Friday, October 21, 2011

एक अभिनेता के लिए सबसे अहम चीज होती है स्क्रिप्‍ट

मंजरी (रवीना टंडन) – ‘इतनी ही भड़ास निकालनी थी तो जान से क्यूं नहीं मार देते बच्चू यादव को?’

समर प्रताप सिंह (मनोज वाजपेयी) – ‘क्यूंकि डरते हैं हम। आज जिंदगी में पहली बार डर लगा है हमें। हम जाके गोली मार देंगे, चढ़ जाएंगे फांसी। हमको मरने से डर नहीं लगता है, लेकिन डरते हैं आपके लिए। साला गधा थे, जो पुलिस में आये और आके शादी कर ली। अगर आप हमारी जिंदगी में नहीं होतीं न मंजरी जी, तो वो साला भड़वा बच्चू यादव आज 10 फुट जमीन के नीचे गड़ा होता।’
किसी फिल्म (शूल) का मुख्य किरदार (मनोज वाजपेयी) आपसे कहे कि फला किरदार (समर प्रताप सिंह) को निभाते समय अवसाद के कारण मुझे मनोचिकित्सक के पास जाना पड़ा, तो आप कैसा महसूस करेंगे? सबसे पहले हमारा ध्यान उस किरदार की तरफ जाएगा और फिल्म के संवाद हमारे जेहन में कौंधने लगते हैं। जहनी तौर पर मैं ‘शूल’ के एक ...

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