Friday, April 15, 2011

एनजीओ पुराण भाग ४६)

उसका देश के लिए प्रेम था विवि अनुदान आयोग का रूपया लेकर वो देश भर में देश का आइडिया बेचता था बड़ा रसूखदार आदमजात था उसके भाई बंद इस नेक काम में मदद करते थे हवाई जहाज से आना जाना और देश प्रेम का ठोस काम। दो कहानी जो मंटो और स्वयप्रकाश ने लिखी थी से उसकी रोजी रोटी चलती थी पर दिल्ली में रहने से कुछ ही कहो अलग ही फर्क पडता है सो वहा रहना मजबूरी थी वरना देश के गांव की सेवा कैसे होती?(एनजीओ पुराण भाग ४६ समाप्त )

No comments: