Monday, November 21, 2011

प्रशासन पुराण 34

प्रदेश के नवाचारी और युवा बेरोज़गार जिन्हें बहुत मशक्कत के साथ सर्कसनुमा लंबा प्रशिक्षण देकर नए काम के लिए प्रदेश के कई जिलों में रखा था, के कामो का रिव्यू हो रहा था. अचानक किसी ने कह दिया कि सरकारी काम और इस तरह के काम में बहुत गेप है बस सब चिल्लाने लगे है गेप है, गेप है, गेप है, फ़िर क्या था बस सभी काम धाम छोडकर गेप की बातें करने लगे और फ़िर कहा कि देखो कितना गेप है हमारे संस्कारों में, कितना गेप है घर के खाने में और इस होटल के सड़े खाने में, कितना गेप है सुविधाओं में और भ्रष्टाचार में मिली सुविधाओं में, कितना गेप है प्रशासनिक अधिकारियों और हमारे रुतबे में, बस अन्तराष्ट्रीय संस्था के लोगों को तो गेप नजर आने लगा फ़िर किसी युवा ने छेड़ दिया कि आपको तो टेक्स फ्री तनख्वाह मिलती है तो वे सब एकदम संगठित हो गए कहने लगे आप लोग गेप की बातें करने आये है या काम का रिव्यू करने....( प्रशासन पुराण 34)

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