Friday, July 27, 2012

नर्मदा किनारे से बेचैनी की कथा II

माननीय प्रातः स्मरणीय श्री एन डी तिवारी जी के अदम्य साहस को प्रणाम और उनकी हिम्मत को जो लगातार नकारती रही रोहित को, और उस जज्बे को जिसने बत्तीस साल तक एक बाप को छुपा रखा जमाने से............अब सवाल यह है आने वाले बत्तीस सालों में कितने रोहित होंगे मेरा मतलब है आज के नेता आने वाले समय में क्या गुल खिलाएंगे............देश में कितने रोहित........अब सरकार को डी एन ए टेस्ट की प्रकिया को सरल और विकेन्द्रित ढंग से करना चाहिए और सभी पंचायत स्तर पर परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करना चाहिए............हमारे पास एनआरएचएम में "अन्टाईट" फंड होता ही है, बस कर दो स्थापित, म् प्र में तो जगह जगह जीवन आरोग्य केंद्र खुल ही रहे है बस देश भर में इस मॉडल को रेप्लीकेट करते हुए डी एन ए टेस्ट भी शुरू कर दे और मेरा विनम्र अनुरोश है कि यह नेक काम शीघ्र शुरू करें क्योकि आधे से ज्यादा रोहित अँधेरे में है और इन सबको एन डी तिवारीयों से स्वीकृती दिलवाने में समय तो लगेगा क्योकि १९९३ से पंचायती राज के प्रतिनिधि आये है और इसके पहले से विधायक और सांसद रहे है और फ़िर इसके बाद हमारे ब्युरोक्रेट्स भी तो नंबर लगाकर खड़े है और पूछ रहे है .......मेरा नंबर कब आएगा.................??? (नर्मदा किनारे से बेचैनी की कथा II )

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