Friday, October 28, 2011

देवास के चुतियापे

दीपावली के चार दिन कब कैसे गुजर रहे है पता ही नहीं चल रहा ....आज पूरा दिन देवास के भडभुन्जो के साथ रहा, भाट और चारणों की परम्परा के वाहक ये लोग कुछ करते नहीं बस विशुद्ध बकवास, मुफ्त की हरामखोरी, शहर में फ़ोकट की हवाबाजी, दादागिरी जिसे मालवी में चुतियापा कहते है बस ऐसे ही ये दोस्तों के नाम पर कलंक और फ़िर भी प्यारे सारे शहर भर के लफडो की पुख्ता जानकारी रखने वाले ये भडभुन्जे बस चने सेकते रहते है और मर्द होने के दावे करते है......पर फ़िर भी सब मिलाकर ये मेरे लोग थे और हमेशा रहेंगे प्यारे. इनकी बकवास भी प्यारी लगती है ना, क्या करू सारे समझदारी के बाद भी इनका चुतियापा अच्छा लगता है.....(देवास के चुतियापे )

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