहें है
इन 5 सालों का मूल्यांकन जब भी होगा सिवाय कीचड़ गंदगी और बर्बादी के अलावा कुछ नही मिलेगा
और हम लोग कहेंगें एक था मोदी
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अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद को तिलमिलाते और बिलबिलाते देख मज़ा आ रहा है
जो भी हो 72000 का , मोदी ने कौनसे दे दिए 15 लाख , पर इस समय इनका जो ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है उससे किसी को अटैक ना आ जाएं
बापडों के सामने से सर्जिकल स्ट्राइक की परोसी हुई थाली खींच ली हो जैसे और सत्ता के ये भूखें - आह !!!
कमाल है कि संडास बाथरूम उज्ज्वला या 15 लाख कुछ काम नही आ रहा और ना ही अर्जी फर्जी देश प्रेम और सर्जिकल स्ट्राइक
एक बार सबूत बता देते या राफेल के भाव खुले आम बता देते तो देश को विश्वास होता पर अम्बानी अडानी के दबाव में जो गुप्त गंगा बहाई दो लोगों ने अब भुगतो
टिकिट वितरण में आंतरिक घमासान और बलि के बकरे बनते गडकरी, हेमा या गिरिराज को देखकर भी समझ आ रहा है कि हालात कितने विस्फोटक है
इधर रजत, सुधीर और अर्नब टाईप कुत्तों को लग रहा है कि अब रोटी दूध राहुल बाबा देंगे और ज़ेड श्रेणी के कम्फर्ट ज़ोन का क्या होगा निकम्मी औलादों को पदमश्री कैंसे मिलेंगी
मजेदार है - फिलिम देखने की जरूरत नी है भिया फिरि का मंजन हो रिया है - कसम से दस्त और बवासीर का यह चरम समय है और इनके आपसी भगन्दर भी बाहर आ रिये हेंगे
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ये भेजा फ्राई आरती को थोड़ी अक्ल दो भगवन
इतनी बड़ी पागल है और अभी तो एकदम ही पगला गई है
राहुल बाबा सामने होते तो रणचंडी उनकी छाती पर बैठकर गला दबा देती किसी स्क्रीजोफेनिक मरीज की भांति - गम्भीर न्यूरोटिक हो गई है आज पूरी भाजपा
Please get well soon team watchman
गजब की भर्ती है एक संबित है ही और एक ये अजब गजब
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रंग बरसे भीगे चुनरवाली 
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तुम 15 लाख का वादा करके पलट जाओ साला 5 साल बात मत करो - बाद में मोटा भाई कहें कि जुमला था - वह झुनझुना नही है क्या, 138 करोड़ को बेवकूफ समझ रखा है क्या बै
अबे ओ जेटली उर्फ घटिया वित्त मंत्री तेरे कारण हम सब बर्बाद हो गये
अब कोई कह रहा है कि मात्र 72000 देंगे सालाना तो तुम्हारी क्यों हालत पतली हो रही है
याद करो मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन से लेकर शिक्षा , स्वास्थ्य तक लोगों को फायदा देने का काम पूर्ववर्ती सरकार ने किया
बेटा जेटली तुम्हारी फर्जी सर्जीकल स्ट्राइक, अभिनंदन के ड्रामे और सबसे दुखद पुलवामा में 47 सैनिकों के मारे जाने का सबसे बड़ा दुख है पर सर्जिकल की फर्जी स्ट्राइक जिसके ना सबूत है ना आंकड़े आज तक उसके बदले राहुल का यह दांव कैसा रहा
