Tuesday, November 1, 2011

ये दास कौन है और मालिक कौन.....हम सब भावनाओं के कोमल तंतुओ से जुड़े है और जब इन रिश्तों में मालिक और दास की बू आने लगे तो फ़िर सब खत्म ही हो जाता है ना मुझे तो ईश्वर भी अपना दोस्त सखा हमजोली या भाई -बंद लगता है इसीलिये में उसे या तो सब कुछ मानता हूँ या कुछ नहीं पर वो भी अकेले में मिलता नहीं कभी उसे मालूम है कि बहुत कुछ हिसाब किताब चुकाना है एक साथ.....

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