Friday, September 30, 2011

प्रशासनिक पुराण 33

ये छोटी सी नगर पंचायत थी जो प्रदेश के बड़े आदमी की विधानसभा में आती थी इसलिए ये बड़ी महत्वपूर्ण थी यहाँ के मुख्य अधिकारी बड़े लोच वाले सज्जन थे प्रोटोकाल के तहत जो भी वीआईपी आते थे उनका बाकायदा फल फुल और काजू पिश्तो से स्वागत करते थे, बदले में सालो से टिके थे छोटी जगह पर ऐसा दफ्तर कि साला जिला शरमा जाए और पंचायत में चमचमाती गाडिया चाहे अग्निशमन वाहन हो या एम्बुलेंस या अपनी खुद की गाड़ी, सब सेट था. काम यही कि कोई भी मरे खपे या पैदा हो सबकी सेवा सुश्रुआ करना, ऊपर तक से लाभ दिला देना और चुने हुए प्रतिनिधियों के भी खास थे क्योकि कहा ना कि रीढ़ की हड्डी ही नहीं, खूब पुण्य कमा रहे थे बाकी तो सब जाहिर ही है और ऊपर से तुर्रा यह कि जिले के अधिकारियों के जेब में रखते थे क्योकि बड़े आदमी के छोटे से कारिंदे है (प्रशासनिक पुराण 33)

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