Wednesday, September 28, 2011

वो तेरा शहर और तुम् बहुत याद आते हो......................मेरा शहर तो मेरी नसों में दौडता है और रह रहकर कौंधता है ..बस फर्क इतना है कि इसे नसों में तुम ज़िंदा रहते हो !!! तुम्हारी याद और क्षणिक जुदाई कपकपा देती है...........इन सर्द होती सुबहो में बस अब.............यही तो है मेरे पास......

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