मोदी जी सेना का दुरुपयोग चुनाव और राजनीति में मत करो वे देश के लिए काम करते है भाजपा, अम्बानी और आपकी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नही
मोटा भाई और लोकसेवक सारी अक्ल और प्लानिंग का ठेका तुमने ही नही लिया है
जिसको पप्पू कहते थे न आज उसकी वजह से सबको दस्त लगें है
आज बरनोल लगाओ री सखी
होली की रँग पंचमी पर गजब का रंग फेंका है और पूरी पार्टी बिलबिलाकर कीचड़ लेकर सड़क पर आ गई है , सब पगला गए है घटिया भाषा और गाली गलौज कर रहें है मतलब राष्ट्रीय नेता भी औकात पर आ गए
कसम से मजा आ गया - गब्बर सोएगा नही आज

Monday, March 25, 2019

Posts of III Week March Shrinidhi, Vidit and Khander , PHIA Foundation,

ये तरबूज, खरबूज, आम, शहतूत, रसीले रँग बिरंगी शरबत, कच्चे कैरी के पने, कैरी पुदीने की हरी कच्च चटनी, कच्ची मीठी इमली, बर्फ के गोले, लस्सी, मटका कुल्फ़ी और खूब ठंडी आईसक्रीम का मौसम है
बाजार सज रहें है , श्रीखंड खाने की चैत्र प्रतिपदा आ रही है गौरी पूजा के बाद चने की दाल को भीगोकर जो दाल बनाई जाती है पूजा में उसकी पदचाप ने मन पागल कर दिया है, सिर्फ चावल और खट्टी मीठी दाल या दही बड़े खाने को ही मन करें बजाय भारी गरिष्ठ भोजन के तो समझो आ गए दिन गर्मी के
शाम को घास और बगीचों की ओर रुख है और सूनी पटरियों के किनारों से डूबते सूरज को विदाई देने की बेला आ गई है छत पर पड़े हुए शीतलता को ओढ़ने की रात और भोर से आँख मलते सूरज की चुंधियाती रश्मि किरणों को हटाकर छाँव में भागने के दिन आ गए है
यह सब इसलिये कि सनद रहें गर्मियों में जितना क्षोभ, अवसाद, संताप और आलस है उतना ही मीठा, खट्टा और जीवन को वरदान देने वाले प्रलोभन भी है कि इन्हीं के सहारे गुजर जाएगा यह सब भी
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अब लेखकों को सामने आकर अपनी प्रतिबद्धता और विचारधारा भी दिखाना होगी, बहुत छुप लिए कविता, कहानी, आलोचना और उपन्यास के पीछे और सरकारी नौकरी की डुगडुगी भी बहुत बजा ली तुम सबने - अपनी नौकरी, बीबी, बच्चे और पद, सत्ता सम्हालकर रखों और समाज से क्रांति की अपेक्षा करों, कहां से लाते हो बै इतना प्यारा माल
दब्बू, कायर और गुलाम किस्म की मानसिकता और देर रात महिलाओं से वाटस एप पर चुहल करने के बजाय यहां आकर अपनी चाल ढाल और रँग रूप प्रदर्शित करें अन्यथा उजबक और बौड़म तो बहुत है दुनिया में और तुम भी उसमे शामिल हो जाओ एक नकारा और डरपोक कौम के हिस्से बनकर
फिर 23 मई के बाद विश्लेषण करते और बकर करते कोई दिखा ना तो सड़क पर जनता लाएगी और लगाएगी फांसी उल्टा करके - याद रखना
याद है ना "समय लिखेगा उनके भी अपराध" वाली पँक्ति
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पिछले माह एक संस्था में गया था कुछ फेलोशिप की बात करने, ये डूबती हुई संस्था थी जिसने "गरीबों में सबसे गरीबों" के साथ 10 साल काम करके संस्था को ही खा गए और अब किसी मुर्गे को बेवकूफ बनाकर अपनी सुख सुविधाएं बरकरार रखने के लिए दूसरों को जोखिम में डाल के यानी फेलोशिप बांटकर खुद ससुरे कम्फर्ट ज़ोन में ही रहना चाहते है - दिल्ली या भोपाल में - मक्कार कही के
