Wednesday, January 18, 2012

‎"कुछ रिश्ते ऊपर से दिखाई नहीं देते।"



उन्होंने कहा...मुझे कभी-कभी डर लगता है...क्रिश्चियन होने से ? मैंने पूछा...नहीं, वह बोली, अगर उन्होंने मुझे क़ब्र में दफ़ना दिया और मेरे भीतर जान बची हो ? मैं चाहती हूं कि मुझे ज़मीन में गाड़ने से पहले थोड़ा-सा जलाया जाए, ताकि अगर जीवित हूं, तो थोड़ी-सी जलन लगते ही उठ खड़ी हूं।...एक बार क़ब्र के भीतर गई, तो कोई मेरी आवाज़ भी नहीं सुन सकेगा...कैसी पागल थी...?
‎"कुछ रिश्ते ऊपर से दिखाई नहीं देते।"

(अंतिम अरण्य, निर्मल वर्मा)

No comments: