Sunday, October 9, 2011

मन की गाँठे

लौटना तो होता ही है सभी को आज या कल अभी या थोड़ी देर बाद......बस लौटना ही सब कुछ होता है चाहे यहाँ हो या वहाँ...........शाम हो या भुनसार में, हम सब लौट ही जाते है अपने आज से, अपने वर्तमान से, अपने आप से भागकर नहीं पर अपने आप में विलीन हो जाने के लिए, हम लौट जाते है और खो जाते है उन सब पलों को जीना चाहते है उन शहरों की उन गलियों में उन दोस्तों के साथ बैठकर याद करना चाहते है, अपने आप से भागकर सबसे दूर हो जाते है........में लौट आया हूँ इसलिए नहीं कि कुछ था नहीं या कही और नहीं जा सकता था पर अब तुमसे दूर रहकर ही तुम्हारे पास रह पाता हूँ इसलिए लौट आया हूँ हमेशा के लिए बस अब पुकार लो, बुला लो, कह दो कि आ जाओ एक बार, कह दो कि बस ठहर जाओ, वरना फ़िर लौट जाउंगा ना आने के लिए फ़िर कभी लौटूंगा नहीं और बस वही चिरनिद्रा में विलीन हो जाउंगा तुम्हारे लिए तुम्हारी यादो के साथ हमेशा के लिए(मन की गाँठे)

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