Wednesday, September 28, 2011

मप्र में पंचायती राज को मुझे लगता है दरकिनार किया जा रहा है सारी योजनाएं सरकार मूलक होती जा रही है और नियम कायदों को ताक में रखकर काम किये जा रहे है. लोगो की अपेक्षाओं को केंद्र में ना रखकर बहुत सारी गैरजरूरत की बातें थोपी जा रही है. आज एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मसलन गाँव में कीचड है पर हम उन्हें जलाभिषेक करने को कह रहे है, पंचायते अपनी अस्मिता खो रही है साथ ही लोगो का विश्वास इस महत्वपूर्ण व्यवस्था पर से भरोसा उठ रहा है ऐसे में विकेंद्रीकरण और जनता का राज या लोकसभा ना राज्यसभा सबसे बड़ी ग्राम सभा का क्या अर्थ रह जाता है.......?

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