Thursday, January 5, 2012

(जिंदगी के प्रवचन - अपनो से दुखी होकर......)

हम सब संसार में किसी प्रयोजन के लिए आये थे और बड़ी मुश्किल से मानव जन्म मिला- ऐसा सयाने लोग कहते है, थे और कहते रहेंगे, पर मेरे हिसाब से संसार में हम सिर्फ एक- दूसरे को छलने, कपट करने, बैर निभाने और द्वेष फैलाने के लिए ही अवतरित हुए है. यह अलग बात है कि हमने अपने हथियारों को अलग-अलग तरीकों से पैना किया है और सबको प्रकृति ने मौके उपलब्ध नहीं कराये है कि एक साथ एक- दूसरे पर जम से वार कर दे, अन्यथा सब कुछ नष्ट हो जाता.... बस कुछ और तो नही पर अब ये अवसर जुगाड लों और धुन डालो सबको, छोडो मत किसी को - अपने हो या पराये, मानते हो या जानते हो, भावनात्मक हो या तर्कातीत, सबको निचोड़ लों, अपने स्वार्थ की खातिर किसी को मत बख्शो और फ़िर साले दो कौड़ी के उन लोगो की इज्जत ही क्या है अपने जीवन में- जिसने प्यार किया और सब कुछ सौप दिया-अपना जीवन भार, भावनाएं और भुत-भविष्य, उसकी क्या परवाह करना......बींध दो दिल के तार ऐसे कि फ़िर किसी को सहलाने लायक ना रहे........बचो, बचो, बचो ऐसे लोगो से जो प्यार, समर्पण और जिंदगी की बातें करते हो और जीवन साथ बिताने के सब्जबाग दिखाते हो.....

(जिंदगी के प्रवचन - अपनो से दुखी होकर......)

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