Wednesday, April 6, 2011

एनजीओ पुराण भाग २३

छोटे शहरों से आये लोगो के लिए ये शहर एक बड़ा अचम्भा था यहाँ की कुडिया और लडके बड़े निराले थे, साले सब मजेदार बाते करते थे और खूब काम करते थे जिसे एनजीओ कहते थे रात शाम से ही गुलज़ार होना शुरू होती थी और फिर देर रात तक मार्क्स, चे गवारा पर जोरदार बहस दारू के दो पेग जाने के बाद ही होती थी. ये मुन्ना भी पीना सीख गया और फिर एक दिन गांव का ये लौंडा बुद्धीजीवी बन गया बस रोज घर जाकर बीबी से पीटता था(इति एनजीओ पुराण भाग २३ समाप्त)

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