Saturday, October 1, 2011

जाने अब तुझसे मुलाकात कभी हो के न हो ,

फिर वही शाम वही गम वही तन्हाई है दिल को समझाने तेरी याद चली आई है ......
फिर तसुवर तेरे पहलु मे बिठा जाएगा फिर गया वक़्त घडी भर को पलट आएगा ,
दिल बहल जायेगा आखिर को तो सौदाई है ........
जाने अब तुझसे मुलाकात कभी हो के न हो ,
जो अधूरी रही वो बात कभी हो के न हो , मेरी मंजिल तेरी मंजिल से बिछड़ आई है ....
फिर वही शाम वही गम .......

No comments: