Monday, April 18, 2011

एनजीओ पुराण भाग ५२

वो दिल्ली से पत्रकारिता पढकर आया था और इसी दूकान में लग गया, खूब झमाझम भाषण देता और जमकर विचारधारा का बखान करता. बाद में पता चला कि वो तो देश्प्रेमियो की संस्था का नुमाइंदा था जो इन प्रगतिशीलो के पास रहकर देशप्रेम का सबुत दे रहा था, उसे निकाल तो दिया कामरेडों ने पर बाद में प्रदेश में एक राज्य सरक्षण से जुडी दूकान पर काम करने लगा बस आजकल उसी का मालिक है(एनजीओ पुराण भाग ५२ )

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