उन लोगों ने विज्ञापन, लम्बा चौड़ा फॉर्म भरवाकर व्यक्तिगत रूप से बात करने बुलाया था , अरे जब सीनियर लोग नही पचते तो बुलाया क्यो , दो माह तक मेरे फॉर्म को पढ़कर समझ नही आया क्या कि 32 साल का अनुभव है , पर्याप्त पढ़ा लिखा हूँ और समझ भी ठीक ठाक है
फॉर्म में सारी जानकारी ले ली थी जो पूछी ना भी जानी थी, फिर पूरी प्रक्रिया से गुजरकर ही बुलाया था - क्यों भाई , अक्ल घास चरने गई थी क्या तुम सबकी , काम करने वाले चाहिए थे या तुम्हारी भड़ास झेलने वाले और उंगलियों पर नाचने वाले गुलाम
वहां जाने पर तीन चार पुराने सड़े गले सेवफल दिखें जो बदबू मारने लगे है अब, कुछ दिल्ली के कूड़ा घर थे जो हर कही नजर आ जाते हैं और हवाई यात्रा और मानदेय से ही ज़िंदगी चला रहे है
बात निकली तो पता चला कि ये कार्पोरेट्स का रुपया है, दलितों के साथ संविधान पर काम करवाना चाहते है और एक साल में रेडिकल चेंज कर लेना चाहते है , इस चयन समिति में कार्पोरेट्स के सरगना और गुलाम अजीम प्रेम का राज्य प्रमुख भी था और दो पुराने कामरेडी तत्व जो अब ठेठ पूंजीपति है, बाकी दो तीन जबरन की भीड़ थी कोरम पूर्ति के लिए
कहने लगें आप तो सीनियर हो, इससे क्या होगा राशि कम है, क्या रेडिकल बदलाव करेंगे और जब दलित मुद्दों की बात निकली तो कसम से इन लोगों की सांसें रुक गई और गंदी भाषा में कहूँ तो मुद्दे सुनकर नानी मर गई और ****** गले में आ गई
और जब बोला कि मैं काम कर रहा हूँ , साल के अंत में यह सम्भावित है तो सब चुप हो गए, कार्पोरेट्स के गुलाम और सवर्ण मानसिकता के इन पूंजीपतियों से क्या उत्थान की उम्मीद करेंगें
डेढ़ माह बाद रिग्रेट लेटर आया है कि बहुत मुश्किल है मेरे जैसों का चयन होना - अबे उल्लू के पठ्ठों , चूतियों तुम जैसे लोग जो जीवन भर टाटा बिड़ला और अब अजीम प्रेम का फेंका हुआ टुकड़ा खाकर नकली साम्यवाद की चाशनी में डूबे हो तो तुमसे क्या उम्मीद, तुम लोग साले दोस्ती के नाम पर भी कलंक हो और इंसान तो तुम हो ही नही, मुझे लगा था कि शायद तुममे कुछ मूल्य या तहजीब बची होगी पर तुम लोग तो और घटिया हो गए ज्यादा रुपया और ताकत पाकर - शर्मनाक
भोपाल के बीचोबीच दस बीस साल में टाटा बिड़ला से लेकर दुनियाभर के कार्पोरेट्स और ससुरालजन की संपत्ति हड़पकर बंगले बना लिए, गाड़ियां खड़ी कर ली और दलितों और गरीबों के भले के नाम पर ज्ञान का रायता फैला रहे हो और दलित उत्थान की बात करते हो तुमसे यही उम्मीद थी क्योंकि तुममें से 2,3 के साथ तो लंबे समय काम किया है इसलिए तुम्हारी ब्यूरोक्रेटिक सामंतवादी प्रवृत्तियों से वाकिफ हूँ भली भांति, तुम्हारी औकात दो कौड़ी की है यदि अभी लिख दिया ना कुछ ज्ञात अज्ञात सम्पत्ति के बारे में तो सब खुले आम नंगे हो जाओगे
