Tuesday, September 13, 2011

दुआ- इकबाल


लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी
जिंदगी शम्मा की सूरत हो खुदाया मेरी
लव पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

हो मेरे दम से योंही मेरे वतन की जीनत
जिस तरह फुल से होती है चमन की जीनत
जिंदगी हो मेरी परवान की सूरत या रव
इल्म की शम्मा से हो मुझको मोहब्बत या रव
हो मेरा काम गरीबो की इनायत करना
दर्द मंदों से जहीफों से मोहब्बत करना
मेरे अल्लाह......
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस रह पे चलाना मुझको
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस रह पे चलाना मुझको
मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको
नेक जो राह हो उस रह पे चलाना मुझको

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