Friday, April 8, 2011

एनजीओ पुराण भाग ३२

वो सुन्दर थी जवान थी, उसके जैसी तीन और सखिया मिल गयी बस फिर क्या था समाज में " बेचारी अबलाओं" की स्थिति सुधारने निकालने निकल पडी, सारे मर्दों को हर तरीके से निपटाने लगी रोज शहर के मर्द परेशान रहते 'हम सब कर सकती है' यह स्लोगन था. सब कहते " आता ना जाता, भारत माता" पर काम जारी था. अब ये महिलाओं की सबसे प्रमुख संस्था थी लोग घर बिगाडू औरते कहते थे पर भला हो उस संस्था का जो अबलाओं को आर्थिक रूप से सबला बना रही थी(इति एनजीओ पुराण भाग ३२ समाप्त)

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