Wednesday, September 28, 2011

जनभागीदारी के नाम पर ढेर सारा रूपया

आशीष कुमार अंशु की पोस्ट पर प्रतिक्रया
मेरा एनजीओ पुराण पढाने से बहुत जाले साफ़ हो सकते है और यह बिलकुल सच है कि विदेशी रूपयों का जितना बेदर्दी से इस्तेमाल हो रहा है और सिर्फ सुविधाएँ भकोसने में. आज ही में सीहोर जिले के नस्रुल्लाह्गंज ब्लाक में गया था वहाँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ५-६ लोग राज्य सरकार के बगैर अंग्रेजीदां लोगो को और नगर के चुने हुए मात्र ४ प्रतिनिधियों को "ज्ञान" बाँट रहे थे वो भी पावर पॉइंट पर और लोग कौतुहल से उस अंगरेजी भाषण को सुन रहे थे जो उनके नगर का भविष्य तय करेगा, बाहर कीचड में उनकी ऐसी गाडियों के ड्राईवर इस विकास की माँ भैन कर रहे थे .............अब कोई क्या बताएं इन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ५-६ लोगो को कि भैया कुछ भी पल्ले नहीं पडा पर हाँ आपका बढ़िया टी ए और डी ए बन् गया .....और काम भी निपट गया अब जनभागीदारी के नाम पर ढेर सारा रूपया और एंठ लेंगे फ़िर प्रशिक्षण और ना जाने क्या क्या और आख़िरी में IEC सामग्री के नाम पर गलत सलत हिन्दी में प्रकाशन फ़िर अनुवाद.........अंशु लिस्ट बहुत लंबी है सरकार को शीघ्र ही कार्यवाही करना चाहिए........

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