Tuesday, November 22, 2011

तू बहुत देर से मिला है मुझे

ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे

हमसफ़र चाहिये हुजूम नहीं
इक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे

दिल धड़कता नहीं सुलगता है
वो जो ख़्वाहिश थी आबला है मुझे

लबकुशा हूँ तो इस यक़ीन के साथ
क़त्ल होने का हौसला है मुझे

कौन जाने के चाहतों में 'फ़राज़'
क्या गँवाया है क्या मिला है मुझे

--अहमद फ़राज़

No comments: