Saturday, September 3, 2011

प्रशासन पुराण 25

जिलाधिकारी के चेहरे पर चमक दौड़ जाती थी जब कोई छोटा अधिकारी दो तीन सो करोड की योजना प्रस्तुत करता था, उसके दाए बाए रिद्धी सिद्धि बने संयुक्त जिलाधिकारी भी मुस्कुरा उठते थे ओर फ़िर एक लंबी बहस के बाद बजट बढ़ाया जाता बड़े साब को देना है यह स्पष्ट रूप से कहा जाता ओर हर बार जिले के कनिष्ठ अधिकारियों को धमकाया जाता कि कि प्रदेश के मुखिया के घर बैठक है, अभी तो योजनाये स्वीकृत नहीं हुई है पर हिसाब किताब की चौसर बैठ गयी है, नए गुस्सैल जिलाधिकारी अब नर्म पड गए है(प्रशासन पुराण 25)

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