Friday, April 8, 2011

एनजीओ पुराण भाग ३०

जब वो पढके निकला तो समाज में सामाजिकता का बड़ा बोलबाला था और इज्जत थी, दूकान बनाना थी यह तो प्राण था ही. ससुरी अंगरेजी में नानी मरती थी सो एक आईडिया आया क्यों ना ऐसी लड़की से ब्याह कर ले जो सब मामला सुलटा ले बस खूब प्रयास किये पर जमा नहीं सो विजातीय से ब्याह बना लिया जो सक्षम थी निपुण थी. बस आजकल संस्था मजे में है और देश में सोहाद्र का प्रतिसाद अलग से मिलता हैी(इति एनजीओ पुराण भाग ३० समाप्त)

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