अब ये बताओ कि जो किराया देने का वादा किया था वो डेढ़ माह भी नही दे पाएं हो अभी तक , उस टेबल पर 6 लोगों के लिए जो खाना रखा और बाद में फेंका गया होगा या हवाई यात्रा देकर भोपाल के थ्री स्टार में जिन लोगों को रोका गया था 3- 4 दिन उनसे तो हम गरीबों का किराया खर्च 1% ही होगा लगभग, दस बार फोन भी कर दिया और कह दिया पर बेशर्मों को फर्क नही पड़ता कोई
एनजीओ से बड़ा रुपया दबाने वाला कोई नही इनके प्राधिकारी, सीएजी से अपने को बड़ा मानने वाला एवं फर्जी काम को सही करने वाला भ्रष्ट अकाउंटेंट और हस्ताक्षर कर्ताओं से बड़ा लफ्फाज कोई नही , एक छोटी सी राशि को दबाकर बैठ जाते है
ख़ैर, कुल मिलाकर बात यह है कि कार्पोरेट्स के दल्ले और पूंजीपति अंदर जॉकी ऊपर से खादी के झब्बे पहनकर विदेशी सिगार उड़ाते हुए बकर करते है और साम्यवादी होने का ढोंग कर सुविधाएं भकोसते है
सावधान रहिये इन बकैतों से चुतियाओं और शिक्षित हरामखोरों का गिरोह है ये
किसी को नाम पते जानना समझना हो तो सम्पर्क करें निज तौर पर
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म. गा. मेडिकल कॉलेज, सेवाग्राम, वर्धा, महाराष्ट्र के तीन युवा डाक्टर जो अब पढ़ाई कर सेवा - सह - प्रैक्टिस के लिए मैदान में उतर रहे है
अभी अभी एम बी बी एस पूरा किया है जोश, जज़्बे और हिम्मत से भरे हुए ये युवा डाक्टर गज्जब के डाक्टर है जो शहीद अस्पताल, छग से लेकर मेलघाट और गनियारी तक घूम आएँ है और कम्युनिटी मेडिसिन के साथ अपना हुनर दिखाने को अब तैयार हैं, इंटर्नशिप के लिए दूरस्थ आदिवासी इलाकों के अस्पतालों में जा रहें है
इसके पहले कल देवास में घर पर मिलने आये मुझसे और हम सबने लम्बी बात की और देवास के आकर्षण टेकड़ी पर हम घूमें
विदित इंदौर से, श्रीनिधि पूना से और मोहम्मद खांडेर त्रिचनापल्ली से है
फेसबुक ने दुनिया के बेहतरीन लोग दिए है तोहफ़े में, इन तीनों से गत वर्ष विनोबा आश्रम, पवनार में मुलाकात हुई थी मात्र 20 मिनिट और हम मित्र बन गए थे, मैंने कहा था कि ये पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने आना, और ये भी इतनी दूर मिलने आये - कौतुक हुआ मुझे - कितने संवेदनशील लोग होते है - शुक्रिया बच्चों
बहुत सुकूनभरा दिन बीता, ख़ुश रहो प्यारे और होनहार बच्चों - स्वास्थ्य का क्षेत्र बहुत अच्छा भी है और गंदा भी, बस अपनी अच्छाई बनाएं रखों, खूब सीखो और फिर पीजी करने जाओ
देवास में जल्दी आने का वादा याद रखना

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एक शहर में जब सूने आसमान में चाँद शबाब पर आता है तो जीवन को रिक्त कर जाता है
अपने शहर की सबसे ऊंची जगह से चाँद को कुछ यूं कैद किया तो जमीन से आसमान तक सब कुछ बुझ गया
खामोश रहकर जज्ब करता रहा और रात हो गई - पुकारता रहा पर सदा ना आई
जीवन लुनेटिक हो गया हो मानो !

