Saturday, October 29, 2011

देवास के चुतियापे

ये देवास के उस बड़े स्कूल की कहानी थी जहा केन्द्रीय सरकार के बच्चे पढते थे इस स्कूल के प्राचार्य जो पुरे बुन्देलखंडी थे और ऊपर से कवि, शहर के वामपंथी से हुई दोस्ती ने स्कूल को सुलभ शौचालय बना दिया किसी भी पब्लिक प्रोग्राम में वो स्कूल का सामान उठा लाते और फ़िर अपने गाने सुनाते, घर से बिगड़े नवाब की उसी स्कूल की मास्टरनियो और चपरासिनो ने वो झाड़ू से पीटा था कि शहर छोड़कर भाग गए पर फ़िर भी आते रहे अपनी कमर टूटने तक. उनके गीत उस वामपंथी ने छापे और शहर के भांडो से खूब गवाए......एक दूर बसी कालोनी में शिक्षा के इस पेशेवर चरित्र की बड़ी कहानिया है, बीबी ने भगा दिया आख़िरी दिनों में दोनों बेटियों ने वो हालत की कि मियाँ कही के नहीं रहे बुढापे में सडते रहे पर देवास आना जाना छूटा नहीं, शिक्षा का कीड़ा एड्स के मानिंद था और महिलाओं से दोस्ती की सनातन इच्छाएं बरकरार अभी भी है....... और शहर के पढ़े लिखे लोग उसे चुतिया कहते थे...(देवास के चुतियापे)

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