Monday, August 8, 2011

ठहाके नहीं लगाए

एक दोस्त से मिलने की कह रहा था तो बोला रोज तो मिल रहे है बात कर रहे है मैंने कहा भाई हम तो अनपढ़ दुनियादार लोग है इस वर्चुअल दुनिया में यकीन नहीं रखते जब तक जम से मिले नहीं, गले नहीं मिले खूब ठहाके नहीं लगाए तब तक क्या मिलना ऐसे मिलने को मिलना कहते है लो भला यह भी कोइ बात है. है जी..........!!!!!!!!!!!!

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