Wednesday, March 20, 2019

Posts of March I and II week

मप्र से लेकर पूरे देश में निर्वाचित चौकीदारों की फ़ौज अपने निकम्मे, नकारा और नालायक वंशजो को चौकीदारी का टिकिट दिलवाने के लिये एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहें है
और तो भारतीय संस्कृति का अपयश फ़ैलाने वाले कुटैव , वैमनस्य, साप्रदायिकता फ़ैलाने के शिरोमणि और कूटने में माहिर अराजनीतिक संगठन, जो मन भाये मुंडी हिलाएं वाली मुद्रा में रहते है, भी अब सत्ता ठगिनी के झांसे में आकर कुर्ता पाजामा पहनने को बेताब है
मजेदार यह कि पिछले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी इन्हीं के वंशज हारे थे बुरी तरह
और सरगना और तड़ी पार कहता है कि वंशवाद कांग्रेस की बपौती है
अक्ल से पैदल इन बहुरूपिये सत्ता के लिए हवस की कामना में जीनेवाले चायवाले, पकौडे वाले और चौकीदारों से सावधान - जागते रहो
31 को 500 जगह भोंपू लगाकर फिर कर्कश स्वर सुनने और सुनने के बाद उपेक्षा करने को तैयार रहें , अब कन्फर्म है -
"क्योकि चौकीदार ही चोर है"
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मनोहर पर्रिकर का निधन
नमन और श्रद्धाजंलि, एक सुयोग्य नेता, दृष्टि सम्पन्न मुख्य मंत्री का ना होना अखरेगा
उनकी मृत्यु के साथ राफेल की वो सारी दास्तानें भी खत्म हो गई है जो एक राज़ थी और राज ही रहेगी और अब सरकार जाने के बाद सब कुछ दफ़न हो जाएगा
इतना सहज व्यक्तित्व और ईमानदाराना कोशिशें सिर्फ एक प्रतिबद्ध मनोहर पर्रिकर के साथ ही सम्भव था
वे सच में इस भ्रष्टतम समय में एक दृष्टा, मिशनरी और जमीनी आदमी थे
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जस्टिस काटजू के मरीजों
तुमको अभी भी समझ नहीं आया हिंदू राष्ट्र का क्या स्वरुप इन दो चौकीदारों ने कर दिया है, हिन्दू राष्ट्र का यही मुखौटा है नोटबन्दी, 15 लाख, राम मंदिर, 370, कश्मीर , सेना का उपयोग, पाकिस्तान और चीन के सामने घुटने टेकना, अम्बानी अडानी को देश बेचना, माल्या और मोदियों को सेफ पैसेज देना , देश को कंगाल कर उद्योगपतियों को तेल लगाना - गजब का राष्ट्र है
प्रधानमंत्री जैसे गरिमामयी पद को चौकीदार कहकर ट्वीटराना - काम के बदले 24 घँटे राहुल और कांग्रेस को कोसना और अब जब सब इकठ्ठे हो रहे है तो मिलावट बताना , अबे अपनी तो देख लें पहले क्या औकात रह गई हर कोई मजाक बना रहा
अपनी ही पार्टी के स्वामीभक्तों ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया इतनी दुर्गति कर दी इसने दीनदयाल से लेकर नानाजी देशमुख और अटल जी , आडवाणी तक की ; अपढ़ कुपढ़ लोगों को चुनोगे तो यही हाल होगा , अपनी बवासीर के बारे में बोलो समझो और इलाज करवाओ गधों
नेहरू की धूल नही चाट सकते तुम्हारी समझ क्या है , साक्षी महाराज से लेकर एम जे अकबर और बलात्कारी निहालचंद्र का साथ लेकर क्या तुम दुनिया जीत लोगे गज्जब की बकैती करते हो बे
झूठ, फरेब, मक्कारी, जुमले और सत्यानाश - क्या यही हिंदू राष्ट्र है और अगर तुम्हें अभी भी समझ नहीं आया है तो और वोट दो और इनको जिताओ तुम्हारी औलादों को रोटी पानी के लिए ना तड़पा दिया तो नाम बदल देना मेरा
अभी तो चाय, पकौड़ा और चौकीदारी पर लाकर देश को छोड़ा है - कल तुम ने जीता दिया तो तुम्हें क्या कर के छोडेंगे यह मत भूलना
