Saturday, November 12, 2011

एक ठंडी शाम और डूबता सूरज--- बस जीवन की उपमाएं यही खत्म हो जाती है......................
मैंने तो कुछ कहा ही नहीं, ना ही कुछ कहने को रखा था फ़िर तुमने कैसे जान लिया कि में कुछ छुपा रहा हूँ तुमसे...........और फ़िर यह सब तुमसे कहने से क्या होगा यह तो मेरे दुःख दर्द है ना और मुझी को अंत तक लडना है खैर.....तुम खुश रहो यही काफी है.....
मेरा प्यार तुम्हारे लिए पैरो की धुल थी , आज जब अपने सपनो के महल में जाना तो पायदान में अपने पैरो की धुल पोछ लेना ...

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