Friday, October 28, 2011

देवास के चुतियापे

शहर के चारों ओर फ़ैली हुई बिल्डिंगे, तालाब, बड़े मैदान, राजे रजवाडो की कब्रे, सुने टाकीज और अंगरेजी फिल्मो के चटकीले पोस्टरों से अटा पड़ा बाजार बस इसी सबके बीच कई लडकिया जवान हुई और भागी मुसलमानों, सिंधियो और मील मवाली मजदूरों के साथ- ये शहर के हिन्दू ठेकेदार बताते है अब इनका कौन बताए कि इंदौर मुम्बई या नागदे से लाकर इन्होने क्या क्या पाप नहीं किये, क्या गलत सलत धंधे नहीं किये, ड्रग्स नहीं बेचे या लडकियो की दलाली नहीं की. ये शहर के नाम पर ठेकेदारों की जो फौज पैदा हो गयी है आजकल और दिनभर मुह काला करके रात को परिवार के साथ लायंस या रोटरी क्लबों के "इवेंट" करते है उन्हें कौन बताए कि सालो, नालायको इसे मालवी में चुतियापा कहते है पर कुछ भी हो ये चुतियापे है बड़े प्यारे......(देवास के चुतियापे)

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