Wednesday, November 9, 2011

काशी की महिमा कबीर ली ज़ुबानी...............



काशी की महिमा स्वयं कबीर के ही शब्दो में बांचें-
" अब कहू राम कवन गति मोरी, तजीले बनारस मति भई थोरी
सकल जनम सिवपुरी गवाया, मरती बार मगहर उठि आया
कासी मगहर सम बीचारी, ओछी भगति कैसे उतरे पारी"...

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