Tuesday, August 9, 2011

प्रशासन पुराण 19

सुबह से दफ्तर में मोबाइल पर मजेदार धार्मिक धूने चालू हो जाती थी गायत्री मन्त्र, हनुमान चालीसा, महामृतुन्जय जप, राम रक्षा, भजन, और फ़िर सारा दिन यही धूने गूंजती रहती थी सारे आने जाने वाले लोग भक्तिभाव से लेन-देन भी करते और मोबाइल के टॉप अप के लिए दान दक्षिणा भी दे जाते कैसा अनूठा माहौल था और कैसा समागम साहब से लेकर चपरासी तक सब खुश बस विकास का काम लगातार जारी था, कहते है जिंदगी में ऐसा सुख नसीबवालो को मिलता है(प्रशासन पुराण 19)

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