जो अपनी पार्टी और घर वाली का ना हो सके - उसका क्या भरोसा
जोर से बोलो चौकीदार ही चोर है
हमारे देवास का सांसद तो बीच में ही भाग गया कार्यकाल पूरा होने के पहले , नवम्बर से सांसद विहीन क्षेत्र है, आगर के तत्कालीन विधायक से लड़ बैठा था अब खुद विधायक बन गया और देवास के मूर्ख सामंतवाद में डूबे गुलाम अभी भी भाजपा को जिताने के मूड में है- मूर्खों को अक्ल ही नही पैदल है पैदल
नोट - भक्तजन नोट कर लें अब मोदी प्रधानमंत्री नही महज एक उम्मीदवार है और कार्यवाहक प्रधान मंत्री, 23 मई - भाजपा गई , इसलिए ज्यादा भसड़ ना मचाये यहां - औकात में रहें
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कल इंदौर में जलेस के एक कार्यक्रम में एक वक्ता ने प्रायोजक को भयानक तेल लगाते हुए कहा कि इनसे मेरी मुलाकात "जब इमरजेंसी लगी थी और भोपाल से मैं वीडियो कोच बस में आ रहा था, तब हुई थी"
सारा हाल सन्न रह गया सुनकर, अरे ओ मोदी के ताऊ , ऊंचे वाले फेंकू - कमबख्त किसके बाप दादाओं ने वीडियो कोच सुना था तब , कोई बताएगा मय सबूत के कि इंदौर भोपाल वीडियो बसें चलती थी तब, इस ताऊ को झेलते रहें साहित्य में कई लोग पर कल तो क्या बोल गया, पल्ले नी पड़ी, खैर सबको बेवकूफ समझकर अहम ब्रह्मास्मि दूजो ना भवो तो पहले ही इसपर हावी है
सत्तर पार के बकैत है ये अब
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यह फर्क होता है गंवार, अनपढ़, कुपढ़ , फ़र्जी, घमंडी और उच्च शिक्षित में, वो दस साल में बोले ही नही काम करते रहें और ये उनकी ही नीतियों एवं कामों को अपना बताबता कर बकैती करते रहें इतनी कि कूड़ा कचरा किताबों में आने लगा, पूरी दुनिया को ध्वनि प्रदूषण से ग्रस्त कर दिया और अब चीन से लेकर अमेरिका तक को समझ आ गया कि बकवास के अलावा कुछ नही और जनता को भी ये बन्दा पूरा मगज का लड्डू है, खोदा पहाड़ निकली चुहिया - वो भी मरी हुई
एक संविधानिक पद को ट्वीटर पर चौकीदार का प्रत्यय लगाकर पूरी दुनिया के सामने देश की भद्द पीटवा दी
देखा देखी सारे 40 अलीबाबा की गैंग के लोग भी कहने लगे चौकीदार चौकीदार
जियो राहुल जियो, शाबाश बच्चे इतिहास याद रखेगा तुम्हे इस बात के लिए कि देश की सम्पदा को लेकर भागने वाले चोट्टों की फौज चोर मोदियों , माल्याओं और अम्बानियों और अडानियों के साथ मोदी सरकार के आखिरी दिनों में तुमने पूरी सरकार और पार्टी को कन्फेस करने को मजबूर कर दिया
और अंत मे यह सही है कि इनमें ना राज करने की अक़्ल है ना देश सम्हालने की ना मैनेज करने की चुनाव सामने देखकर पगला गए है , दिमाग काम नही कर रहा, पंकजा मुंडे से लेकर अन्य सभी चौकीदार शब्द कहकर अपनी संविधानिक जिम्मेदारी, ताकत और पद का अर्थ नही बुझ पा रहें निहायत ही अपढ़ और गंवार है
भरोसा नही कि अर्नब, रजत और सुधीर भी खुद को चौकीदार कहें आज से क्योकि ये तो वही के नाला सोपारा से जिंदा है
फिलहाल यह सत्य है कि चौकीदार से लेकर सब जो इस दलदल और ट्वीटराई भीड़ में शामिल है "चोर" है
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दुर्भाग्य कि चौकीदारों की बिरादरी में पंकजा मुंडे भी शामिल , अपने बाप की हत्या/ मौत भूल गई !
ये लोग शब्दों का भी पतन करेंगें 
अब तो एकदम कन्फर्म चौकीदार ही चोर है

गर्व से कहो हम चोरों के चौकीदार के देश में रहते है, हम सब चोर है , धूर्त है लफ्फाज है , मूर्ख है 
क्योकि चौकीदार चोर है

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अपने आसपास देखता हूँ तो बहुत से निरर्थक लोग नज़र आते है - सम्भवतः वो भी मुझे यूँही कोसते हो पर अब लगता है इन बिल्ली के *** को निकाल बाहर करें सिर्फ फेसबुक से, फोन लिस्ट और वाट्सएप से नही बल्कि जीवन से - जब कभी दो चार साल में इनके फोन आये तो सीधा जवाब दो "रांग नम्बर" और बगैर कुछ और बोलें काट दो फोन और ब्लॉक कर दो ससुरों को - जीवन का बहुत नाश किया इन कमीनों ने
ये लोग ना कभी मिलेंगें , ना ही काम आयेंगें कुछ और ना ही मैं मिलने वाला - ना इनके किसी काम का; नौकरी में जहाँ जहाँ भी रहा मेरे घर आकर खूब खा पीकर गए - मुर्गा, मटन, दारू , पनीर से लेकर ड्रायफ्रूट्स तक , अब जब से देवास आया हूँ 5 सालों से तब भी यहां आकर खूब भकोसे साले, और जब बोला कि दस रुपये की एक गोली लेते आना क्योकि शहर में कई बार मिलती नही तो अपने आपको दिवालिया घोषित करवा बैठे ससुरे - इनकी असली औकात अगर बताना शुरू करूँ तो आप सुनकर दंग रह जाएंगे, दिल करता है सबके नाम और कर्म सार्वजनिक कर दूं यहां - ताकि बाकी लोग सावधान हो जाये इन नामुरादों से
एक बार बनारस में एक घटिया लड़की से बड़ी दोस्ती हुई थी दादा दादा बोलती थी विदुषी और यहां के 3 दोस्तों के हवाले से खूब ज्ञान पेलती थी, नख़रे पट्टे कर अपने घटिया थोबड़े को सजाकर यहां फोटू चस्पा करती थी, ताकि मुर्गे फंसते रहें, कॉपी पेस्ट मटेरियल का अपने नाम से प्रयोग कर बस नोबल लेने वाली थी कि हम पहुंच गए, वहां जाकर औकात मालूम पड़ी बनारस हिन्दू विवि में कि यह चंपा अपने निजी जीवन मे कईयों को निपटाकर जमाने को छलती आई है - तब फोन किया तो 5 दिन तक बहाने बनाती रही , आखिर लौटकर जब सच्चाई फेसबुक पर नामजद लिखी तो ब्लॉक करके भाग गई छमिया - कसम से आज भी मेरा नाम लेकर रोज चौराहों पर नींबू मिर्च फेंकती होगी, बनारस के पानी में ही फर्जीवाड़ा और मक्कारी है
उसके बाद दो चार और ज्ञानी मिलें अपने बदसूरत चेहरे और हकलाते हुए जो यहां ज्ञानी बनते है - असली जीवन में निरक्षर निकले , जिस काम यूँ करवा देने की डींग हाँकते थे - साला खुद के पैंट का नाड़ा नही सम्हल रहा था और नाक से सेबड़ा नही पूछ रहा था - तो क्या कहूँ, बड़ा मज़ा आता है कोई फेंकू मिलता है जीवन में तो
ऐसे ही दिल्ली पुस्तक मेले में दिल्ली के दोस्तों की औकात समझ आती है - इनको भी खूब छेड़ा और गलियाया है - साले दो कौड़ी का काम करके गलियों में टुन्न पड़े रहते है और दिखाते ऐसे है जैसे मुगल गार्डन में बाप का कॉपी राइट है इनका
आज फिर दो ऐसे ही नगीने मिल गए - जमके छिल कर सारा बुखार उतार दिया झटके में , भर फागुन में सरेआम लू उतार दी कमबख्तों की - अब ज़्यादा चूं चपड़ नही करेंगे
पांडिचेरी के उस ऑटो वाले की बात कल से दिमाग में कौंध रही है - "जो मेरे काम का नई - वो किसी काम का नई"
***
एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन अपने गधे को घर की छत पर ले गए जब नीचे उतारने लगे तो गधा नीचे उतर ही नहीं रहा था ।
