Monday, November 21, 2011

प्रशासन पुराण 35

पुरे प्रदेश के लोग इकठ्ठे थे बेहद जिम्मेदार और गंभीर काम करने वाले- आंकड़ों पर, रणनिती पर, नीति निर्धारण वाले लोग थे और जमकर रूपया भी था इनके पास, सौ - पचास लोगो को रोज़गार देना साल दो साल के लिए और फ़िर काम के बाद निचोडकर फेंक देना इनकी मास्टरी थी, इस तरह के काम में गजब का हूनर और दक्षता थी इनकी. खूब जमकर काम करते घूमते फिरते थे, रोज का भत्ता भी बड़ा भारी था, बहरहाल ये लोग एक बार इकठ्ठा थे और पुरे प्रदेश के लिए रखे भाड़े के लोग मौजूद थे बैठक में फ़िर ना जाने क्यों कही जाने की बात निकली फ़िर होटल , कमरे, बिस्तर, सफाई, भोजन और फ़िर कमरों के पर्दों और बाथरूम के फ्रेशनर्स पर जमके बातें होने लगी तीन चार लोग बहस करने लगे और फ़िर सारी बातचीत इसी बहस में उलझ गयी, एक के बाद एक सफाईयां दी जाने लगी फ़िर फ्लाईट और फ़िर ऐसी गाड़ी और फ़िर ड्राईवर की बातें होने लगी, आख़िरी में एक चाय की प्याली के साथ कुछ लोग जाने लगे और फ़िर धीरे धीर ये सब चले गए, बचे रह गए कुछ लोग जो दीवारों से बतियाते रहे और समस्या बताते बताते आपस में ही सिमट कर रह गए......चुपचाप खामोश से उठ गए वहाँ से ढेरो मुद्दे और प्रश्नों के साथ (प्रशासन पुराण 35)

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