Wednesday, January 4, 2012

(जिंदगी के प्रवचन - अपनो से दुखी होकर......)

नर नारियों को जन्म मरण का ध्यान ही नहीं है............जन्म देना और निभाना मुश्किल है और किसी को मार देना और मुश्किल.......पर कहा है अपराध बोध और ना है भावनाओं की कद्र...............सब व्यर्थ है सब अज्ञान है सब कोई लगा है मरने मारने में...........और जीने में ........संसार बड़ा विचित्र है.......सचमुच...........ये फेसबुक ने सबको बिगाड़ दिया है......राम राम घोर कलयुग है घोर पाप घोर कलयुग है बाबा घरों.....भुगतेंगे सब भुगतेंगे...........यही बुगातेंगे यही देना होगा हिसाब और यही होगा फैसला..............

(जिंदगी के प्रवचन - अपनो से दुखी होकर......)

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