Saturday, October 29, 2011

देवास के चुतियापे

जब अन्ना का नाम भी नहीं था इस देवास में, तब से कुछ लोग झोले उठाये शहर की फिजा बदलने चले थे एक खातेगांव से आया था ग्यारहवी फेल होकर, एक संघ से दीक्षित होकर, दो इश्क के मारे थे, एक घर से भागकर, एक लंबी चौड़ी पढाई करके, एक पंडिताई छोडके बाकी यही के थे बेरोजगार और भडभूंजे और फ़िर बढ़िया दूकान बनी थी जो सब करती थी ज्ञान विज्ञान से लेकर भजन-पूजन, देवास के लोग इनको चुतिया कहते थे कि ये लोग कहा छोटे शहर में कार्ल मार्क्स की बात करते है हेली के धूमकेतु की कहानी सुनाते है और जिले भर के मास्टरों की जमात जो साली होती ही हरामखोर और ट्यूशनबाज के भरोसे समाज में क्रान्ति लायेंगे पर एक बात तो थी ये चूतिये बात अक्ल की करते थे और पढ़े लिखे चूतिये इनकी बिरादरी में जाते और दरी उठाने का काम जरूर करते थे बाद में सब तो यहाँ वहा निकल गए और कुछ यही बस गए और जो इन्हें कुछ भी कहते थे वो आज चूतिये बने है और उस समय के चूतिये आज खा रहे है देश विदेश की मलाई और ना जाने क्या क्या, शहर तो नहीं बदला पर चुतियाई के अंदाज बदल गए है वामपंथियों के हौसले देश् भर में भजन पूजन से बुलंद हो चले है इसको कहते है असली चुतियापे. (देवास के चुतियापे)

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