Monday, August 8, 2011

मुकुल शिवपुत्र -संगीत का महान गायक सीहोर में


अभी मुकुल शिवपुत्र से मिलकर आ रहा हूँ वे यहाँ सीहोर में एक केंद्र पर अपना इल्लाज करवा रहे है, संगीत का महान गायक जिस जीर्ण शीर्ण अवस्था और भवन में रह रहा है उसके लिए मन बहुत व्यथित हुआ, सुबह पंकज सुबीर ने याद दिलाया तो आज जाकर मिला। खूब बातें की, और फ़िर तय हुआ कि २० अगस्त को वो सीहोर में अपनी एक प्रस्तुति देंगे अब देखना यह है कि मुकुल अपना वादा निभाते हुए गाते है या नहीं. कुमार जी के सुयोग्य पुत्र और शिष्य के साथ बीताये ये क्षण हमेशा याद रहेंगे. मुकुल ने संगीत परम्परा की बात की, संगीत में प्रयोग और नवाचार की बात की अपनी अकादमी की बात की जो म् प्र शासन ने उन्हें सौपी थी, मुकुल ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले २२ बरसो से वो घर नहीं गए है पर शिद्दत से राहुल बारपुते, विष्णु चिंचालकर और बाबा डीके को याद किया. कुमारजी को याद करते हुए आँखे तो नम हो गयी पर बोले कुछ नहीं. मुझसे बच्चो सी जिद करने लगे कि अपने घर ले चलो और मेरा तानपुरा तुम रख लेना, कुछ तो सीखो और फ़िर बोले एक तानपुरा रख लो और दूसरा में मीराज पूना से आगे है वहाँ से ला दूंगा. मुकुल से मैंने पूछा कि फ़िर २० तारीख का पक्का ना तो बोले जरूर मेरे तानपुरे भोपाल से लाना है एस पी को बोलकर एक गाड़ी ले लेते है उसमे मेरे दोनों तानपुरे आ जायेंगे एक राम यहाँ है जो बांसुरी बजाता है, एक संगीत महाविद्यालय में में संगीत सिखाने भी जा रहा हूँ, सीहोर में संगीत का अच्छा माहौल है, मैंने कहा २० तारीख के बाद कहा जाओगे दादा तो बोले में तो यायावर हूँ मांग कर खाते हुए कितने बरस बीत गए है मीडिया को स्टोरी चाहिए मेरी मदद करने कोइ नहीं आता सबको मसाला चाहिए कि मुकुल ने आज कितनी ली या कब भागा?मुझे देवास और दिल्ली की वो शाम याद आगई जब मुकुल दादा को मैंने लाइव सुना था और कितने ही लोग उनके मुरीद बन जाते है गाना सुनकर, पिछली दफा वो भोपाल में थे तो भी में लगातार उनसे मिलता था और वो धीरे धीरे देवास का पूछते थे और फ़िर राग, आरोह और नयी पीढ़ी की बात करते थे उनके पसंदीदा गायक और उभरते हुए नए कलाकारों को लेकर वे बहुत उत्साहित है आज भी वो कह रहे थे कि २० को गाऊंगा तो सही पर भले ही १० श्रोता आये पर संगीत की समझ वाले लोग आये...यही मेरा पारितोष होगा और संतुष्टि मिलेगी

1 comment:

राजेश उत्‍साही said...

यह लाइव भेंटवार्ता पढ़कर दिल भर आया। मुकुल जी की यायावरी के किस्‍से पहले भी पढ़े हैं, उन्‍होंने सही कहा कि मीडिया को शायद बस स्‍टोरी ही चाहिए। पता नहीं पर खुद मुकुल जी अगर इसमें ही खुश रहते हैं तो कोई क्‍या कर सकता है।