Sunday, November 13, 2011

क्या संपूर्ण निराशा में लिखना संभव है ? काफ़्का आखिर तक लिखते रहे-और वे लोग भी जो मृत्यु को जानते थे। ‘‘आत्मा क्या है ?’’ किर्केगार्द ने पूछा था। ‘‘आत्मा वह है कि हम इस तरह जी सकें जैसे हम मर गए हैं, दुनिया की तरफ से मृत।’’
जब हम जवान होते हैं, हम समय के खिलाफ़ भागते हैं, लेकिन ज्यों-ज्यों बूढ़े होते जाते हैं, हम ठहर जाते हैं, समय भी ठहर जाता है, सिर्फ मृत्यु भागती है, हमारी तरफ। निर्मल वर्मा

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