Tuesday, January 15, 2013

जिसे ढूंढती है तेरी नज़र, न उदास हो मेरे हमसफ़र .

दिल ना उम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है,
लम्बी है ग़म की शाम, मगर शाम ही तो है,

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर,न उदास हो मेरे हमसफ़र,
ये सितम की रात है ढलने को, है अँधेरा ग़म का पिघलने को,

ज़रा देर इसमें लगे अगर, न उदास हो मेरे हमसफ़र,
नहीं रहनेवाली ये मुश्किलें, के है अगले मोड़ पर मंजिलें,

मेरी बात का तू यकीन कर, न उदास हो मेरे हमसफ़र।
कभी ढूंढ लेगा ये कारवां वो नयी ज़मीन, नया आसमान,

जिसे ढूंढती है तेरी नज़र, न उदास हो मेरे हमसफ़र .
http://www.youtube.com/watch?v=IzFym1f1Jfw
Mohit Dholi Apoorva Dubey 
तुम दोनों के लिए........................कि भरोसा अब भी उतना ही है जितना समुद्र के पानी मे नमक.............

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