Tuesday, August 2, 2011

प्रशासन पुराण17

पूरे दफ्तर के बाबू रोज राह देखते थे जनप्रतिनिधियों की कि वे आए और विधायक / सांसद से कुछ राशि स्वीकृत कराकर लाये और फ़िर ये प्रकरण बनाकर अपनी जेब भरे, उनके आने पर साहब से लेकर चपरासी खुश हो जाते और ये महामूर्ख इन बाबूओ के सामने हाथ पसारे खड़े रहते इन्हें चाय पिलाते और केले खिलाते और फ़िर बाहर जाकर पांच सौ की हरी पट्टी की गडडी देते और इस तरह से जनभागीदारी का काम होता देश में,हरामखोरो की फौज है यहाँ (प्रशासन पुराण17)

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