Saturday, December 3, 2011

एक तो ख्वाब लिए फिरते हो गलियों गलियों !
और तकरार भी करते हो ख़रीदार के साथ !!

- फ़राज़ साहब
मैं वही हूँ मोमिन ए मुब्तिला
तुम्हे याद हो कि ना याद हो

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