Thursday, December 22, 2011

हताशा से एक व्यक्ति बैठ गया था
व्यक्ति को मै नहीं जानता था
हताशा को जानता था
इसलिए मैं उस व्यक्ति के पास गया
मैं हाथ बढ़ाया
मेरा हाथ पकड़कर खड़ा हुआ
मुझे वह नहीं जानता था
हाथ बढ़ाने को जानता था
हम दोनों साथ चलें
दोनों एक-दूसरे को नहीं जानते थे
साथ चलने को जानते थे

-विनोद शुक्ल- वागर्थ जुलाई -०७ अंक १४४

No comments: