एक अकेली छतरी में जब
आधे आधे भीग रहे थे
आधे गीले आधे सूखे, सूखा तो मैं ले आई
गीला मन शायद बिस्तर के पास पड़ा हो..
.................. Gulzar
आधे आधे भीग रहे थे
आधे गीले आधे सूखे, सूखा तो मैं ले आई
गीला मन शायद बिस्तर के पास पड़ा हो..
.................. Gulzar
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