Wednesday, August 17, 2011

उल्लू सीधा करना

एक लंबी छुट्टी के बाद आज ही लौटा हूँ कर्मस्थली पर देखना है कि ठीक से काम कर पाता हूँ या नहीं अब मन नहीं है कि फ़ालतू के चक्करों में पडू और अपना ध्यान और अपना मन व्यथित करू वो भी उस सब के लिए जो अपना था ही नहीं जैसे एक साये को पकडने के लिए देह की समिधा देकर भी साये को पकड़ा नहीं जा सकता तो क्या मोह क्या माया और क्या रिश्ता क्या नाता बस सब माया है, अपना उल्लू सीधा करना में भी जानता हूँ और बाकी सब तो माहिर होते ही है...

No comments: