Tuesday, March 19, 2013

सतना के भूले नहीं तुम............

सतना की खुरचन, पन्नीलाल चौक की चाट, सिरमोर चौराहे का आई सी एच, वीनस स्वीट्स, ताजे फल, रेलवे स्कूल, रीवा रोड, भरहुत नगर, मुख्तियार गंज, हनुमान चौक.........मेघा होटल और फ़िर कोठी रोड ........हाय कितनी यादें जुडी है इस शहर से मै मजाक या गंभीरता में हमेशा कहता हूँ कि कभी इतने पाप करने के बाद भी अगला जन्म मनुष्य योनी में मिला और अगर भगवान ने पूछा कि बेटा कहाँ पैदा होना चाहोगे तो जरुर कहूँगा कि प्रभु इस बार सतना में में ही सेट कर दो........इस शहर से मेरी सबसे अच्छी यादें और भावनाएं जुडी है 1991-92 और फ़िर 2005-06.......ना जाने क्यों बघेली बहुत मीठी बोली लगती है, "आई दादा बैठी, अपन पंचा के........या अरे हो गया छोडिये का जुमला हरेक की जुबान पर और फ़िर पान खाने जाओ तो जो अदा से पान पेश किया जाता है ..........कुल मिलाकर यह शहर बहुत अच्छा और बसने लायक है. यह तुम्हारे लिए है, सुन रहे हो ना, कहाँ हो तुम.............

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