बहुत कोशिश के बाद भी जब नाकाम हुए तो ख़ुद ही नीचे उतर गए और गधे के नीचे उतरने का इंतज़ार करने लगे ।
कुछ देर गुज़र जाने के बाद मुल्ला नसरुद्दीन ने महसूस किया कि गधा छत को लातों से तोड़ने को कोशिश कर रहा है मुल्ला नसरुद्दीन बहुत परेशान हुए कि छत तो नाज़ुक है इतनी मज़बूत नहीं कि गधे की लातों को बर्दाश्त कर सके दोबारा ऊपर भागे और गधे को नीचे लाने की कोशिश की लेकिन गधा अपनी ज़िद पर अटका हुआ था और छत को तोड़ने में लगा हुआ था ।
मुल्ला आख़िरी कोशिश करते हुए उसे धक्के देकर नीचे लाने की कोशिश करते रहे गधे ने मुल्ला को लात मारी और वह नीचे गिर गए। गधा फिर छत को तोड़ने लगा आख़िरकार छत टूट गयी और गधे समेत ज़मीन पर आ गिरी ।
मुल्ला काफी देर तक इस वाक़ये पर ग़ौर करते रहे और फिर ख़ुद से कहा कि कभी भी गधे को ऊँचे मकाम पर नहीं ले जाना चाहिये एक तो वह ख़ुद का नुकसान करता है, दूसरा ख़ुद उस जगह को भी ख़राब करता है और तीसरा ऊपर ले जाने वाले को भी नुक़सान पहुँचाता है ।
सौजन्य - वाट्स विवि [ गुजराती भाषा विभाग की प्रमुख डॉ Praxali Desai ]

Saturday, March 9, 2019

Posts of 7 and 8 March 2019

ओ और औ की मात्रा में बहुत कन्फ्यूजन होता था बचपन से - मास्टरों ने कुछ सिखाया नही
फिर 2014 में श्रद्धेय मोदी जी की सरकार बनी, पहले स्मृति बैन और फिर जावड़ेकर मंत्री बनें और इनके प्रयासों ने "चो और चौ" का अंतर प्रयोग कर सीखाया सबको, मैंने भी प्रयोग किया और सीखा , पूरे देश ने किया तो अब मेरी हिंदी की वर्तनी इन दो मात्राओं के मामले में सुधर गई
अगली बार 2050 तक इन्हें ही वोट दें ताकि सारे स्वर सीख सब लोग सीख जाएं
आप भी बोलकर देखिये चौ और चो - चौपट राजा और चोरों का सरताज , चोट्टा और चौर्यकर्म , चौतरफ और चोरी और सीनाजोरी आदि
अभ्यास करो-
ऐसे जोड़ीदार शब्द अपनी भाषा से खोजकर दस बार लिखो, चलो शुरू हो जाओ
शाबाश सीखते रहिये , आगे बढिये, बढाईये
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कुछ भी बोलो उसके कानों पर जूं नही रेंगती
सांसद ने विधायक को जूता मारा
समझो जूं में अनुस्वार है और जूते वाले जू में नही
अभ्यास करो
जूं नही पड़ी पाँच सालों में और चार सेकेंड में सात जूते जैसे उदाहरण अपनी भाषा मे खोजो
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भोत नुकसान हो गया
कश्मीर, पुलवामा, बालाकोट, लखनऊ से लेकर राफेल दस्तावेजों की चोरी
केदारनाथ, बनारस, बद्री, जगन्नाथ, सब कर लिया - सुप्रीम कोर्ट सीबीआई सब सेट कर लिया ,अम्बानी ,अडानी, रामदेव, जग्गी, अग्गी, रविशंकर, प्रेमशंकर, माल्या,नीरव , जीरव सब करके देख लिया
सेना से लेकर मैना सब कर लिया पर कुछ हो नी रियाँ हेगा, सब मणिशंकर बोलते मुझको और सुसु स्वामी भी इडर दिख नी रियाँ -कां करूँ
मोटा भाई , भोत घबराहट हो री हेगी
कुछ समझ नी आ रियाँ , ये सारी जनता तो पागल है , साली फिर से पूछ री कि कितने आदमी थे, राफेल चोरी पे के रई कि चौ ही चो है
टैंम नी बचा है , कुछ करो भिया थेपला खाओ, फाफड़े लाओ, उनदिया बनाओ, ढोकले बांटो पर कुछ ना कुछ होना चईये
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