Wednesday, August 17, 2011

लिपटा और गुमा हुआ...दिन

कल तक अन्ना के नाम की धूम मचाने वाले फेसबुक के लोग कहा है यहाँ पूरी वाल खाली पडी है सब ठंडा.............अशोक वाजपेयी की एक अश्लील कविता याद आ रही है..........
"स्खलन के बाद जब कुछ अच्छा नहीं लगता।"
खैर.........एक नया दिन और सब वही सर्द सुबह और ओंस के बीच लिपटा और गुमा हुआ...दिन को कहा तलाश करू...रात तो गुजर ही गयी थी जैसे तैसे...अब यह चक्र भी हो ही जाएगा अपनी धुरी पर पूरा।

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